
बोले कटिहार : स्ट्रॉबेरी ने दी मुस्कान, बाजार ने बढ़ाई जिले के किसानों की चिंता
संक्षेप: कटिहार के किसानों ने लाल स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है, जिससे उन्हें नई उम्मीदें हैं। लेकिन उचित दाम न मिलने और बिचौलियों के कारण उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है। किसान सरकार से मदद और स्थायी…
बोले कटिहार : स्ट्रॉबेरी ने दी मुस्कान, बाजार ने बढ़ाई जिले के किसानों की चिंता

-प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज
कटिहार के खेतों में इस बार लाल-लाल स्ट्रॉबेरी की फसल ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। पारंपरिक खेती से हटकर इस फल की खेती करने वाले किसानों को बेहतर आमदनी और पहचान की आस है। खेतों में महकती स्ट्रॉबेरी देखकर चेहरे खिले हैं, लेकिन बाजार की अनिश्चितता और बिचौलियों की दखल ने खुशी में चिंता घोल दी है। किसानों का कहना है कि मेहनत तो उन्होंने पूरी की, पर उचित दाम न मिलने से सपना अधूरा सा लगने लगा है। सरकारी मदद और ठोस विपणन व्यवस्था की कमी ने फसल की कीमत तय करना मुश्किल कर दिया है। गांवों में नई खेती का यह प्रयोग कई युवाओं को जोड़ रहा है, पर असली चुनौती उत्पादन से ज्यादा, उसका सही बाजार ढूंढ़ने की है।
कटिहार के खेतों में लाल-सुनहरी स्ट्रॉबेरी की फसल अब केवल एक फल नहीं, बल्कि किसानों की नई उम्मीद और साहस का प्रतीक बन चुकी है। सदर प्रखंड, आजमनगर और कोढ़ा प्रखंड में करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू हुई है। करीब दो सौ किसानों ने धैर्य और हिम्मत जुटाकर इस नई फसल को अपनाया, यह सोचकर कि परंपरागत धान, मक्का और सब्ज़ियों की खेती से हटकर कुछ नया कर सकते हैं।
किसानों की मेहनत और सपनों की झलक अब खेतों में चमकते लाल फल के रूप में दिखाई देती है। छोटे-छोटे पौधों से बड़े होकर लाल रंग की स्ट्रॉबेरी ने जैसे किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी हो। लेकिन इस खुशी के बीच, किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी बाजार और विपणन की खाई। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की फसल को उचित मूल्य नहीं मिलता। बिचौलियों के कारण किसान वाजिब दाम से वंचित रहते हैं। खेतों में खिले स्ट्रॉबेरी के फल जब मंडी में बिचौलियों के हाथों से गुजरते हैं तो उनकी कीमत आधी हो जाती है। किसान मेहनत करते हैं, पर मुनाफा बिचौलियों के हाथ चला जाता है। यह सिर्फफ़ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि उनके सपनों का टूटना है। फिर भी किसानों की आशा कम नहीं हुई। स्ट्रॉबेरी सिर्फ स्वाद में ही मीठी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी वरदान है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ‘सी’, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय रोग कम करने और बच्चों के विकास में मदद करते हैं। यही कारण है कि किसान कहते हैं कि सही मूल्य मिले तो यह फसल हमारी ज़िंदगी बदल सकती है। कटिहार के किसान न केवल खेती में बदलाव चाहते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का सपना भी देखते हैं। नई फसल के साथ वे चाहते हैं कि उनकी मेहनत को न्याय मिले।
स्वास्थ्य का खजाना, पर किसानों की जेब खाली
