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अररिया: विशिष्ट शिक्षकों के साथ सरकार व शिक्षा विभाग कर रही है मजाक

अररिया: विशिष्ट शिक्षकों के साथ सरकार व शिक्षा विभाग कर रही है मजाक

संक्षेप:

बिहार में विशिष्ट शिक्षकों का वेतन पिछले आठ महीनों से 15,000 रुपये कम किया गया है, जबकि उन्हें पे प्रोटेक्शन मिलना चाहिए था। शिक्षक संघ ने सरकार पर मजाक करने का आरोप लगाया है। शिक्षकों की आर्थिक...

Aug 10, 2025 05:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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अररिया, वरीय संवाददाता सरकार व शिक्षा विभाग विशिष्ट शिक्षकों के साथ मजाक कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां सभी का मानदेय बढ़ा रहे हैं वहीं इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसी परीक्षा देकर राज्यकर्मी बनने के बाद सरकार के निर्देश के विपरीत शिक्षा विभाग ने शिक्षकों का वेतन बढ़ाने की बजाय 15 हजार रुपये तक कम कर दिया हो इसे आश्चर्य नहीं कहें तो और क्या कहें। यह आरोप बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सह प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष प्रशांत कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लगाया है। प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ने कहा कि बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली (सरकारी गजट) के कंडिका 8 के आलोक में सक्षमता परीक्षा देने वाले शिक्षक को राज्यकर्मी बनने के साथ पूर्ण वेतन संरक्षण (पे प्रोटेक्शन) के तहत वेतन भुगतान होना था।

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दुर्भाग्य की बात है कि विशिष्ट शिक्षक बने आठ माह हो गए हैं मगर आज तक उन्हें पे प्रोटेक्शन नहीं दिया गया उलटे पिछले 8 माह से 15 हजार रुपये तक प्रतिमाह कम वेतन दिया जा रहा है। यही शिक्षक जब तक नियोजित शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे तब 50 हजार वेतन मिलता था अब जब सक्षमता परीक्षा देकर राज्यकर्मी बने हैं तो वेतन 35000 (पैतिस हजार) रुपये दिया जा रहा है इसे विशिष्ट शिक्षकों के साथ भद्दा मजाक नहीं कहे तो और क्या कहें। प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ने कहा कि लगातार आठ माह से 15 हजार रुपये कम वेतन मिलने से लाखों विशिष्ट शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट की समस्या उत्पन्न हो गयी है ठीक से घर-परिवार नहीं चला पा रहे हैं ना ही बूढ़े मां-बाप का समय से दवा उपलब्ध करा पा रहे हैं। मानसिक रूप से परेशान लाखों विशिष्ट शिक्षक किस परेशानी से विद्यालय में पठन-पाठन कर रहे हैं यह उन्हीं को पता है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं जैसे लगता है उन्हें कुछ पता ही नहीं है। इसे असंवेदनशीलता नहीं कहें तो और क्या कहें। उन्होंने आगे कहा कि एचआरएमएस पोर्टल पर एचआरए एवं डीए में भी विसंगति है जिस कारण शिक्षकों को जो दर से एचआरए एवं डीए मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। यह परेशानी विद्यालय अध्यापक के साथ भी है क्योंकि जो एचआरएमएस पोर्टल पर विद्यालय अध्यापक का पेमेंट होता है उसी एचआरएमएस पोर्टल पर विशिष्ट शिक्षकों का भी वेतन भुगतान हो रहा है। एचआरएमएस पोर्टल अपडेट नहीं रहने के कारण छह लाख शिक्षकों को एचआरए एवं डीए के भुगतान में विसंगति तो है ही बेसिक वेतन में भी समस्या है। एचआरएमएस पोर्टल को जल्द अपडेट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्द शिक्षकों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो शिक्षकों की नाराजगी बढ़ सकती है। इसलिए विभाग को चाहिए कि तुरंत विशिष्ट शिक्षकों का वेतन संरक्षण के तहत वेतन भुगतान किया जाए। अन्यथा लाखों शिक्षक आन्दोलन की राह पकड़ सकते हैं जो शिक्षा व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं होगा। प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से सेवा निरंतरता, प्रोन्नति, वेतन संरक्षण ाहित शिक्षकों की सभी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है। इधर डीईओ संजय कुमार ने कहा कि सरकार व विभाग शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं। उम्मीद है शीघ्र ही समस्याओं का समाधान हो जाएगा।