150 अस्पताल और 60 रेस्टोरेंट को ही फायर सेफ्टी की एनओसी
फायर सेफ्टी के मानकों में लापरवाही पर सील करने की होगी कार्रवाई अग्निशमन से एनओसी

भागलपुर, प्रधान संवाददाता। जिले में काफी संख्या में अस्पताल व नर्सिंग होम अग्निशमन विभाग से फायर सेफ्टी को लेकर एनओसी प्राप्त किए बिना ही संचालित किए जा रहे हैं। किस तरह की लापरवाही की जा रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में सिर्फ 150 अस्पताल व नर्सिंग होम को एनओसी दी गयी है। सिर्फ 60 रेस्टोरेंट ही अग्नि सुरक्षा को लेकर एनओसी के साथ चलाए जा रहे हैं। अब विभाग सख्ती करने जा रहा है। पहले दिल्ली में रेस्टोरेंट में फिर मुजफ्फरपुर में अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद मुख्यालय ने भागलपुर सहित सभी जिलों को सख्ती करने का निर्देश दिया है।
मुख्यालय ने साफ कह दिया है कि जिन अस्पताल, नर्सिंग होम और रेस्टोरेंट में फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, उन्हें जल्द उसे पूरा करने को कहा जाएगा। उसके बाद भी कमी पाई गई तो उक्त प्रतिष्ठान को सील करने की कार्रवाई होगी।रिन्यूअल का नहीं होगा इंतजार, औचक निरीक्षण करेंगे पदाधिकारीअग्निशमन विभाग के एनओसी की बात करें तो अभी तक की व्यवस्था के अनुसार जो भी प्रतिष्ठान एनओसी के लिए आवेदन देते हैं वहां पर विभाग की टीम जाकर फायर सेफ्टी ऑडिट करती है। सबकुछ सही पाए जाने पर उन्हें एनओसी दी जाती है। उसके बाद हर साल उक्त प्रतिष्ठान को एनओसी प्राप्त करना है और उससे पहले फिर से फायर सेफ्टी ऑडिट होता है। ऐसे में वे प्रतिष्ठान बच जाते हैं जिन्होंने एनओसी के लिए आवेदन ही नहीं दिया और उसका संचालन कर रहे हैं। अब अग्निशमन विभाग की टीम औचक निरीक्षण करेगी और फायर सेफ्टी को दुरुस्त कराएगी।बॉक्सबेसमेंट का एरिया 200 वर्ग मीटर या ज्यादा हो तो स्प्रिंकलर लगवाना जरूरीबेसमेंट में नर्सिंग होम या अस्पताल के आईसीयू, लैब या किसी रेस्टोरेंट के संचालन को लेकर भी सख्ती की जाएगी। अग्निशमन विभाग के पदाधिकारी का कहना है कि मुख्यालय के दिशा-निर्देश के अनुसार दो सौ या उससे अधिक वर्गमीटर में अगर बेसमेंट होता है तो वहां पर स्प्रिंकलर लगवाना जरूरी है। उससे कम एरिया होने पर स्प्रिंकलर नहीं लगेगा। ऐसे में बेसमेंट में किसी बड़े प्रतिष्ठान का संचालन करना खतरनाक है। इसकी भी जांच की जाएगी। स्प्रिंकलर की बात करें तो यह एक स्वचालित जल आधारित अग्नि सुरक्षा प्रणाली है। आग लगने या तापमान 70 से 80 डिग्री तक होने पर इसका विशेष ‘ग्लास बल्ब’ या ‘फ्यूजिबल लिंक’ टूट जाता है और यह प्रभावित क्षेत्र में पानी का तेज छिड़काव शुरू कर देता है ताकि आग पर काबू पाया जा सके।वर्जननर्सिंग होम, अस्पताल और रेस्टोरेंट में अग्नि सुरक्षा को लेकर सघन जांच अभियान चलाने को लेकर मुख्यालय का निर्देश मिला है। जहां भी फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं होगा उन्हें उसे सही करने के लिए कुछ समय दिया जाएगा। उसके बाद भी कमी रही तो सील करने की कार्रवाई के लिए भी संबंधित अधिकारी को लिखा जाएगा।- संजय कुमार, जिला अग्निशमन पदाधिकारी
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