स्ट्रॉबेरी को सेहत का खजाना कहा जाता है। इसमें विटामिन ‘सी’, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। कटिहार के किसानों ने यही सोचकर इस फसल को अपनाया कि जब सेहत के लिए इतनी उपयोगी है, तो इसकी मांग भी खूब होगी। लेकिन हकीकत उलटी निकली। खेतों में मेहनत से उगाई गई फसल किसानों के लिए सिरदर्द बन गई। बिचौलियों ने बाजार पर कब्जा कर लिया और किसानों को उनकी लागत भी मुश्किल से निकल पा रही है। किसानों की जेब खाली है, जबकि स्ट्रॉबेरी बाजार में महंगे दामों पर बिक रही है। यह विडंबना कटिहार के किसानों की पीड़ा को उजागर करती है। किसानों का कहना है कि अगर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का रास्ता बने, तो उनकी हालत बदल सकती है।
बिचौलियों पर लगाया जाए अंकुश
कोढ़ा प्रखंड के एक छोटे किसान के खेत में स्ट्रॉबेरी की लाल-लाल फसल देखकर गांव के बच्चे खिलखिलाते हैं। वे दौड़कर फल तोड़ते हैं और उसका स्वाद लेते हुए कहते हैं कि वाह, कितना मीठा है! लेकिन वहीं खड़े किसान पिता की आंखों में चिंता झलकती है। वह सोचते हैं कि बच्चों की खुशी तो है, लेकिन मेहनत की असली कीमत मिलेगी भी या नहीं? स्ट्रॉबेरी ने गांव में नया आकर्षण जरूर पैदा किया है। हर कोई खेत देखने आता है, तस्वीरें खींचता है, लेकिन जब बेचने की बारी आती है, तो किसानों के सामने समस्याओं की लंबी कतार खड़ी हो जाती है। बिचौलियों के कारण उन्हें लागत का भी पूरा मूल्य नहीं मिल पाता। यह दृश्य भावुक कर देता है। एक ओर खेत में बच्चों की हंसी और लाल फसल का सौंदर्य तो दूसरी ओर पिता की टूटी उम्मीदें। अगर इस फसल का सही विपणन हो, तो यही स्ट्रॉबेरी किसानों के बच्चों की पढ़ाई, भविष्य और परिवार की खुशियों का आधार बन सकती है।
भंडारण की कमी से बढ़ी परेशानी
सदर प्रखंड में किसानों ने अपनी मिट्टी में पहली बार स्ट्रॉबेरी की लालिमा देखी। किसानों का कहना है कि हमने सपना देखा था कि यह फसल हमें नई पहचान देगी। सच भी है, कटिहार जैसे जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती ने लोगों का ध्यान खींचा है। लेकिन स्ट्रॉबेरी एक नाजुक फल है। अगर समय पर ठंडी भंडारण और परिवहन सुविधा न हो, तो कुछ ही घंटों में इसकी ताजगी खो जाती है। यही वजह है कि कई किसानों को मजबूरी में कम दाम पर इसे बेच देना पड़ता है। स्थानीय किसान बताते हैं कि उन्होंने मेहनत और साहस से नई फसल बोई, पर जब भंडारण और बाजार व्यवस्था नहीं मिली तो उनकी मेहनत पानी हो गई। सरकार और प्रशासन यदि छोटे-छोटे कोल्ड स्टोरेज केंद्र उपलब्ध कराए तो न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि कटिहार स्ट्रॉबेरी के लिए पहचान भी बना सकेगा।
हमारी भी सुनें
स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए एक नई क्रांति साबित होगा। जब बिचौलियों पर नियंत्रण होगा, तब किसान को सही लाभ मिलेगा।
- लक्ष्मण सिंह
विपणन व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हम लोग अपनी उपज का उचित दाम नहीं पा रहे। एग्री-बिजनेस की संभावना है, बस समर्थन और ठोस योजना चाहिए।
- प्रदीप कुमार
समस्या केवल बाजार की है। अगर यहां प्रसंस्करण इकाई और ठंडा भंडारण हो जाए तो स्ट्रॉबेरी जूस, जैम और आइसक्रीम के जरिए आय दोगुनी होगी।
-अमीरचंद
हमारे गांवों में स्ट्रॉबेरी का लाल रंग उम्मीद जगाता है। लेकिन यह उम्मीद अधूरी रह जाती है जब किसानों को कीमत आधी मिलती है।
- त्रिभुवन सिंह
सरकार अगर किसानों से सीधे खरीद कर खुद खुदरा बाजार तक पहुंचाए तो किसान और उपभोक्ता दोनों को फायदा होगा।
- राजेंद्र मंडल
