बोले जमुई : पेयजल योजनाओं को दुरुस्त किया जाए, नदी से अवैध बालू उठाव बंद हो

Feb 27, 2026 12:34 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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झाझा नगर परिषद के वार्ड 25 में जल संकट गहराता जा रहा है। नदी और कुएं सूख गए हैं, और नल-जल योजना पिछले कई वर्षों से ठप है। धोबी समाज को रोजमर्रा के काम के लिए पानी नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। स्थानीय लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बोले जमुई : पेयजल योजनाओं को दुरुस्त किया जाए, नदी से अवैध बालू उठाव बंद हो

- प्रस्तुति : अरुण बोहरा झाझा नगर परिषद के वार्ड संख्या 25 के निवासी इन दिनों भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। यहां की नदी और कुएं पूरी तरह से सूख चुके हैं, जबकि नलों से पिछले पांच-छह वर्षों से पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। इस विकट स्थिति ने स्थानीय लोगों, विशेषकर यहां बड़ी आबादी में रहने वाले धोबी समाज की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। उनके लिए पानी केवल परिवार की प्यास बुझाने के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार का भी प्राथमिक साधन है। लोगों के कपड़े धोकर अपनी आजीविका चलाने वाले इस समाज को अपने रोजमर्रा के काम के लिए पर्याप्त पानी की नितांत आवश्यकता होती है।

पानी के घोर अभाव में अब उनके सामने जीवन के साथ-साथ रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधि और प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या समाधान करने की मांग की है। जिससे लोगों की परेशानी दूर हो सके। कल तक नदियों में अठखेलियां करते व उसकी आगोश में बैठकर घंटों तक अपनी काया को कूल-कूल करने वाले बेचारे मवेशी काया को छोड़, अपनी हलक की प्यास बुझाने के लिए भी इधर-उधर भटकते दिख रहे हैं। नदी से निराश मवेशी नाले-पोखरों तक में पानी ढूंढ़ते चल रहे हैं। ध्यान रहे कि झाझा शहरी व ग्रामीण हलकों के लोगों के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी उलाय नदी ही लाइफलाइन रही है। गरीबी की चादर में लिपटी कई महिलाओं ने बताया कि वे समर्थ नहीं कि अपनी बोरिंग या चापाकल बैठा लें। ‘हिन्दुस्तान’ से संवाद के क्रम में तेतरी देवी, मनि देवी, बबिता व फूल कुमारी, ललिता देवी तथा मुन्ना व चून्ना रजक ने बताया कि वे लोग उलाय नदी के गणेशी मंदिर के किनारे बसे हैं, किंतु उनके परिवारों को करीब दो सौ मीटर दूर दुर्गा मंदिर के करीब से पानी ढो कर लाना पड़ता है। रोचक यह कि उक्त वार्ड किसी पहाड़ी इलाके में नहीं, अपितु ठीक उलाय नदी के किनारे ही बसा है। पर नदी के तट पर बसे होने के बाद भी अफसोसजनक यह कि यहां की बसावट पानी के लिए सालों से तरसती आ रही है। मुख्यत: महादलित समुदाय की बसावट वाले नदी किनारे के लोग बताते हैं कि कभी उनकी यही नदी कल-कल बहा करती थी, हर हमेशा नदी में बहुतायत में पानी उपलब्ध रहने से कभी पानी के किसी और संसाधन का उन्हें मोहताज नहीं होना पड़ा था। पर बालू के अंधाधुंध उठाव ने पूरे झाझा नगर व प्रखंड की लाइफ लाइन माने जाने वाली उक्त उलाय नदी का बंटाढार कर दिया है। पूरी तरह सूखकर किसी मैदान नुमा हाल में तब्दील हो चुकी उक्त नदी अब तो खुद पानी मांगती दिख रही है। लोगों ने बताया कि करीब छह साल पूर्व वार्ड में नल-जल योजना शुरू होने से उन्हें यह लगा था कि अब पानी के मामले में उनके दुख भरे दिन खत्म हो गए हैं। किंतु योजना शुरू होने के महज करीब दस दिन बाद से ही नलों ने जो पानी उगलना बंद किया वह अबतक भी बंद है। वार्डवासियों के उक्त कथन के सच्चाई होने की पुष्टि वार्ड के पार्षद