
पीजी ब्वायज व रिसर्च हॉस्टल के 80 कमरों पर हुए कब्जे को विवि प्रशासन ने हटाया, चार कमरे का ताला टूटा
भागलपुर के टीएमबीयू में पीजी ब्वायज हॉस्टल और रिसर्च हॉस्टल से 80 कमरे खाली कराए गए। अवैध रूप से रह रहे छात्रों ने 76 कमरे छोड़ दिए, जबकि 4 कमरों पर ताले लगे थे, जिन्हें तोड़कर विवि प्रशासन ने अपने ताले लगा दिए। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में हुई तोड़फोड़ और हिंसा के बाद की गई।
भागलपुर, वरीय संवाददाता टीएमबीयू के हॉस्टलों पर हुए कब्जे को खाली करने का अल्टीमेटम मंगलवार की शाम को खत्म हो गया तो बुधवार को पुलिस एवं जिला प्रशासन के सहयोग से टीएमबीयू की टीम पीजी ब्वायज हॉस्टल व रिसर्च हॉस्टल कराने पहुंच गई। इस दौराान विवि पदाधिकारियों ने पीजी ब्वायज हॉस्टल व रिसर्च हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे छात्रों के कब्जे से 80 कमरे खाली कराए गये। इनमें से चार कमरों पर अवैध रूप से रहे छात्रों ने अपना ताला लगा रखा था, जिसे विवि प्रशासन ने तोड़कर उसमें अपना ताला लटका दिया। साथ ही अन्य 76 कमरे में अवैध रूप से रह रहे छात्रों ने टीम के पहुंचने से पहले ही हॉस्टल छोड़कर चले गये थे।
इन पर भी विवि प्रशासन ने अपना ताला लटका दिया। अब इन हॉस्टल के कमरों में पीजी के नए छात्र रहेंगे। पहले अवैध कब्जे की कुंडली बनी फिर चला कब्जा हटाने का अभियान पहले टीएमबीयू प्रशासन ने पीजी ब्वायज हॉस्टल व रिसर्च हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहे छात्रों के कब्जे वाले कमरों की कुंडली बनाई गई। रिपोर्ट में पाया गया कि 2019 में हॉस्टल खाली कराने का अभियान चलाने के बाद से अब तक 80 छात्रों द्वारा अवैध तरीके से हॉस्टल पर कब्जा किया जाना पाया गया। पीजी हॉस्टल के एक में 12, दो में 23, तीन में नौ, चार में 40 और रिसर्च हॉस्टल में पांच अवैध छात्र रह रहे थे। बुधवार को जब विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू प्रो. अर्चना साह, प्रॉक्टर प्रो. एसडी झा अपने अन्य सहयोगी अधिकारियों के साथ हॉस्टल खाली कराने पहुंचे तो पाया कि 90 प्रतिशत अवैध छात्रों ने तो एक दिन पहले ही हॉस्टल खाली कर दिया है। चार कमरों पर लगाये गये ताले को विश्वविद्यालय प्रशासन तुड़वा दिया तो वहीं अन्य कमरे पूरी तरह से खाली थे। दरअसल अवैध कब्जे को हटाने की बात तब सोची गई, जब कुछ माह पहले विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में तोड़फोड् व छात्र संगठन के दो गुट के बीच खूनी मारपीट की घटना घटित हुई थी। इसके बाद हॉस्टल में हुए अवैध कब्जे को खाली कराने का निर्णय लिया गया, जिसको लेकर राजभवन व बिहार के गृह मंत्री तक इस मामले को पहुंचाया गया। उसके बाद जिला एवं पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ और विश्वविद्यालय प्रशासन व पुलिस टीम के साथ हॉस्टल खाली कराया गया।

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