
जब दो दिन तक चलती थी मतों की गिनती, अब कुछ घंटों में फैसला
संक्षेप: भागलपुर में चुनाव के बाद मतगणना की प्रक्रिया में समय के साथ बदलाव आया है। पहले जहां मतगणना में कई घंटे लगते थे, अब ईवीएम के कारण यह प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है। तकनीक ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि लोकतंत्र को भी पारदर्शी बनाया है।
कभी बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना यानी वोटों की गिनती का दौर बेहद लंबा और रोमांचक हुआ करता था। दो-दो दिन तक मतगणना चलती रहती थी, परिणाम आने में देरी होती थी। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में तनाव और उत्सुकता बनी रहती थी। आज से दो–तीन दशक पहले, जब चुनावों में मतपेटियों या बैलेट बॉक्स का उपयोग होता था। मतदाता पर्ची पर अंकित प्रत्याशियों के नाम व चुनाव चिह्न के सामने मोहर लगाते थे। मतपत्र को अच्छी तरीके से मोड़कर इसे मतपेटी में डालते थे। पहले संसाधन सीमित थे, तकनीक का अभाव था और मतों की गिनती पूरी तरह मानवीय मेहनत या मैनुअल तरीके पर निर्भर रहती थी। समय के साथ मतगणना का तरीका पूरी तरह बदल गया है। दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सेल्स टैक्स के पूर्व अधिकारी सुबोध मंडल ने बताया कि जहां पहले दो-दो दिन तक उम्मीदवार और समर्थक धड़कनें थामे बैठते थे, वहीं अब कुछ ही घंटों में जनता का फैसला सबके सामने होता है। तकनीक ने न सिर्फ प्रक्रिया को तेज बनाया है, बल्कि लोकतंत्र को और पारदर्शी भी किया है।

मतदाता कम थे, बावजूद मतगणना में विलंब
सन 2000 से अब तक सभी विधानसभा चुनाव के मतगणना में शामिल होने वाले शिक्षक डॉ. शेखर कुमार गुप्ता बताते हैं कि भले ही तब मतदाताओं की संख्या आज से कम होती थी, मगर मतगणना में देरी होना आम बात थी। लकड़ी या लोहे की मतपेटियां अलग-अलग मतदान केंद्रों से लाकर मतगणना केंद्र के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित तरीके से रखी जाती थीं। मतगणना के दिन कर्मी सील खोलकर एक-एक मतपत्र निकालते, उन्हें देख-देखकर अलग-अगल उम्मीदवारों के नाम के अनुसार ढेर में रखते थे। फिर इसकी गिनती करते। इस प्रक्रिया में कई बार रात भर का समय लग जाता था।
अखबार व रेडियो के जरिए मिलते थे नतीजे
जिला पेंशनर समाज के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि उस दौर में मतगणना स्थल पर माहौल किसी त्यौहार जैसा होता था। उम्मीदवारों के समर्थक गिनती केंद्र के बाहर घंटों तक नारे लगाते रहते थे। कई बार बिजली चली जाने या मतपत्र गुम हो जाने जैसी घटनाएं भी देरी का कारण बनती थीं। मतगणना केंद्रों की सुरक्षा में पुलिस तैनात रहती थी और नतीजे रेडियो या अखबार के जरिए जनता तक पहुंचते थे। अब मतगणना केंद्रों पर लाइव अपडेट, कंप्यूटर आधारित डेटा एंट्री और रियल-टाइम परिणामों की सुविधा से मतदाताओं तक हर पल की जानकारी पहुंच रही है। ईवीएम ने बदला गिनती का गणित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम ) के आने से मतगणना की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

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