रंजन कुमार अकेला भी करते मिले। लोगों का कहना है कि अभी गर्मियों पूरी तरह परवान भी नहीं चढ़ी हैं। ऐसे में जब शुरुआत में ही यह आलम है तो आने वाले दिनों का हाल भगवान ही जाने। हद तो यह कि कई मंदिरों के परिसर स्थित कुएं भी सूख जाने से मंदिर में पूजा को आने वाले बेचारे श्रद्धालु भगवान पर अर्पण को एक लोटकी जल को भी तरस जाते दिख रहे हैं। उलाय नदी के गणेशी मंदिर तट के एवं बाबूबांक मोहल्ले के वाशिंदों ने आक्रोश भरे लहजे में कहा कि पांच-छह साल पूर्व तक जब बालू उठाव का खेल नहीं चला करता था तब के पूर्व के बीते कई दशकों में भी उन्हें पानी की कभी कोई किल्लत नहीं हुई थी। बताया कि गणेशी मंदिर घाट पर संवेदकों की जेसीबी तो नहीं चलती है, पर बालू के धंधेबाज ठेले से रोजाना 500 बोरी से अधिक बालू की ढुलाई कर रहे हैं। इसके अलावा इसी उलाय नदी के अन्य दर्जनों मुकामों पर बालू संवेदकों की जेसीबी नदी के सीने को काफी गहरे तक छलनी कर दे रही है। इसके अलावा आगे में रेलवे ने भी अपनी जरूरत के लिए डीप ड्रिलिंग करा रखी है। ऐसे में आगे से भी पानी नहीं आ पा रहा है ओर उनकी नदी नदी की बजाय मैदान बनकर रह गई है। जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की हो पहल क्षेत्र में गहराते जल संकट और उलाय नदी के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर लोगों ने प्रशासन से तुरंत और सख्त कदम उठाने की मांग की है। जनसमस्याओं को रेखांकित करते हुए मांग की गई है कि बदहाल नल-जल योजनाओं को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त किया जाए। बार-बार पाइप फटने की समस्या से निजात पाने के लिए भूमिगत पाइपों को पूरी तरह से तय मानकों के अनुसार बिछाया जाना चाहिए। साथ ही, निर्बाध जल आपूर्ति के लिए योजना का नियमित रखरखाव और सख्त निगरानी सुनिश्चित होनी चाहिए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि इन गंभीर समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। हमारी भी सुनें संवेदक द्वारा कम गहराई में बिछाई गई पाइप वाहनों के दबाव से टूट रही है। उधर अंधाधुंध बालू उठाव से नदी भी सूख चुकी है। वार्ड के लोगों के सामने गंभीर जल संकट है। रंजन कुमार अकेला, पार्षद वार्ड इलाके में पानी की बहुत अधिक दिक्कत हो गई है। हालात ऐसे हैं कि पीने और कपड़े धोने तक के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। भीषण गर्मी में हमारी नदी भी पूरी तरह सूख चुकी है। - मुन्ना रजक हमारे यहां पानी का बड़ा संकट खड़ा है। नल लगा दिया गया है, किंतु दुर्भाग्य से उसमें कभी भी पानी नहीं आता। बालू के भारी उठाव के कारण हमारी नदी भी पूरी तरह सूख गई है। - चुन्ना रजक पानी की बहुत अधिक परेशानी है। हमलोगों का जीवन और रोजगार पानी के सहारे ही चलता है। लेकिन अब स्थिति यह है कि हमें न तो पीने को पानी मिलता है और न ही कपड़ा धोने को। - कविता देवी नदी सूख जाने और नल-जल योजना के पूरी तरह फेल होने से पानी का बड़ा संकट है। यहां से रोज लगभग पांच सौ बोरी बालू का उठाव होता है, प्रशासन को इस पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। - लाल बाबू हमें पानी की बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पानी के लिए काफी दूर स्थित दुर्गा मंदिर के पास जाना पड़ता है। इलाके की नदी और कुएं भी अब पूरी तरह से सूख चुके हैं। - तेतरी देवी नदी से बालू का भारी उठाव होने के कारण अब इसमें न तो पानी आता है और न ही ठहरता है। अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हम लोगों को काफी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है। - फूल कुमारी हमारी नदी पूरी तरह से सूखी हुई है और गांव की नल-जल योजना भी पिछले