अररिया: सही मायने में हमेशा सद्भावना के प्रतीक रहे लक्ष्मी बाबू, शहरवासी मायूस
अररिया, संवाददाता उच्च विद्यालय के समर्पित शिक्षक व सदभावना मंच के अध्यक्ष लक्ष्मी

अररिया, संवाददाता उच्च विद्यालय के समर्पित शिक्षक व सदभावना मंच के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण मेहता के निधन पर सद्भावना मंच के तत्वावधान में रविवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। वर्ष 2016 में स्वर्गीय मेहता सद्भावना के प्रथम अध्यक्ष चुने गए थे और जीवन के अंतिम समय तक वो ही मंच के अध्यक्ष रहे थे। स्थानीय पेंशनर समाज भवन में आयोजित सभा की अध्यक्षता मंच के कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ श्याम लाल यादव ने की। जबकि संचालन मंच के सचिव मो मोहसिन ने किया। इस मौके पर उनके तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय मेहता गणित और फिजिक्स विषय के विद्वान और समर्पित शिक्षक के साथ निहायत ही नेक इंसान थे। वो सही मायनों में सद्भावना के प्रतीक भी थे। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से सुखी संपन्न होने के बावजूद स्वर्गीय मेहता का जीवन पूरी तरह सादगी भरा रहा। उनके व्यक्तित्व में कोई दोहरापन नहीं था। जो बाहर था वही अंदर भी था। अतिथियों ने उन्हें याद करते और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वो सच को सच और गलत को गलत कहने में हिचकते नहीं थे। जो कहना होता मुंह पर कहते थे। पीठ पीछे किसी की बुराई नहीं करते थे। वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय मेहता अपनी नाराजगी और शिकायत भी बहुत शालीनता और मुस्कुराते हुए जाहिर करते थे। सद्भावना मंच के क्रियाकलापों में उनके योगदान की चर्चा करते हुए कहा गया कि जब जब भी जरूरत पड़ती वो सबसे पहले अपना कदम बढ़ाते थे। सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक सौहार्द को कायम और मजबूत रखने वाले हर प्रयास में वो बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे। जब जब आपसी भाईचारे का ताना बाना बिखरने का अंदेशा होता वो विचलित हो जाते थे और इसे बचाए रखने के हर प्रयास में कदम से कदम मिला कर चलते थे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जिले की गंगा जमुनी तहजीब को बचाए रखने और इसे मजबूती देने में वरीय अधिवक्ता स्वर्गीय मो ताहा खामोश, अररिया नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय हंसराज प्रसाद और स्वर्गीय मेहता जैसे लोगों के अहम योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। ऐसे लोगों के एक एक कर दुनियां छोड़ कर चले जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब नई नस्ल की जिम्मेदारी बनती है कि बुजुर्गों के जज्बे से सीख लेते हुए सद्भावना के अलख को जलाए रखने में अपना योगदान दें। वहीं इस अवसर पर स्वर्गीय मेहता के पुत्र अनिल कुमार पौत्री प्रीति कुमारी ने कहा कि वो घर और बाहर दोनों जगह एक जैसा जीवन बिताते थे। घर में भी अनुशासन प्रिय और नियम कायदा से चलते थे। इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वालों में सतेंद्र नाथ शरण, बसंत कुमार राय, जफरूल हसन, कृत्यानंद ठाकुर,रामानंद यादव, ठाकुर शंकर कुमार, शम्स आजम, हाजी रजी अहमद, अमित कुमार अमन और मामून रशीद आदि शामिल थे।

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