बोले कटिहार : शहीद चौक पर वाहन रेंग रहे,जाम में फंसना नियति
कटिहार नगर निगम क्षेत्र का शहीद चौक अब जाम और अव्यवस्था का शिकार बन चुका है। यहां एंबुलेंस, स्कूल बसें और यात्री घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं। बारिश में जलभराव की स्थिति और बिगड़ जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। प्रशासनिक उदासीनता और अव्यवस्थित टेंपो संचालन से स्थिति और विकट हो गई है।
प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज
कटिहार नगर निगम क्षेत्र का शहीद चौक कभी इस शहर की धड़कन हुआ करता था। यही चौक शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ता था, यहीं से रोज़गार, व्यापार और आवाजाही की रफ्तार तय होती थी। लेकिन आज वही शहीद चौक अपनी सुगमता खोकर आम लोगों के लिए परेशानी, झुंझलाहट और असहायता का दूसरा नाम बन चुका है। शहर से विभिन्न इलाकों में जाने का सबसे सुलभ मार्ग माने जाने वाला यह चौक अब जाम का स्थायी ठिकाना बन गया है। हालात ऐसे हैं कि यहां जाम में फंसना अब संयोग नहीं, बल्कि रोजमर्रा की नियति बन चुका है। सुबह से शाम तक वाहन रेंगते हैं, एंबुलेंस और स्कूल बसें फंसी रहती हैं, और राहगीरों के चेहरों पर मजबूरी साफ झलकती है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। ड्रेनेज सिस्टम के अभाव में हल्की बारिश भी शहीद चौक को तालाब में बदल देती है। जलभराव के बीच जाम और बढ़ जाता है, पैदल चलना दूभर हो जाता है और दुर्घटनाओं का खतरा हर पल मंडराता रहता है। लोग सवाल करते हैं। क्या यही स्मार्ट शहर की पहचान है?
शहीद चौक से आगे भगवान चौक और गौशाला रेलवे गुमटी पर हालात और भी बदतर हैं। यहां घंटों रेलवे फाटक बंद रहना आम बात है। कटिहार-मालदा और कटिहार-बरौनी रेलखंड पर स्थित इस गुमटी से कई जोड़ी ट्रेनें गुजरती हैं। दिन में कम से कम चार बार फाटक बंद होता है, और हर बार दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। विडंबना यह है कि फाटक खुलने के बाद भी यातायात सामान्य होने में एक से दो घंटे तक लग जाते हैं। इस पूरे संकट में सबसे बड़ा योगदान है अव्यवस्थित टेंपो परिचालन और अतिक्रमण का। यात्री बैठाने की होड़ में टेंपो चालक बीच सड़क पर ही वाहन रोक देते हैं। न तो यातायात नियमों का डर है और न ही किसी कार्रवाई की चिंता। नतीजा-सड़कें सिकुड़ चुकी हैं, पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं बची और बड़े वाहन पूरी तरह जाम में फंस जाते हैं। जाम का असर अब केवल यातायात तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचा रहा है। भीषण गर्मी और घंटों की प्रतीक्षा में फंसे लोगों का धैर्य टूट जाता है। टेंपो चालकों और राहगीरों के बीच गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट अब आम दृश्य बन चुका है। कई बार स्थानीय लोगों को बीच-बचाव करना पड़ता है। भय और तनाव के कारण अनेक लोग इस मार्ग से गुजरने से बचने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता पर है। इतनी गंभीर और स्थायी समस्या के बावजूद न तो पुलिस की नियमित निगरानी दिखती है और न ही नगर निगम की ठोस पहल। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल तब जागता है, जब कोई बड़ी अप्रिय घटना हो जाती है। अन्यथा, शिकायतें फाइलों में दबी रह जाती हैं।
एंबुलेंस भी शहीद चौक पर जाम में फंस जाती है
शहीद चौक का जाम केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि कई बार ज़िंदगी और मौत के बीच की दूरी बन जाता है। इस मार्ग से होकर जिला अस्पताल, निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक जाने वाली एंबुलेंसें रोज़ जाम में फंसती हैं। सायरन बजता रहता है, पर आगे बढ़ने की कोई जगह नहीं होती। लोग चाहते हुए भी रास्ता नहीं दे पाते, क्योंकि सड़क खुद ही सिकुड़ चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग मरीज और गंभीर रूप से बीमार लोग जाम में तड़पते रहते हैं। हर मिनट भारी पड़ता है, लेकिन व्यवस्था की बेरुखी सब पर हावी रहती है। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान हालात और भयावह हो जाते हैं। फाटक खुलने के बाद भी अव्यवस्थित टेंपो और ऑटो के कारण एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ पाती।
जाम से परेशान होकर दुकान नहीं पहुंच रहे ग्राहक
शहीद चौक का जाम अब सिर्फ सड़क की समस्या नहीं रहा, बल्कि कटिहार के हजारों परिवारों की रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी हों या छोटे दुकानदार, हर कोई समय के साथ जूझ रहा है। सुबह निकलने का कोई तय वक्त नहीं बचा, क्योंकि जाम कब मिलेगा। यह अनुमान से बाहर है। कई कर्मचारी रोज़ दफ्तर देर से पहुंचते हैं, जिससे नौकरी पर खतरा मंडराने लगता है। व्यापारी बताते हैं कि ग्राहक जाम से परेशान होकर दुकान तक पहुंचना ही छोड़ देते हैं। शाम को घर लौटने में देरी से पारिवारिक तनाव बढ़ रहा है। बच्चे इंतजार करते हैं, बुजुर्ग चिंतित रहते हैं और घर का माहौल अनजाने गुस्से से भर जाता है। सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
शिकायत
1. शहीद चौक पर लगने वाले भीषण जाम पर प्रशासन की निगरानी नहीं है। कभी-कभार कार्रवाई कर समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
2. टेंपो चालक बीच सड़क पर वाहन खड़े कर यात्रियों को बैठाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है। बावजूद इसके कार्रवाई नहीं होती।
