बोले भागलपुर: भूमिहीन परिवारों को आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराए सरकार
भागलपुर में हजारों परिवारों के पास आवास के लिए जमीन नहीं है। कई महिलाएं कचहरी परिसर में इकट्ठा होकर सरकार से आवास के लिए जमीन की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि बिना जमीन के घर बनाना मुश्किल है और सरकार को पहले जमीन उपलब्ध करानी चाहिए।
जिले में अभी भी हजारों परिवार के पास आवास के लिए जमीन नहीं है। कोई सरकारी तो कोई दूसरे की जमीन पर आवास बनाकर समय बीता रहे हैं। लोगों को सरकारी जमीन से हटने के बाद रहने की चिंता सता रही है। किसी का गंगा के कटाव में घर विलीन हो गया है तो किसी परिवार में सदस्यों की संख्या बढ़ गयी है। लेकिन रहने के लिए जगह नहीं है। गृहविहीन लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन से हटाने के पहले सरकार मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराए।
रविवार को कचहरी परिसर में सैकड़ों महिलाएं जमा थीं। सबकी एक ही समस्या। आवास के लिए जमीन चाहिए। भागलपुर पहुंची महिलाएं विभिन्न प्रखंडों से आयी थीं। महिलाओं को यह भी जानकारी नहीं कि किसने बुलाया है। जमीन के लिए फार्म भरने की सूचना पर कचहरी परिसर में जमा हुई थीं। पता चला कि एक राजनीतिक दल के नेता ने कुछ महिलाओं को फार्म पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया था। महिलाओं का कहना था कि जमीन नहीं रहने से मकान बनाने में परेशानी हो रही है। सरकार को भूमिहीनों को मकान बनाने के लिए जमीन की व्यवस्था करनी चाहिए। कई ऐसी महिलाएं थीं जिनका मकान गंगा के कटाव में विलीन हो चुका है। लेकिन अभी तक आवास के लिए जमीन नहीं है। कुछ महिलाएं सरकारी जमीन पर आवास बनाकर रह रही हैं। अब प्रशासन जमीन खाली करने को कहा रहा है। कुछ की जमीन की पर्ची मिली है। लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं है। कहीं गड्ढे में जमीन मिलने से मकान बनाने में परेशानी हो रही है। महिलाओं का कहना है कि भूमिहीनों की पहचान कर आवास बनाने के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराए।
कहलगांव रानी दियारा की रबिया देवी ने बताया कि उसके दो बच्चे दिव्यांग हैं। जमीन गंगा में कट चुकी है। उनके अलावा गांव के कई लोगों की जमीन गंगा से कट चुकी है। लोगों को रहने के लिए जगह नहीं है। रेलवे की जमीन पर झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रह रही है। दूसरी कोई जमीन नहीं है। सरकार अब जमीन खाली करने को कह रही है। परिवार के साथ कहां जाएं। सरकार को पहले रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराना चाहिए। सरकारी जमीन पर रहने से सुविधाएं भी नहीं मिलती है। पता चला कि भागलपुर में भूमिहीनों को जमीन देने के लिए फार्म भरा जा रहा है,तो वह चली आई है। लेकिन यहां फार्म भी नहीं भरा जा रहा है। इसी गांव की प्रतिमा देवी,पूजा देवी,मीरा देवी और नीरा देवी ने बताया कि घर के लिए जमीन की व्यवस्था करनी चाहिए। कहलगांव के चांदनी चौक नंदलालपुर की लखिया देवी ने बताया कि रहने के लिए एक छोटा सा कमरा है। उसमें पूरा परिवार नहीं रह पाता है। दूसरी जगह जमीन नहीं है। परिवार को आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। सरकार भूमिहीनों को रहने के लिए जगह उपलब्ध कराए। कहलगांव के रामनगर की मीरा देवी ने बताया कि नहर की सरकारी जमीन पर झोपड़ी बनाकर बच्चों के साथ रहते हैं। सड़क बनने वाला है। प्रशासन सरकारी जमीन से हटने को कह रहा है। पति नहीं है। तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। प्रशासन को रहने के लिए जमीन की व्यवस्था करनी चाहिए। सदानंदपुर वैसा की डोली देवी, सुनीता देवी, पूजा देवी और सुमो देवी ने बताया कि दूसरे की जमीन पर मकान बनाकर रहते हैं। जमीन मालिक अब खाली करने को कह रहा है। दूसरी जगह रहने की सुविधा नहीं है। प्रशासन कम से कम मकान के लिए जमीन की व्यवस्था करे। मिल्की जगरनाथपुर की देवकी देवी ने बताया कि चुनाव के समय नेताओं ने आवास के लिए जमीन दिलवाने का वादा किया। