
पीटने से पापा के प्रति बदल रही किशोरों की सोच
रेलवे के चलाए गए अभियान नन्हें फरिश्ते में हुआ इसका खुलासा पकड़े गए 98 फीसदी
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। पीटने से पापा के प्रति किशोरों की सोच बदल रही है। उनमें नाकारात्मक भाव पैदा हो रहे हैं। आरपीएफ की टीम की तरफ से नाबालिग बच्चों को लेकर चलाए रहे अभियान नन्हें फरिश्ते में इस तरह का खुलासा हुआ है। अभियान के दौरान कई और चौंकाने वाले केस भी सामने आए हैं। भागलपुर सहित पूरे मालदा मंडल में स्टेशन पर पकड़े गए नाबालिगों में से 98 फीसदी ने यह बात कबूल की है कि माता-पिता के पीटने के बाद ही घर छोड़कर भाग गए। दरअसल, जब माता-पिता गलती पर बच्चों को पीटते हैं तो वे समझते कम हैं और डरते ज्यादा हैं।

सार्वजनिक तौर पर पीटने और अपमानित करने से किशोरों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है। इससे वे बागी हो जाते हैं और घर का तनावपूर्ण माहौल छोड़कर भागने का निर्णय लेते हैं। 2024-25 में 14 मानव तस्कर हुए गिरफ्तार आरपीएफ प्रत्येक वर्ष भटके बच्चे को रिकवर कर चाइल्ड लाइन के मार्फत माता-पिता को सुपुर्द करती है। वर्ष 2023-24 के दौरान मालदा मंडल की आरपीएफ ने कुल 165 बच्चों (111 लड़के और 54 लड़कियां) को बचाया। इसी तरफ वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 247 (163 लड़के और 84 लड़कियां) तक पहुंच गई। इनमें से अधिकांश बच्चे या तो परिवार से बिछड़ गए थे या असुरक्षित परिस्थितियों में पाए गए। 2024-25 में 14 मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया। कोट आरपीएफ प्रतिदिन सभी रेलवे स्टेशनों पर नाबालिग बच्चों की रिकवरी के लिए नन्हें फरिश्ते अभियान चलाती है। 98 फीसदी रिकवर किए गए बच्चों ने बताया कि घर में हुई मारपीट के बाद भागने की बात कबूल रहे हैं। ऐसे बच्चों को रिकवर करने के बाद चाइल्ड लाइन के माध्यम से अभिभावक तक भेजा जा रहा है। - असीम कुमार कुल्लू, डीएससी, आरपीएफ, मालदा ।

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