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बोले पूर्णिया : शहर के विकास की रफ्तार पर ट्रैफिक जाम का लगा ब्रेक

बोले पूर्णिया : शहर के विकास की रफ्तार पर ट्रैफिक जाम का लगा ब्रेक

संक्षेप: पूर्णिया शहर में ट्रैफिक प्रेशर लगातार बढ़ता जा रहा है। अनियंत्रित पार्किंग, टोटो और ऑटो चालकों की मनमानी के कारण मुख्य सड़कों पर जाम आम हो गया है। बस स्टैंड, नेवालाल चौक और अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थिति बेहद खराब है। 

Mon, 17 Nov 2025 01:15 AMNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बोले पूर्णिया : शहर के विकास की रफ्तार पर ट्रैफिक जाम का लगा ब्रेक

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-प्रस्तुति: भूषण

शहर में ट्रैफिक प्रेशर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सुबह और शाम के वक्त शहर की मुख्य सड़कों पर जाम आम बात हो गई है। खासकर टोटो और ऑटो चालकों की मनमानी, अनियमित पार्किंग और बीच सड़क पर अचानक वाहन रोक देने की वजह से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बस स्टैंड, लाइन बाजार, मरंगा रोड, आरएन साह चौक और नेवालाल चौक जैसे प्रमुख स्थलों पर हर दिन जाम का नजारा आम हो गया है। माकूल पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और भी बदतर होती जा रही है। बस स्टैंड के सामने खड़ी बसों से लेकर बीच सड़क पर यात्रियों को बिठाने-उतारने का सिलसिला लगातार जारी रहता है।

पूर्णिया शहर का ट्रैफिक सिस्टम अब बेकाबू होता जा रहा है। शहर की सड़कों पर रोजाना वाहनों का इतना दबाव रहता है कि आम नागरिकों के लिए सड़क पार करना भी मुश्किल हो गया है। अनियंत्रित पार्किंग, चौक-चौराहों पर वाहन चालकों की मनमानी, फुटपाथों पर अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही ने स्थिति को और भयावह बना दिया है।ट्रैफिक की समस्या सिर्फ प्रशासनिक नहीं है, बल्कि सामाजिक भी है। लोग खुद भी नियमों का पालन नहीं करते। गलत दिशा में गाड़ी चलाना, बीच सड़क पर पार्किंग करना और जरा-सी जगह देखकर वाहन घुसा देना, यह सब आम बात हो गई है। जब तक नागरिक खुद जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक कोई भी योजना कारगर नहीं होगी। कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पूर्णिया शहर अब विकास की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था इस विकास की राह में रुकावट बनती जा रही है। अब जरूरत है एक समन्वित योजना की-जहां प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और आम जनता, सभी मिलकर शहर को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। ओवरब्रिज, बायपास, और सख्त ट्रैफिक नियमों के क्रियान्वयन के बिना पूर्णिया की सड़कों पर राहत की उम्मीद करना मुश्किल है। पिछले एक दशक में पूर्णिया की जनसंख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साथ ही निजी वाहनों की संख्या में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। टोटो, ई-रिक्शा, बाइक और ऑटो की संख्या अब हजारों में है। शहर की सड़कें उतनी चौड़ी नहीं हैं कि इतने वाहनों का बोझ संभाल सकें। परिणामस्वरूप, सुबह और शाम के वक्त मुख्य सड़कों पर जाम लगना आम बात हो गई है। बस स्टैंड, नेवालाल चौक, भट्ठा बाजार, मधुबनी बाजार और लाइन बाजार सबसे अधिक प्रभावित इलाका है।

प्रशासनिक प्रयास अपर्याप्त

ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन और पुलिस ने कई बार योजनाएं बनाई-‘नो पार्किंग ज़ोन’, ‘वन वे सिस्टम’ और ‘रोड चौड़ीकरण’ जैसी योजनाएं बनाई गईं, लेकिन इनका असर धरातल पर कभी नहीं दिखा। अस्थायी अभियान चलाकर चालान काटे गए, मगर स्थायी समाधान आज तक नहीं मिल पाया। जनहित मोर्चा समेत कई सामाजिक संगठनों ने नेवालाल चौक और गुलाबबाग रोड पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रमुख चौक-चौराहों पर ओवरब्रिज बना दिया जाए, तो शहर को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, शहर के अंदर से होकर गुजरने वाले भारी वाहनों को बायपास रोड से गुजारने की सख्त जरूरत है, ताकि शहर का ट्रैफिक हल्का हो सके।

पूर्णिया को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की बातें तो बहुत हुईं, लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट के क्षेत्र में स्मार्ट समाधान अब तक लागू नहीं हो सके। न ट्रैफिक सिग्नल सही ढंग से काम कर रहे हैं, न ही निगरानी कैमरे हर प्रमुख बिंदु पर सक्रिय हैं।

ये हैं ट्रैफिक जाम के प्रमुख केंद्र

शहर का नेवालाल चौक, बहुमंजिला बाजार, लाइन बाजार, गुलाबबाग रोड और खुश्की बाग हाट इलाके अब ट्रैफिक जाम के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। सड़क किनारे खड़े टोटो, ठेला और रिक्शा, फुटपाथों पर फैले दुकानदारों का कब्जा और बीच सड़क पर रुकने वाले वाहनों के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित रहता है। इन क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। भीड़ के समय तो स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार स्कूल बसें और एंबुलेंस तक घंटों जाम में फंसी रह जाती हैं। लोगों को रोजाना आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जबकि ट्रैफिक पुलिस का अभियान भी असरदार साबित नहीं हो रहा। स्थायी सुधार के लिए सड़कों को अतिक्रमणमुक्त कर नियमित निगरानी जरूरी है।

