
जून तक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए हो जाएगा टेंडर
नागरिक विमानन निदेशालय के संपर्क में अधिकारी प्रमंडलीय आयुक्त ने तमाम रिपोर्ट जल्द सबमिट करने
भागलपुर, प्रधान संवाददाता। जिले के सुल्तानगंज में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए चार माह बाद टेंडर हो जाने की संभावना है। नागरिक विमानन (सिविल एविएशन) निदेशालय और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं और इसकी प्रक्रिया और प्रगति को लेकर पहल तेज हो गई है। हाल में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने प्रस्तावित एयरपोर्ट की जगह का हवाई सर्वेक्षण किया था और सुल्तानगंज में इसकी समीक्षा भी की थी। अभी प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर से लगातार इसकी प्रगति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण पीपीपी मोड पर होगा। पूरी संभावना है कि अगले चार माह में इसके लिए टेंडर निकाल दिया जाएगा।
सूत्रों की मानें तो यह लक्ष्य रखा गया है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को चालू कर दिया जाएगा। अभी ओएलएस (ऑब्सटेकल लिमिटेशन सरफेस) सर्वे कराया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त की समीक्षा बैठक में तमाम रिपोर्ट को जल्द से जल्द सबमिट करने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त बोले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए तमाम प्रक्रियाएं तेजी से हो रही हैं। इसकी नियमित समीक्षा हो रही है और चार माह में टेंडर भी हो जाने की संभावना है। सभी रैयतों को उचित मुआवजा मिलेगा, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। अवनीश कुमार सिंह, प्रमंडलीय आयुक्त भागलपुर। जानिये प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और इसकी प्रक्रिया को 931 एकड़ जमीन की है जरूरत सरकार पहले ही सुल्तानगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 931 एकड़ जमीन अधिग्रहण को मंजूरी दे चुकी है। इसके लिए 472 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकांश जमीन मसदी और नोनसर मौजा में ही है। ओएलएस सर्वे क्यों जरूरी है अगर कहीं नया हवाई अड्डा बनता है तो यह सर्वे हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में बाधाओं (जैसे पेड़, इमारतें, पहाड़) की ऊंचाई और आकार को मापने और निर्धारित करने की प्रक्रिया है। ताकि विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ सुनिश्चित हो सके। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नाम क्यों? यह एक नया हवाई अड्डा होता है जो किसी नई, अविकसित जगह पर बनाया जाता है, जिसमें नए रनवे, टर्मिनल और अन्य सुविधाएं होती हैं। मकसद मौजूदा हवाई अड्डों पर दबाव कम करना होता है। देश में अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई जगहों पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बने हैं। पीपीपी मोड पर बनता है तो क्या होगा अगर यह एयरपोर्ट पीपीपी मोड पर बनता है तो इसके निर्माण का काम किसी कंपनी को दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह होगा कि वहां संचालित सभी सुविधाओं का ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस उसी कंपनी के द्वारा होगा और सरकार के मानदंडों के अनुसार शुल्क भी वही कंपनी लेगी। ये होंगे बड़े फायदे अजगैवीनाथधाम आने वाले भक्तों की सहूलियत बढ़ जाएगी सुल्तानगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के चालू हो जाने के बाद श्रावणी मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सहूलियत हो जाएगी। दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु सीधे फ्लाइट से सुल्तानगंज आ सकेंगे। ऐसे में कांवर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं का समय बचेगा। भागलपुर सहित कई जिलों को मिलेगी एयर कनेक्टिविटी प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सुल्तानगंज के मसदी-नोनसर इलाके में बन रहा है। यहां एयरपोर्ट बनने से भागलपुर, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, बांका, लखीसराय आदि जिलों को एयर कनेक्टिविटी मिल जाएगी। यह एयरपोर्ट इन जिलों से मोटे तौर पर फोर लेन सड़क से जुड़ जाएगा।

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