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई आगे नहीं आ रहा है। गरीब को देखने वाला कोई नहीं है। पहाड़ की जमीन पर मकान बनाकर रहते हैं। अब जमीन खाली करने को कहा जा रहा है। दूसरी जगह कोई व्यवस्था नहीं है। इसी गांव की सरिता देवी और रिंकी देवी ने बताया कि आवास बनाने के लिए केवल आश्वासन दिया जा रहा है। कार्यालयों का चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी हूं। लेकिन अभी तक जमीन की व्यवस्था नहीं हो सकी है। समझ में नहीं आता है कि कहां जाकर रहूं। प्रशासन को सर्वे कराकर भूमिहीनों को रहने के लिए बेहतर जमीन की व्यवस्था करनी चाहिए। पन्नुचक मुसहरी की बुधनी देवी ने बताया कि रहने की जगह नहीं है। फूस का घर है। मीरा देवी और मंतो देवी ने बताया कि दूसरे की जमीन पर किसी तरह झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। सड़क बनाने के नाम पर जमीन खाली करने को कहा जा रहा है। सरकार को गरीब परिवारों की मदद करनी चाहिए। सरकारी जमीन से हटाने के पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। कहलगांव अम्मापुर की चंदा देवी ने बताया कि नदी किनारे एक छोटा सा घर है। अक्सर घर में पानी घुस जाता है। परिवार के साथ रहने में परेशानी होती है। प्रशासन से दूसरी जगह बसने के लिए जमीन की लगातार मांग कर रही हूं। लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल पाया है।
बोले जिम्मेदार
जिले में बासविहीन भूमिहीन परिवारों का प्रशासन द्वारा सर्वे कराया गया है। सर्वे के बाद आगे की प्रक्रिया चल रही है। नियमों के अनुसार योग्य लाभुकों को जमीन दी जाएगी। कोई भी व्यक्ति दलालों के चक्कर में नहीं फंसे। जिला प्रशासन अपने स्तर से काम कर रहा है। किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की जानकारी कोई भी व्यक्ति प्रशासन से ले सकता है।
-डॉ. नवल किशोर चौधरी, जिलाधिकारी, भागलपुर
इनकी भी सुनिए
पिछले कई वर्षों से सरकारी जमीन पर रह रही हूं, लेकिन अब तक आवास को लेकर कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अस्थायी जीवन के कारण परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-उर्मिला देवी
सरकार भूमिहीनों को कहीं भी बसाती है तो वहां मूलभूत सुविधाएं अवश्य उपलब्ध कराई जाएं। अभी जहां रह रही हूं, वहां पेयजल की काफी समस्या है, जिससे रोजमर्रा के घरेलू कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
-ममता देवी
सरकारी जमीन पर अपनी झोपड़ी बना कर रह रही हूं । इलाके में पानी की कोई समुचित सुविधा नहीं है, दूर-दराज जाना पड़ता है, या फिर जिनके घरों में साधन उपलब्ध हैं, उनसे मांगकर किसी तरह काम चलाना पड़ता है।
-रीना देवी
सरकार स्थायी जमीन उपलब्ध कराए या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास का निर्माण करा कर दे, ताकि परिवार को सुरक्षित आश्रय मिल सके। जहां भी बसाया जाए, वहां बुनियादी सुविधाओं का लाभ गरीब परिवारों को जरूर मिले।
-किरण देवी
रानी दियारा क्षेत्र में पिछले 35 वर्षों से बसे हुए हैं, लेकिन आज तक यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि वह जमीन हमारी है। कानूनी स्पष्टता के अभाव में आए दिन अतिक्रमण हटाए जाने का भय बना रहता है। सरकार को जमीन का कागजात देना चाहिए।
-ममता देवी
सरकार की सभी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। राशन कार्ड से अनाज मिल रहा है। लेकिन अपनी जमीन नहीं होने के कारण अब भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं। कच्चे घर में रहने से बारिश के दिनों में परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
-मीरा देवी
सरकार को भूमिहीन परिवारों को किसी उचित स्थान पर रहने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि सुरक्षित रूप से जीवन यापन कर सकें। जहां भी बसाया जाए, वहां सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। राशन कार्ड, पानी और शौचालय की सुविधा हो।
-लखिया देवी
भूमिहीन होने के कारण अपने घर में शौचालय का निर्माण भी नहीं करा पा रहे हैं। मजबूरी में आज भी घर की बहू-बेटियों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे परेशानी और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
-जयमति देवी