हमारी भी सुनें

शहर में टोटो की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि हर 10 कदम पर एक टोटो खड़ा रहता है। बिना सोचे-समझे बीच सड़क पर रोक देने से जाम लग जाता है।

-बबलू यादव

बस स्टैंड के पास हर दिन जाम लगता है। सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने में देर हो जाती है। ऑफिस जाने में भी लोगों को दिक्कत होती है।

-फागु यादव

टोटो और ऑटो के लिए अलग पार्किंग तय कर दी जाए तो आधा जाम अपने आप खत्म हो जाएगा। साथ ही ट्रैफिक रूल के लिए कड़ा रुख अपनाया जाए।

-जसविंदर

बीच सड़क पर पैसेंजर बिठाने का ट्रेंड बंद होना चाहिए। यही शहर के जाम की सबसे बड़ी वजह है। इससे बड़ी-बड़ी दुर्घटना भी हो रही है।

-मुकेश

बस स्टैंड के सामने सुबह के समय हालत बहुत खराब रहती है। टोटो वाले सारे रास्ते बंद कर देते हैं जिसके कारण लोगों को निकलना मुश्किल है।

-दीपक

शहर में पर्याप्त पार्किंग नहीं है। नगर निगम ने पांच जगह पर पार्किंग जोन बनाया है। इससे काम नहीं चलता। पुलिस सिर्फ चालान करती है।

-चंदन

हर चौक-चौराहा पर ट्रैफिक पुलिस की जरूरत है। पुलिस की कमी से लोग नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इससे परेशानी बढ़ी है।

-अजय

टोटो चालक हेलमेट नहीं पहनते, न ट्रैफिक नियम मानते हैं। दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। पैसेंजर देख रोड पर ही टोटो वाला हार्ड ब्रेक ले लेता है।

-राजू

जाम लगने से एंबुलेंस तक फंस जाती है। किसी दिन बड़ी घटना हो सकती है। आने वाले समय में लोगों को रोड पर पैदल चलना मुश्किल होगा।

-शिबू

हर रोड पर बिना जरूरत के टोटो खड़े रहते हैं। यात्रियों के लिए भी खतरा है। इनका स्पीड भी इतना ज्यादा है कि लगता है सीधे ठोक देगा।

-तापस

सुबह दफ्तर जाने में 15 मिनट का रास्ता आधे घंटे में तय करना पड़ता है। रोड पर टोटो की लंबी कतार होती है। जिससे जाम लगता है।

-विजय आर्य

ऑटो और टोटो के लिए ट्रैफिक पुलिस को स्पॉट तय करना चाहिए, तभी राहत मिलेगी। जहां-तहां रोकने वाले पर कड़ाई भी किया जाना चाहिए।

-पवन शाह

ट्रैफिक नियम का पालन सिर्फ चारपहिया चालकों से करवाया जा रहा है, जबकि असली परेशानी टोटो वालों से है। सबसे पहले इस पर नियंत्रण होना जरूरी है।

-अशोक कुमार

अगर नगर निगम ठोस पार्किंग व्यवस्था करे तो आधा ट्रैफिक प्रेशर अपने आप कम हो जाएगा। शहर के सभी मार्केट एवं चौक चौराहा पर पार्किंग की व्यवस्था अत्यंत जरूरी है।

-राकेश

टोटो चालकों को ट्रैफिक नियमों की ट्रेनिंग देना जरूरी है। एक वहम है कि टोटो ड्राइवर को ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं है। इसी में टीनएजर्स नियमों की अनदेखी करते हैं।

-मणि कुमार

शहर की सड़कों पर हर दिन जाम लगने से लोग परेशान हैं। प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। रोड पर जिस तरह की हालत है उससे शहर की रौनक भी गायब है।

-दिनेश दास

बोले जिम्मेदार

शहर में वाहनों की पार्किंग के लिए पांच स्थानों पर जोन बनाए गए हैं। बस स्टैंड के सामने टोटो स्टैंड बनाया गया है। अतिरिक्त पार्किंग जोन की तलाश जारी है। टू व्हीलर पार्किंग स्थल प्रस्तावित है।

-कुमार मंगलम, नगर आयुक्त, पूर्णिया

चुनाव समाप्त होने और पुलिस की अतिरिक्त ड्यूटी खत्म होने के बाद अब शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने की तैयारी है।

-कौशल किशोर कमल, ट्रैफिक डीएसपी, पूर्णिया

शिकायत

1. लोगों को ऑफिस, स्कूल या बाजार जाने में देरी होती है।

2. मुख्य सड़कों पर टोटो की अनियंत्रित आवाजाही सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है।

3. भट्ठा बाजार जैसे व्यस्त इलाकों के लिए अब तक कोई रूट चार्ट तय नहीं किया गया है।

4. शहर के बीचोंबीच फोर व्हीलर चालक अक्सर सड़क पर ही वाहन पार्क कर देते है।

5. ट्रैफिक लाइट भी अधिकतर समय खराब रहती है, जिससे चौराहों पर अव्यवस्था फैल जाती है।

सुझाव

1. हर प्रमुख स्थान पर ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी जरूरी है।

2. जहां-तहां टोटो चालक मनमानी तरीके से वाहन रोक देते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है।

3. ऑटो और टोटो के संचालन के लिए स्पष्ट प्रावधान बनाए जाएं।

4. शहर में समुचित पार्किंग स्थल विकसित करना बेहद जरूरी है।

5. सभी ट्रैफिक लाइटों को दुरुस्त कर नियमित निगरानी की जाए। वाहन संचालन में काफी सुधार होगा और दुर्घटनाएं भी घटेंगी।