Bhagalpur News: लखीसराय:अतिक्रमण और गंदगी से अवरुद्ध जलनिकासी, बरसात में फिर डूब सकता है कजरा रेलवे ट्रैक
Bhagalpur News: कजरा क्षेत्र में बरसात के मौसम में जलजमाव की समस्या फिर से बढ़ने लगी है। स्थानीय निवासी चिंतित हैं कि यदि जलनिकासी मार्गों की सफाई नहीं की गई, तो 2017 जैसी स्थिति फिर उत्पन्न हो सकती है। रेलवे ट्रैक, बाजार और गांवों पर इसका बुरा असर हो सकता है।

Bhagalpur News: लखीसराय से मनीष की रिपोर्ट कजरा, एक संवाददाता। बरसात का मौसम शुरू होते ही कजरा क्षेत्र में जलजमाव की पुरानी समस्या एक बार फिर लोगों की चिंता का कारण बनने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी के प्राकृतिक मार्गों की सफाई और अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो वर्ष 2017 जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है, जिससे रेलवे ट्रैक, बाजार और आसपास के गांव प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञात हो कि अक्टूबर 2017 में हुई भारी वर्षा के दौरान मालदा रेल मंडल के जमालपुर-किऊल रेलखंड स्थित कजरा रेलवे स्टेशन के रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने से अप और डाउन दोनों दिशाओं में रेल परिचालन लगभग दो से तीन घंटे तक बाधित रहा था। उस समय कजरा के अलावा नरोत्तमपुर, बिक्रमपुर, सहमालपुर और महसोनी सहित कई गांवों के घरों में वर्षा का पानी प्रवेश कर गया था। कजरा बाजार की अनेक दुकानों में भी पानी भर जाने से किराना, खाद एवं अन्य सामान क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। स्थानीय लोगों के अनुसार खैरा गांव स्थित रेलवे फाटक संख्या 27 तथा कजरा बाजार स्थित सूर्यगढ़ा-कजरा सड़क के रेलवे फाटक संख्या 28 के बीच लगभग आधा दर्जन छोटी-बड़ी पुलियाएं हैं। पूर्व में कजरा पहाड़ी क्षेत्र से आने वाला वर्षाजल इन्हीं जलमार्गों और प्राकृतिक नालों के माध्यम से आसानी से निकल जाता था। समय के साथ इन जलनिकासी मार्गों पर अतिक्रमण हो गया। कई स्थानों पर इनका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर इन्हें कूड़ा-कचरा फेंकने का स्थल बना दिया गया है。
2017 में हुआ था भीषण जलजमाव, परेशान हुए थे सभी:
ग्रामीणों का मानना है कि वर्ष 2017 में उत्पन्न जलजमाव की मुख्य वजह इन्हीं प्राकृतिक जलमार्गों का अवरुद्ध होना था। बाद में कुछ स्थानों पर आंशिक सफाई और खुदाई का कार्य कराया गया, लेकिन अतिक्रमण हटाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप आज भी रेलवे फाटक संख्या 27 और 28 के बीच स्थित नदीनुमा जलनिकासी मार्ग अतिक्रमण और गंदगी की समस्या से जूझ रहे हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि इन जलमार्गों के मुहाने कूड़ा-कचरे से पटे हुए हैं और कई स्थानों पर जलप्रवाह पूरी तरह बाधित है। ऐसे में यदि लगातार और अधिक वर्षा होती है, तो कजरा क्षेत्र के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही रेलवे ट्रैक पर भी पानी पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन तथा राज्य सरकार से मांग की है कि बरसात के दौरान किसी संभावित संकट से बचने के लिए अविलंब जलनिकासी मार्गों की सफाई कराई जाए तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि नदियों और नालों का प्राकृतिक प्रवाह बहाल कर दिया जाए तो वर्षाजल खेतों तक पहुंचेगा, जिससे जलजमाव की समस्या भी नहीं होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को भी लाभ मिलेगा और फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।
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