कच्चा मकान होने के कारण बरसात के दिनों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऊपर से अतिक्रमण हटाने का भय भी सताते रहता है। सरकार व्यवस्थित तरीके से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बसाए, ताकि स्थायी आवास मिल सके।
-खुशबू कुमारी
भूमिहीन परिवारों को बार-बार कहा जाता है कि जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन अभी तक सभी भूमिहीन परिवारों को बसने के लिए जमीन नहीं मिल सका है। लोग कार्यालयों का चक्कर लगाते रहते हैं। केवल आश्वासन ही मिलते रहे हैं।
-पूजा देवी
सरकारी जमीन पर वर्षों से रह रही हूं। लेकिन पूर्ण अधिकार जमीन पर नहीं होने के कारण पक्का मकान नहीं बना पा रहा है। इसी वजह से परिवार आज भी असुरक्षित जीवन यापन कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए।
-फागुनी देवी
भूमिहीन परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते आवास के लिए जमीन भी नहीं खरीद पाते हैं। सरकार को भूमिहीनों का सर्वे कराकर आवास के लिए जमीन उपलब्ध करानी चाहिए। जमीन मिलने पर सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने लगेगा।
-जयमंती देवी
भूमिहीन परिवारों को किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए तथा वहां मूलभूत सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से पानी, बिजली और राशन की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानी हो रही है।
-खुशबू कुमारी
अपनी जमीन नहीं होने के कारण बुनियादी सुविधाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। बरसात के दिनों में रास्तों पर कीचड़ भर जाता है, जिससे आने-जाने में भारी परेशानी होती है। चुनाव से पहले आश्वासन मिलता है।
-सुनीता देवी
झुग्गी-झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं, हम भूमिहीन परिवारों को पानी सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। जमीन के लिए कई बार आवेदन दे चुकी हूं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
-पार्वती देवी
कई गरीब परिवार करीब 50 वर्षों से सदानंदपुर गांव में रह रहे हैं। अपनी जमीन नहीं मिलने से आज भी लोग मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं। कच्चे मकानों के कारण बरसात के दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
-ममता देवी
समस्याएं
1. भूमिहीन परिवारों को पानी की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, खासकर गर्मियों में नल जल योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता है।
2. अपनी जमीन न होने के कारण पक्का मकान भी नहीं बना पाते हैं। कच्चे मकानों में रहना पड़ता है। कई तरह की परेशानियां होती हैं।
3. भूमिहीन परिवारों तक सड़क की सुविधा नहीं है, जिसके चलते बारिश के दिनों में कीचड़ भरे हुए रास्तों से गुजरना पड़ता है।
4. कई भूमिहीन परिवारों को अपनी जमीन नहीं रहने के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। वर्तमान में कई परिवारों के पास सुविधाओं का अभाव है।
5. जमीन नहीं रहने से भूमिहीन परिवारों के घरों में शौचालय नहीं बन पाया है। खुले में शौच करने की मजबूरी है क्योंकि सरकारी जमीन होने के कारण शौचालय का निर्माण नहीं करा सकते।
सुझाव
1. जिले के सभी भूमिहीन परिवारों का सर्वे कराकर आवास के लिए मानक के अनुसार सरकार आवास के लिए जमीन उपलब्ध कराए।
2. जब तक सभी भूमिहीन परिवारों को आवास नहीं मिल जाता है। तब तक वैसे परिवारों के लिए जलापूर्ति आदि की व्यवस्था की जाए।
2. पक्का मकान निर्माण के लिए सरकारी योजनाओं में भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पीएम आवास योजना का लाभ मिले।
3. भूमिहीन परिवारों तक पहुंचने वाली कच्ची सड़कों को पक्की सड़क में बदला जाए।
4. राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाए कर परिवारों को लाभ दिया जाए।
5. सरकारी या अन्य जगहों पर बसे भूमिहीन परिवारों के लिए सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाए। ताकि लोग खुले में शौच करने नहीं जाएं।
प्रस्तुति: वीरेन्द्र कुमार, संतोष, फोटोग्राफ: संजीव

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