DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शब-ए-बारात : गुनाहों की माफी मांग पुरखों की कब्रों पर फातेहा पढ़ेंगे लोग

eid

शब-ए-बारात 20 अप्रैल को मनाई जाएगी। इसके लिए कब्रिस्तानों की सफाई शुरू कर दी गई है। शब-ए-बारात के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग गुनाहों की माफी मांगने के साथ पुरखों की कब्रों पर जाकर फातेहा पढ़ेंगे। शब-ए-बरात के मौके पर रोजे का भी एहतेमाम करना चाहिए इसकी बड़ी फजीलत है।

अलग-अलग रिवायतों में आया है कि साल भर के गुनाह माफ हो जाते हैं। अल्लाह के अंतिम पैगंबर जनाब मोहम्मद सल्लाहो अलैह वसल्लम शाअबान के महीने में नियमित रूप (कसरत) से रोजा रखते थे। वहीं रात में इबादत के लिए मस्जिदों, कर्बलाओं व दरगाहों को सजाने का काम शुरू कर दिया गया है। 

इन कब्रिस्तानों में कब्रों की रंगाई का काम तेज
शब-ए-बारात के मद्देनजर जन्नतुल फिरदौस कब्रिस्तान करोड़ी बाजार, जरलाही रोड, भीखनपुर कब्रिस्तान, कौव्वाटोली कब्रिस्तान के साथ ही अन्य कब्रिस्तानों में भी मरम्मत का काम तेज कर दिया गया है। लोग अपने पुरखों की कब्रों का रखरखाव करवाने के साथ ही पुताई करवा रहे हैं। इसके अलावा कुछ निजी कब्रिस्तान हैं, जहां पर सफाई के साथ रंगाई-पुताई का काम हो रहा है। 

पुरखों के कब्र पर चिराग रोशन कर दुआ करेंगे 
शब-ए-बारात पर कब्रिस्तानों में रोशनी का प्रबंध किया जायेगा। लोग अपने पुरखों की कब्रों पर चिराग रोशन करने के साथ ही दुआ करेंगे। इस्लामी महीना शाअबान की 14वीं तारीख की रात शब-ए-बारात होती है। इस रात इबादत का सवाब आम दिनों की तुलना में कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। मुसलमान मरहूमीन (मर चुके) रिश्तेदारों और दोस्तों के कब्रों पर मगफिरत की दुआ मांगेंगे और घरों में फातेहा होगी।

तौबा और बख्शीश का बेहतरीन मौका है शब-ए-बारात: फखरे आलम हसन
ख़ानक़ाह-ए-पीर दमड़िया शाहमार्केट, खलीफाबाग के उप सज्जादानशीं सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि शाअबान की 15वीं शब (शब-ए-बारात) मुबारक और मुकद्दस भरी रात है। इस रात अल्लाह ताला की तरफ से बख्शीश व मगफिरत का ऐलान-ए-आम होता है। जो इस रात सच्चे दिल से अपने गुनाहों पर नादिम होते हुए बख्शीश व मगफिरत चाहता है, ऐसे बंदों की अल्लाह के दरबार में दुआ और तौबा क़बूल होती है। साथ ही उसका पिछला गुनाह भी माफ हो जाता है। 

चार गुनाह से करें तौबा, नहीं तो बख्शीश नहीं 
बख्शीश और मगफिरत की रात में भी ऐसे बदनसीब लोग होंगे जो अगर इन चार से तौबा नहीं करेंगे तो अल्लाह के दरबार में इनकी बख्शीश नहीं होगी। पहला, मां-बाप की नाफरमानी, दूसरा शराब की आदत, तीसरा इर्ष्या, नफरत व जलन और चौथा आपस में रिश्तेदारियों व नातों को तोड़ने की आदत। 

शब-ए-बारात में नहीं है आतिशबाजी का सबूत, इससे बचें
सैय्यद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि शब-ए-बारात की रात में नमाज, कुराने पाक की तिलावत, जिक्र इलाही, तौबा और इस्तेगफार करना चाहिए। साथ ही देश के लिए अमन-शांति की दुआ करनी चाहिए। साथ ही अपने पूर्वजों और रिश्तेदारों के कब्रों की जियारत हो और उनके लिए इसालो सबाब के साथ मगफिरत और बुलंदी-ए-दरजात के लिए दुआ करनी चाहिए। शबेबारात रमजानु उल मुबारक जैसे अजीम और मुकद्दस महीने की आमद का संकेत भी है। शबेबारात जैसे मुकद्दस रात में आतिशबाजी का कोई सबूत नहीं है यह अमल अपने माल का जिया और नुकसान है, इससे इमान वालों को बचना चाहिए। 
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Shab e Baraat : people of Muslim Community will be apologizing of crimes