कई सालों से खराब पड़ी है। अपनी जरूरतों के लिए काफी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है। - बबिता कुमारी अंधाधुंध बालू उठाव से नदी का पानी पूरी तरह सूख गया है। गांव का कुआं भी सूखा है और नल-जल योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा। मजबूरी में हमें काफी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है। - मनि देवी हमलोगों के सामने पानी की बहुत भारी समस्या खड़ी हो गई है। पीने के लिए और अपने ग्राहकों का कपड़ा धोने के वास्ते हमें प्रतिदिन काफी दूर से कड़ी मेहनत करके पानी ढोकर यहां तक लाना पड़ता है। - सुखिया पानी की कमी के कारण हमें दूर दुर्गा मंदिर के पास से पानी लाना पड़ता है। सरकार नदी से बालू उठाव पर तत्काल रोक लगाए और खराब पड़ी नल-जल योजना को जल्द ठीक कराए। - ललिता देवी इलाके में पानी की बहुत भारी दिक्कत है। लगातार हो रहे बालू उठाव और रेलवे की डीप बोरिंग की वजह से पिछले पांच-छह सालों से क्षेत्र में पानी का यह भयंकर संकट लगातार बना हुआ है। - राकेश कुमार गणेशी मंदिर घाट से बालू उठाव पर रोक लगे और वार्ड 25 की नल-जल योजना दुरुस्त की जाए। यहां के सभी परिवारों को राहत मिलेगी। - बमबम कुमार गणेशी मंदिर घाट से बालू उठाव का ठेका नहीं है, फिर भी ठेले आदि से रोज पांच-सात सौ बोरी बालू का अवैध उठाव हो रहा है। नल-जल योजना भी ठप है। - सन्नी कुमार बोले जिम्मेदार वार्ड संख्या 25 में नल-जल समस्या कभी ध्यान में नहीं लाई गई। वस्तुस्थिति की जांच कराकर हर हाल में शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। लोगों की सभी समस्या पर जवाबदेही के साथ समाधान के उपाय किये जाएंगे। जिससे परेशानी नहीं हो। - डॉ.जनार्दन प्रसाद वर्मा, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, झाझा। शिकायत 1. वार्ड में सरकार की नल-जल योजना पिछले कई सालों से पूरी तरह ठप पड़ी है। इसके कारण स्थानीय निवासियों को घर तक पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। 2. इलाके की प्रमुख उलाय नदी अब पूरी तरह से सूख चुकी है और भूजल स्तर गिरने से सभी कुएं भी जलविहीन हो गए हैं। जल संकट पैदा हो गया है। 3. ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रोजाना करीब दो सौ मीटर दूर स्थित दुर्गा मंदिर के पास से पानी लाना पड़ता है। शारीरिक और मानसिक परेशानी बन गई है। 4. क्षेत्र में अवैध रूप से बालू का बड़े पैमाने पर उठाव किया जा रहा है, लेकिन इसे रोकने या देखने वाला कोई नहीं है। माफिया पर्यावरण और नदी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। 5. जल संकट और अंधाधुंध बालू खनन की इन गंभीर समस्याओं के चलते आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सुझाव 1. नल-जल योजनाओं को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त किया जाना चाहिए। भूमिगत पाइपों को तय मानकों के अनुसार बिछाया जाए ताकि बार-बार क्षतिग्रस्त न हों। 2. उलाय नदी से हो रहे बालू के अवैध उठाव पर प्रशासन को तुरंत और सख्त रोक लगानी चाहिए। नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उपाय किए जाने की जरूरत है। 3. पेयजल की तुरंत व्यवस्था करने के लिए नदी के समीप पर्याप्त संख्या में नए चापाकल गड़वाए जाने चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को फौरी राहत मिलेगी। 4. नल-जल योजना के सुचारू रूप से चलते रहने के लिए इसका नियमित रखरखाव और निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। निर्बाध जल आपूर्ति मिलती रहेगी। 5. जल संकट और अवैध बालू खनन की इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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