खेती हमेशा से जोखिम भरा काम रहा है। धान और मक्का से निकलकर किसान अब स्ट्रॉबेरी जैसी फसल ले रहे हैं, यह साहसिक कदम है।
- करताल
उचित दाम तभी मिलेगा जब सरकारी खरीद केंद्र बनेंगे और मंडी से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। यही समय है किसानों को न्याय दिलाने का।
- दिनेश सिंह
स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब हो जाती है। अगर किसान के गांव तक कोल्ड चेन सुविधा पहुंच जाए तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि रोजगार भी मिलेगा।
- परमानंद
किसानों ने जो हिम्मत दिखाई है, वह काबिल-ए-तारीफ है। लेकिन यह दुख की बात है कि बिचौलिये हमारी मेहनत का शोषण कर रहे हैं।
- रणजीत सिंह
स्ट्रॉबेरी खेती किसानों को गरीबी से निकाल सकती है, लेकिन अभी हालत यह है कि किसान अपनी लागत भी निकालने में जूझ रहा है।
- दीनदयाल सिंह
किसानों की जिंदगी आसान नहीं है। स्ट्रॉबेरी से उन्होंने नया सपना देखा है, लेकिन बिना सरकारी सहारे यह सपना पूरा नहीं होगा।
- रामजन्म सिंह
महिलाएं भी अब खेती में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। लेकिन जब सही दाम नहीं मिलता तो सबसे ज्यादा निराश महिलाएं होती हैं।
- तरुणा सिंहा
किसानों की फसल नहीं, बल्कि समाज का सपना है। लेकिन जब किसान बाजार में ठगा जाता है तो यह सपना धुंधला हो जाता है। सरकार ई-मार्केटिंग पोर्टल शुरू करे।
- प्रिंस सिंह
स्ट्रॉबेरी की खेती हमारे जिले में बदलाव का संकेत है। लेकिन यह बदलाव तब ही टिकेगा, जब किसान को उचित मूल्य और तकनीकी सहायता मिले।
- मदन सिंह
आज स्ट्रॉबेरी कटिहार की शान बन सकती है। यह फसल धान या गेहूं से अलग है और इसमें ज्यादा मुनाफे की संभावना है। लेकिन बिचौलियों ने किसानों का रास्ता रोक रखा है।
- वीरेंद्र साह
अगर इसे सही तरीके से बाजार तक पहुंचाया जाए तो कटिहार देशभर में पहचाना जाएगा। अभी स्थिति यह है कि किसान अपनी मेहनत का आधा फल ही पा रहा है।
- देवनंदन भगत
बोले जिम्मेदार
बाजार व्यवस्था और कोल्ड स्टोरेज की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। अगर स्थानीय स्तर पर संगठित विपणन, प्रसंस्करण इकाई और परिवहन सुविधा उपलब्ध हो जाए तो यह खेती किसानों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
- पंकज कुमार, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार
शिकायत
1. सही दाम मंडी में नहीं मिलता, ज्यादातर मुनाफा बिचौलियों के पास चला जाता है। इसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
2. कटिहार में स्ट्रॉबेरी बेचने के लिए कोई विशेष मंडी या केंद्र नहीं है।
3. प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
4. स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब हो जाती है, पर जिले में कोल्ड स्टोरेज नहीं है।
5. बड़े शहरों तक फसल पहुंचने के लिए सस्ती और तेज परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है।
सुझाव
1. संगठित मंडी व्यवस्था बने, ताकि किसान सीधे अपनी उपज बेच सकें और बिचौलियों से बचें।
2. स्ट्रॉबेरी नाजुक फल है, ताजगी बनाए रखने के लिए ठंडी भंडारण व्यवस्था जरूरी है।
3. जूस, जैम, आइसक्रीम बनाने वाली छोटी फैक्ट्रियां किसानों की आमदनी बढ़ा सकती हैं।
4. सरकारी खरीद व न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था हो। ताकि निश्चित दाम मिल सके।
5. किसानों को आधुनिक तकनीक व मार्केटिंग की जानकारी दी जाए।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




