
अलाव के अभाव में ठिठुरे लोग, ग्रामीण इलाकों में अलाव की व्यवस्था नहीं
कहलगांव सहित सभी प्रखंडों में ठंड से लोगों का जीवन हुआ प्रभावित, घर के अंदर
कहलगांव क्षेत्र में बीते तीन दिनों से लगातार चल रही बर्फीली पछुआ हवा और शीतलहर ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कड़ाके की ठंड का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। शाम ढलते ही बाजार और सड़कें सुनसान हो जा रही हैं, वहीं घने कुहासे के कारण चारों ओर अंधेरा छा जा रहा है। ठंड बढ़ने से मजदूर काम पर निकलने से कतरा रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। नगर क्षेत्र में नगर पंचायत की ओर से कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्तर पर कहीं भी अलाव की सुविधा नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि पंचायत स्तर पर मुखिया और जनप्रतिनिधियों ने भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है। सरकारी कंबल वितरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पंचायतों में कंबल वितरण पारदर्शी नहीं रहा और मुखिया द्वारा अपने चुनिंदा लोगों को ही कंबल बांटे जाने की चर्चा आम है। इससे वास्तविक जरूरतमंद लोग ठंड में बिना सहारे के जूझने को मजबूर हैं। भीषण ठंड का असर पशु-पक्षियों पर भी साफ नजर आ रहा है। पशुपालक मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए गुहाल में अलाव जला रहे हैं और उन्हें बाहर चरने नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं आवारा पशु पेड़ों के नीचे, खाली घरों और दरवाजों के पास दुबके दिखाई दे रहे हैं। पक्षी भी दाना-पानी की तलाश में कम निकल रहे हैं। कुल मिलाकर क्षेत्र में ठंड का प्रकोप चरम पर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सरकारी उदासीनता लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रही है।

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