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सहरसा: सत्संग से जन्म-मरण के बंधन से मिलती मुक्ति

सहरसा: सत्संग से जन्म-मरण के बंधन से मिलती मुक्ति

संक्षेप:

पतरघट में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के समापन पर स्वामी निर्मल बाबा ने कहा कि सत्संग से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि परमात्मा की प्राप्ति भीतर होती है, और सत्संग व्यक्ति को मौत के भय से बचाता है। कार्यक्रम में भजनों का आनंद लिया गया और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या शामिल हुई।

Nov 30, 2025 06:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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पतरघट, एक संवाददाता। सत्संग भजन करने वाले को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इसके लिए सच्चे सदगुरु की शरण में जाकर उनके बताए मार्ग पर चलना आवश्यक है। उक्त बातें गोलमा पूर्वी पंचायत के सखौड़ी में महर्षि मेंही परहंस जी महाराज के शिष्य बैद्यनाथ यादव एवं प्रो.रमेश कुमार के द्वारा शनिवार को आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के समापन पर स्वामी निर्मल बाबा ने कही। उन्होंने सत्संग की महिमा पर प्रकाश डालते कहा कि सत्संग में आने वाले ही परमात्मा की कृपा के पात्र बनते हैं। तथा सत्संग से ही वह ज्ञान प्राप्त होता है, जिससे मनुष्य संसार के दुखों से मुक्त होकर अनंत आनंद प्राप्त कर सकता है।

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निर्मल बाबा ने आगे कहा परमात्मा की प्राप्ति बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के अपने भीतर होती है। जिसके लिए गुरु की युक्ति लेकर निरंतर भक्ति करना आवश्यक है। वहीं, रेशमलाल बाबा ने प्रवचन में कहा कि सत्संग मनुष्य को मौत के भय से बचाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सत्संग अवश्य करना चाहिए। सत्संग से सभी प्रकार के सुख तथा जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने मानव शरीर की सार्थकता को समझते हुए साधन-भजन में मन लगाने की प्रेरणा दी। सत्संग में दूर-दराज से बड़ी संख्या में महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के अनुयायी श्रद्धालु पहुंचकर अध्यात्म की गंगा में डुबकी लगाया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक भजनों की मधुर प्रस्तुति का आनंद लिया। जिसमें नुनूलाल बाबू के भजनों से माहौल भक्तिमय बना रहा और श्रोता झूमते रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आनंद कुमार, कल्याण, रूपेश कुमार सहित आध्यात्मिक लोग जुड़े रहे।