जमुई: पर्यावरण की छाती पर बंदोबस्तधारी चला रहे डोजर
जमुई में बालू घाटों पर बंदोबस्त धारियों द्वारा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए डोजर चलाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन इस पर चुप है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। नदियों में पोकलेन से बालू उठाने का काम हो रहा है, जो मजदूरों के रोजगार के लिए खतरा बनता जा रहा है।

जमुई। यूं ही ग्रीन ट्रिब्यूनल की अड़चन से बालू की किल्लत पैदा नहीं हुई थी। इसके लिए शायद बंदोबस्त धारी ही जिम्मेदार होते हैं। इसकी बानगी एक बार फिर से जमुई के विभिन्न बालू घाटों पर दिख रही है। यहां बंदोबस्तधारी पर्यावरण की छाती पर डोजर चला रहे हैं, यह कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मजेदार बात तो यह है कि इन सब के बावजूद जिला प्रशासन मूक दर्शक बना है। इसके पीछे की वजह क्या है यह तो जिला प्रशासन और बंदोबस्तधारी ही जाने। लेकिन, जमुई की जनता खासकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के मन में सवाल उठने लगा है।
वैसे खनन विभाग के अधिकारी नदियों में पोकलेन से बालू उठाव को जायज मानते हैं। हालांकि वह भी इस कार्य में मजदूरों को प्राथमिकता देने की नियमावली से सहमत हैं लेकिन सवाल भी वहीं खड़ा करते हैं। खान निरीक्षक गौरान कृष्ण कहते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर मजदूरों से बालू का उठाव संभव है क्या ? नतीजतन बालू घाटों की बंदोबस्ती से मजदूरों को रोजगार मिलने की संभावना पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है। यहां नदियों में पोकलेन और बड़ी-बड़ी मशीनें रोजगार की संभावनाओं को दिन-रात लील रही है। साथ ही मानदंड के विपरीत नदियों में 15 से 20 फीट तक की खुदाई की जा रही है जो आसपास के लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। आलम यह है कि नदियां तालाब में परिणत होती जा रही है। यहां यह बताना लाजमी है कि इसके पहले भी बंदोबस्त धारियों द्वारा नदियों का बेतरतीब दोहन किया गया था। जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ा। करीब पांच वर्षों तक बालू की किल्लत से हर सेक्टर और तबका प्रभावित हुआ
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


