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संक्रमण दर कम करने को बना नियम, अस्पताल की गैलरी हुई खाली

भागलपुर, वरीय संवाददाता पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के जिलों में सबसे बड़े अस्पताल में शुमार...

संक्रमण दर कम करने को बना नियम, अस्पताल की गैलरी हुई खाली
हिन्दुस्तान टीम,भागलपुरThu, 22 Feb 2024 01:00 PM
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भागलपुर, वरीय संवाददाता
पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के जिलों में सबसे बड़े अस्पताल में शुमार जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) में एक सुखद बदलाव का दौर देखने को मिल रहा है। कभी अस्पताल के इमरजेंसी की गैलरी में जमीन पर गद्दा बिछाकर इलाज करने के मामले में बदनाम रहे मायागंज अस्पताल में इन दिनों हरेक मरीज को बेड मिलने लगा है। यहां तक इमरजेंसी की गैलरी में इलाज करा रहे मरीज नहीं दिख रहे हैं। ये सब बदलाव सिर्फ एक नियम (इमरजेंसी में संक्रमण दर को कम करने) को लागू करने का परिणाम है।

इमरजेंसी में औसतन 85 से 90 मरीज रोजाना होते हैं इमरजेंसी में भर्ती

मायागंज अस्पताल में इन दिनों औसतन 85 से 90 मरीज रोजाना की औसत से भर्ती हो रहे हैं। अगस्त से दिसंबर के बीच जब जिले में डेंगू का प्रकोप अपने पूरे पीक पर था। उस दौरान तो हर रोज 125 से 150 मरीज रोजाना की औसत से इमरजेंसी में भर्ती हो रहे थे। ऐसे में बेड की उपलब्धता से ज्यादा मरीज होने की दशा में मरीजों को गैलरी में गद्दा बिछाकर इलाज किया जा रहा था। मरीज को रेफर भर्ती होने के अगले दिन किया जाता था। जमीन पर गद्दा बिछाकर इलाज कराने वाले मरीजों को स्लाइन स्टैंड तक मयस्सर नहीं होता था। जिससे परिजन स्लाइन की बोतल को गैलरी की झरोखे में लगे जाली से बांध देते थे। मेडिसिन व सर्जरी वार्ड की गैलरी में तो परिजनों को अपने हाथ में स्लाइन बोतल लेकर खड़ा होना पड़ता था।

13.67 प्रतिशत तक पहुंच चुका था इमरजेंसी के मरीजों में संक्रमण की दर

मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी में गद्दा बिछाकर मरीजों का इलाज कराने का नजारा इमरजेंसी के एसीओ रूम से लेकर ब्लड बैंक व रेडियोलॉजी विभाग से आगे तक दिखता था। गैलरी के एक तरफ मरीज गद्दा बिछाकर इलाज कराते दिखते थे तो उनसे दो फीट की दूरी से लोगों की आवाजाही होती थी। साथ ही दो मरीजों के गद्दे की दूरी भी तीन फीट ही रहती थी। ऐसे में इमरजेंसी में इलाज कराने वाले हरेक 100 में से 13 से 14 मरीजों को संक्रमण की समस्या हो जाती थी। अक्टूबर 2023 में तो इमरजेंसी में संक्रमण दर (इंफेक्शन रेट) बढ़कर 13.67 प्रतिशत पर पहुंच चुका था।

इन-इन पहल से इमरजेंसी की गैलरी में अब जमीन पर नहीं दिखते मरीज

मरीजों में हो रहे इंफेक्शन की दर को कम करने के लिए पहले तो अस्पताल प्रशासन व प्रबंधन ने इमरजेंसी में उपलब्ध बेड की संख्या 40 से बढ़ाकर 70 कर दी। इसके तहत सेंट्रल ड्रग स्टोर के पास दो बड़े हाल को खुलवाकर उसमें 30 बेड बिछा दिया गया। इसके बाद मार्ग दुर्घटना से लेकर अन्य मामलों में हड्डी तुड़वाकर इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों को इमरजेंसी के बगल स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती करने की व्यवस्था की गई। इसके बाद तीसरा अहम बदलाव, इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों को सर्जरी, हड्डी, मेडिसिन, शिशु रोग समेत अन्य विभागों में शिफ्ट करने की व्यवस्था दो शिफ्ट में की गई। यानी हर रोज अब सुबह व शाम में इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को शिफ्ट किया जाने लगा है। पहले मरीज के भर्ती होने के अगले दिन, कभी-कभार तो दो से तीन दिन बाद शिफ्ट किया जाता था। जिससे अब इमरजेंसी में अब जमीन पर गद्दा बिछाकर इलाज कराते मरीज अब नहीं दिखते हैं। हां, ट्रॉली पर लिटाकर मरीजों का इलाज अब जरूर दिखता है।

“इमरजेंसी में जमीन पर गद्दा बिछाकर इलाज कराने का दृश्य किसी भी अस्पताल के लिए शर्मनाक है। साथ ही इस प्रवृत्ति से अस्पताल में संक्रमण दर बढ़ने लगा था। इसलिए सभी विभागाध्यक्षों व प्रबंधन के साथ मिलकर विभिन्न उपायों को अमल में लाना पड़ा।”: डॉ. उदय नारायण सिंह, अधीक्षक, मायागंज अस्पताल, भागलपुर

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