
सहरसा: ई रिक्शा परिचालन का नियम नहीं हुआ प्रभावी
सहरसा में सड़क सुरक्षा और यात्री सुविधा के लिए ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा के रूटों को जोनों में विभाजित किया गया था। हालाँकि, यह योजना कुछ दिनों बाद निष्प्रभावी हो गई। ई-रिक्शा और ऑटो की संख्या में वृद्धि के कारण जाम की समस्या बनी रहती है। नई नीति के तहत क्यूआर कोड और पार्किंग स्थलों की पहचान की गई है।
सहरसा, नगर संवाददाता ।शहर में कुछ महीने पहले सड़क सुरक्षा, बेहतर यात्री सुविधा और शहर को जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न रूटों के बीच यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ऑटो रिक्शा एवं ई रिक्शा के सभी रूटों को जोनों में विभाजित करते हुए प्रत्येक जोन के लिए अलग-अलग कलर कोड निर्धारित किया गया था।लेकिन कुछ दिनों तक हीं यह निष्प्रभावी हो गया ।हाल के वर्षों में शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर बड़ी संख्या में ई रिक्शा और आटो की संख्या बढ़ी है। लोगों को आवागमन की सुविधा तो बढ़ी है लेकिन वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण सड़कों पर जाम की समस्या बनी रहती है।
इसी को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सड़कों की वाहन वहन क्षमता के अनुसार ऑटो/ई रिक्शा का नंबर तय किया गया था । बिहार सरकार द्वारा राज्य के सभी शहरों में ई रिक्शा को लेकर नई पालिसी लागू किया गया था। हालांकि ज्यादातर शहरों में इस कानुन का बुरा हाल है। योजना का उद्देश्य था कि शहरी क्षेत्रों में ऑटो रिक्शा/ई-रिक्शा के कुल संभावित निर्धारण क्षमता का निर्धारित प्रतिशत रिर्जव ऑटो / ई-रिक्शा के लिए सुरक्षित रहे। भविष्य में कयूआर कोड भी विकसित करने की योजना थी ।कयुआर कोड अंकित किये जाने से कयूआर कोड को स्कैन करने पर ऑटो रिक्शा/ई-रिक्शा एवं चालक से संबंधित सभी जानकारियाँ ट्रैफिक, अन्य प्रवर्तन पदाधिकारियों एवं सवारियों को सुविधापूर्वक प्राप्त हो जाता ।पार्किंग स्थल चिन्हित किया गया था।ई-रिक्शा पर रिक्शा चालक का नाम, मोबाइल नंबर, रूट अंकित था। रूट का उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया था।

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