3. रेलवे फाटक तय समय से काफी पहले बंद कर दिया जाता है, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं।
4. बरसात के दिनों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से सड़कें तालाब बन जाती हैं। दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है व पैदल चलना भी मुश्किल।
5. लगातार जाम और अव्यवस्था के कारण आए दिन विवाद और मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। बावजूद कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं।
सुझाव
1. शहीद चौक व गौशाला रेलवे गुमटी पर स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए। इससे टेंपो चालकों की मनमानी पर रोक लगे व यातायात सुचारु हो ।
2. रेलवे फाटक बंद रहने की समय-सीमा तय की जाए व ट्रेन आने से बहुत पहले फाटक बंद करने की परंपरा खत्म हो। इससे लोगों को राहत मिलेगी।
3. शहीद चौक क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण कराया जाए ताकि बरसात में जलभराव की समस्या समाप्त हो। इससे सड़क की उपयोगिता बनी रहेगी।
4. टेंपो और ई-रिक्शा के लिए अलग से स्टैंड चिन्हित किया जाए और सड़क पर खड़ा करने पर सख्त जुर्माना लगाया जाए। सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
5. नगर निगम और यातायात पुलिस के बीच संयुक्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। अतिक्रमण और जाम पर स्थायी नियंत्रण संभव होगा।
हमारी भी सुनें
शहीद चौक की स्थिति अब रोज़मर्रा की परेशानी नहीं, बल्कि मानसिक तनाव बन चुकी है। दफ्तर जाने में समय का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। कई बार आधे घंटे का रास्ता दो घंटे में तय होता है। जाम के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है। — ट्विंकल कुमार
ग्राहक समय पर दुकान तक नहीं पहुंच पाते, जिससे बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है। बरसात में जलभराव स्थिति को और बदतर बना देता है। नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस अगर समन्वय से काम करें तो हालात सुधर सकते हैं। — अजय कुमार चौहान
मैं रोज़ इसी रास्ते से गुजरता हूं और हर दिन किसी न किसी से बहस होते देखता हूं। टेंपो चालकों की मनमानी और फाटक का लंबा इंतजार लोगों को चिड़चिड़ा बना देता है। जाम में फंसी एंबुलेंस देख मन दुखी हो जाता है।— यासिर
घंटों जाम में फंसकर बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। प्रशासनिक लापरवाही साफ नजर आती है। यदि समय रहते योजना बनाकर काम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और विस्फोटक हो सकती है।— अमरेंद्र कुमार शर्मा
पढ़ाई का समय सड़क पर बर्बाद हो रहा है। रेलवे फाटक बंद होने के बाद कोई व्यवस्था नहीं रहती। टेंपो और ई-रिक्शा वालों पर कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसा लगता है कि शहीद चौक को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।- विशाल कुमार
पानी भरे गड्ढों में वाहन फंस जाते हैं और दुर्घटना का डर बना रहता है। पैदल चलने वालों की हालत और खराब होती है। समस्या वर्षों से है, लेकिन आज तक ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधा नहीं दी जा सकी, जो प्रशासन की विफलता दर्शाती है।— रौशन कुमार
जाम में फंसकर लोगों का गुस्सा अक्सर गलत दिशा में निकलता है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और मारपीट आम हो गई है। इससे सामाजिक माहौल भी खराब हो रहा है। ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त हो , तो लोगों को राहत मिलेगी।- रंजीत कुमार
शहीद चौक की अव्यवस्था ने आम जीवन को मुश्किल बना दिया है। घर से निकलते समय डर रहता है कि कहीं देर न हो जाए। बरसात में पानी और जाम दोनों मिलकर परेशानी दोगुनी कर देते हैं।-बबिता कुमारी
कॉलेज पहुंचने में रोज़ देर हो जाती है और उपस्थिति पर असर पड़ता है। जाम से पढ़ाई से ज्यादा समय सड़क पर बीतता है। शहीद चौक की समस्या पर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - पूजा कुमारी
जाम में फंसी बसों और टेंपो में धक्का-मुक्की आम बात है। पैदल चलने की सुरक्षित जगह भी नहीं है। प्रशासन को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर व्यवस्था करनी चाहिए,कोई प्रयास नहीं दिखता।- अंजना देवी
फाटक बंद होने के बाद वाहनों की कतार संभालने वाला कोई नहीं रहता। लोग जैसे-तैसे आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है।पुलिस की मौजूदगी केवल नाम मात्र की है। - संदीप कुमार
शहीद चौक का जाम अब शहर की पहचान बनता जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। बाहर से आने वाले लोग कटिहार को अव्यवस्थित शहर के रूप में देखते हैं। इससे शहर की छवि खराब हो रही है। - संजय कुमार
टेंपो चालक बीच सड़क पर सवारी भरते हैं और कोई रोकने वाला नहीं होता। इससे हर दिन जाम लगता है। प्रशासन कागज़ी योजनाओं तक सीमित है, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।-मुकेश कुमार
काम से लौटते समय शहीद चौक पर जाम मिलना तय रहता है। थके हुए शरीर के साथ घंटों इंतजार मानसिक रूप से तोड़ देता है। कई बार लगता है कि प्रशासन को आम लोगों की परेशानी से सरोकार नहीं है।- मनीष कुमार
बोले जिम्मेदार
यातायात पुलिस और रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा और टेंपो व ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड चिन्हित किए जाएंगे।
-संतोष कुमार, नगर आयुक्त, कटिहार

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