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स्मार्ट सिटी के अफसर पटना तलब, देंगे हिसाब

भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (बीएससील) द्वारा अभी तक किये गये कार्यों की नगर विकास मंत्री समीक्षा करेंगे। मंत्री ने इसके लिए दो अगस्त को बीएससीएल के पदाधिकारियों को पटना बुलाया है।

भागलपुर स्मार्ट सिटी के पीडीएमसी को हटाये जाने के बाद पटना स्मार्ट सिटी के साथ बीएससीएल का अनुबंध हुआ है। जिसके तहत 900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की डीपीआर और आरएफपी तैयार करने की जिम्मेदारी पटना स्मार्ट सिटी ने ली है। वहां की टीम भागलपुर कई बार आ चुकी है। भागलपुर स्मार्ट सिटी की टीम भी पटना जाकर वहां की टीम को सहयोग कर रही है।

भागलपुर स्मार्ट सिटी के छह प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। बीएससीएल की सीईओ जे प्रियदर्शनी ने बताया कि तैयार किए गए प्रोजेक्ट की डीपीआर के ड्राफ्ट का प्रजेंटेशन अगस्त में दिया जायेगा। जिसके बाद उसे बोर्ड में रखा जायेगा। इन प्रोजेक्ट में कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (ट्रिपल सी), स्मार्ट सड़क, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रिवर फ्रंट, ट्रिपल सी भवन और ओपेन स्पेस शामिल हैं। ट्रिपल सी की डीपीआर के ड्राफ्ट का पटना स्मार्ट सिटी की टीम भागलपुर में प्रजेंटेशन भी दे चुकी है। इस डीपीआर को तकनीकी समिति के पास भेजा गया है जहां से एक सप्ताह में रिपोर्ट मिल जायेगी। पिछले महीने की शुरुआत में ही नगर विकास मंत्री ने पूर्व नगर आयुक्त सह बीएससीएल के सीईओ के साथ मीटिंग में कहा था कि अब स्मार्ट सिटी का कार्य धरातल पर दिखना चाहिए। डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट), आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) तैयार कर और उसका टेंडर फाइनल कर इस साल के अंत तक कार्य धरातल पर लाने का निर्देश मंत्री ने दिया था।

तत्कालीन प्रमंडल आयुक्त की शिकायत पर हुई थी जांच : पिछली बार तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार की शिकायत पर स्मार्ट सिटी के फंड से सामान खरीद में गड़बड़ी की जांच हुई थी। लगभग दस करोड़ के सामान खरीदे गये थे। इस फंड से पार्कों में ओपेन जिम, बच्चों के लिए झूले व अन्य सामान, ट्रैफिक सिग्नल, कम्पोस्टिंग मशीन, जेटिंग मशीन, बस पड़ाव के उपकरण, कम्पोस्टिंग मशीन आदि खरीदे गए थे। इनमें ज्यादातर सामान बेकार हो गये। आरोप था कि इन सामान की खरीद में नियमों की अनदेखी की गयी।

पहले की जांच का पता नहीं, फिर उसी अफसर को जिम्मा : पूर्व नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा पर लगे आरोपों की जांच के लिए नगर विकास विभाग जिस अधिकारी को टीम का अध्यक्ष बनाया गया है वे पहले भी स्मार्ट सिटी के फंड से हुए खर्च में गड़बड़ी की जांच कर चुके हैं। पहले की जांच में क्या हुआ इसका अभी तक पता नहीं चला। फिर से उसी अधिकारी को दे दी गयी है जांच की जिम्मेदारी। पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त ने विभाग को स्मार्ट सिटी के फंड से हुई खरीदारी में नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जांच की सिफारिश की थी। अब वर्तमान प्रमंडलीय आयुक्त की शिकायत पर जांच शुरू की गई है।

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  • Web Title:Smart City Officer calls on Patna will give account