बोले मुंगेर : नल-जल योजना के बंद पड़े पंप की मरम्मत और सड़क का निर्माण हो

Mar 13, 2026 11:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बिहार के मुंगेर जिले के धरहरा पंचायत के कुर्मी टोला में लगभग 2500 की आबादी विकास की कमी का सामना कर रही है। पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, और पुस्तकालय में किताबों की कमी के चलते ग्रामीणों की जीवन-स्तर में गिरावट आई है। स्थानीय लोग प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।

बोले मुंगेर : नल-जल योजना के बंद पड़े पंप की मरम्मत और सड़क का निर्माण हो

- प्रस्तुति : गौरव कुमार मिश्रा

जिले के धरहरा पंचायत अंतर्गत वार्ड-6 स्थित कुर्मी टोला के ग्रामीण इन दिनों भारी जनसमस्याओं का दंश झेल रहे हैं। लगभग 2500 की आबादी वाले इस गांव में विकास के दावों की जमीनी हकीकत निराशाजनक है। गांव में नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे पेयजल का संकट गहरा गया है। आवागमन के लिए मौजूद सड़कें बेहद जर्जर हालत में हैं। इसके अलावा जल निकासी के लिए नाले और रात के लिए स्ट्रीट लाइट की अनुपलब्धता ने ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। वहीं, युवाओं के पठन-पाठन के लिए बने पुस्तकालय में भी पुस्तकों का घोर अभाव है। लंबे समय से इन बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब इन समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है।

मुंगेर जिले के धरहरा पंचायत के वार्ड- 6 स्थित कुर्मी टोला आज भी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। लगभग 2500 की आबादी और करीब 1500 मतदाताओं वाले इस मोहल्ले में विभिन्न सरकारी योजनाओं की शुरुआत तो हुई, लेकिन उनका लाभ आम लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया। पेयजल, सड़क, नाला, आवास और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी यहां के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

लोगों ने बताया कि कुर्मी टोला में नल-जल योजना के तहत जलमीनार को पुस्तकालय के पास स्थापित किया गया था, जिससे मोहल्ले के लगभग 300 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, दुर्भाग्यवश यह पंप पिछले लगभग छह महीनों से बंद पड़ा है। इसके कारण लोग फिर से पुराने साधनों पर निर्भर हो गए हैं। यदि जल्द ही इसे फिर से चालू नहीं किया गया तो गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक इसे चालू नहीं कराया गया है। लोगों ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व इस मोहल्ले में लगभग आठ लाख रुपये की लागत से एक पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि क्षेत्र के छात्रों को अध्ययन के लिए एक बेहतर वातावरण और पुस्तकें उपलब्ध कराई जा सकें। लेकिन, आज स्थिति यह है कि भवन तो बना है, पर उसमें पर्याप्त पुस्तकों की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे यहां के छात्रों को पढ़ाई में काफी परेशानी होती है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं रही, जिसके कारण भवन में समय से पहले ही जर्जरता के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि कुर्मी टोला की मुख्य सड़क और मोहल्ले की कई गलियां आज जर्जर स्थिति में हैं। पिछले लगभग दस वर्षों से इनका समुचित निर्माण नहीं हुआ है। बरसात के मौसम में सड़कें कीचड़ में बदल जाती हैं और लोगों को आवागमन में भारी कठिनाई होती है। इसके साथ ही मोहल्ले में नाले भी की उचित व्यवस्था नहीं है। जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी और घरों का गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग से शिवकुंड की ओर जाने वाली मुख्य सड़क भी काफी खराब स्थिति में है। उनके अनुसार कुछ वर्ष पहले आई बाढ़ के दौरान सड़क का एक हिस्सा पानी में बह गया था। इसके बाद से अब तक सड़क का समुचित निर्माण नहीं हो पाया है। सड़क की खराब स्थिति के कारण खासकर रात के समय लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। वहीं, सड़कों और गलियों की स्थिति जर्जर होने के साथ-साथ यहां स्ट्रीट लाइट्स की भी उचित व्यवस्था नहीं है। कुछ जगहों पर सोलर लाइट लगाई गई थी, लेकिन उनकी बैटरी खराब होने के बाद पूरा मोहल्ला शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है। इससे रात में लोगों को आवागमन में कठिनाई होती है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। लोगों ने बताया कि मोहल्ले के लगभग 20 परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। इन परिवारों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना था कि, पात्र होने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया गया।

आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की गई

यही नहीं, मोहल्ले के बच्चों के लिए यहां खेल मैदान की व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय खिलाड़ियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्हें अभ्यास के लिए दियारा क्षेत्र में जाकर बालू पर खेलना पड़ता है। सुबह दौड़ लगाने के लिए भी कोई ट्रैक उपलब्ध नहीं है, इसलिए खिलाड़ी सड़क किनारे ही अभ्यास करने को मजबूर हैं। यदि नल-जल योजना को फिर से चालू किया जाए, सड़क और नालों का निर्माण कराया जाए, पुस्तकालय में पुस्तकों की व्यवस्था हो तथा स्ट्रीट लाइट और खेल मैदान उपलब्ध कराया जाए तो यहां के लोगों की जीवन-स्तर में काफी सुधार हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुस्तकालय को व्यवस्थित रूप से संचालित करने और छात्रों के लिए आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की है।

हमारी भी सुनें

सरकार नल-जल योजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हमारे क्षेत्र में इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। लगभग छह महीने से जलमीनार बंद पड़ी है।

- मनीष कुमार

लगभग दो वर्ष पहले पुस्तकालय का निर्माण कराया गया, लेकिन उसमें किताबों की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को काफी परेशानी होती हैै।

- सुशांत सिंह

नल-जल योजना के कनेक्शन बिछाने के दौरान सड़कों को तोड़ दिया गया, लेकिन बाद में उन्हें ठीक नहीं किया गया। सात निश्चय योजना के तहत सड़क मरम्मत का प्रावधान था।

- प्रियांशु सिंह

मोहल्ले में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग मजबूर होकर घरों में ही सोख्ता बनाकर पानी जमा करते हैं। इससे गंदगी और मच्छरों की समस्या बढ़ती है।

- अनिकेत

एनएच-80 से गांव आने वाली मुख्य सड़क बाढ़ के दौरान खराब हो गई है। सड़क जर्जर होने से रात में बाहर से आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है।

- विकास कुमार

न तो नियमित सफाई होती है और न ही ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाता है। इसके कारण मच्छरों की समस्या बढ़ गई है और लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

- शैलेश

आज भी कई लोगों के पास पक्के मकान नहीं हैं। सर्वे होने के बावजूद पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। बरसात के दिनों में कच्चे घरों में रहना बेहद मुश्किल हो जाता है।

- प्रिंस कुमार प्रिंस

मनरेगा योजना यहां लगभग बंद पड़ी है। कई लोगों के पास लेबर कार्ड है, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। रोजगार नहीं मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।

- जितन कुमार

मोहल्ले में डोर-टू-डोर कचरा उठाव नहीं होता है। नालों की सफाई भी नियमित रूप से नहीं की जाती। पंचायत स्तर पर ब्लीचिंग का छिड़काव भी नहीं हुआ है।

- प्रेम कुमार

नल-जल योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। जलमीनार बंद रहने से खासकर गर्मी के मौसम में पीने के पानी की समस्या बढ़ जाती है।

- जितेंद्र

पंचायत में हाई स्कूल तो है, लेकिन उसका अपना जमीन नहीं है और भवन भी जर्जर अवस्था में है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए उचित रास्ता नहीं है तथा बाढ़ के समय स्कूल पानी में डूबा रहता है।

- उदय राय

हर साल कटाव की समस्या से ग्रामीण परेशान रहते हैं। प्रशासन बाढ़ के समय ही कटाव रोकने का काम करता है। यदि अभी से कटाव निरोधी कार्य शुरू किया जाए तो नुकसान कम किया जा सकता है।

- शिवदानी राय

मोहल्ले में लाइब्रेरी तो बनाई गई है, लेकिन उसमें पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों को काफी परेशानी होती है।

- चांदनी देवी

मुख्य सड़क जर्जर हो चुकी है और पेड़ टूटने के कारण उसकी स्थिति और खराब हो गई है। अंधेरे में वाहन चालकों को दुर्घटना का डर बना रहता है।

- विंदेशवरी देवी

बोले जिम्मेदार

कुर्मी टोला, वार्ड नंबर-5 में यदि लोगों को नल-जल योजना के तहत पानी नहीं मिल रहा है और जलमीनार बंद पड़ी है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। अब तक इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई थी। यदि तकनीकी खराबी या अन्य किसी कारण से पंप बंद पाया जाता है तो उसे ठीक कराकर चालू कराया जाएगा।

- विनीत कुमार, जेई, पीएचईडी।

शिकायत

1. नल-जल योजना का पंप छह महीनों से बंद है, जिसके कारण लगभग तीन सौ घरों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

2. मोहल्ले की मुख्य सड़क और कई गलियां वर्षों से खराब स्थिति में हैं। बरसात में कीचड़ और जलजमाव के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता हैै।

3. करीब आठ लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय भवन बनाया गया, लेकिन उसमें पढ़ाई के लिए पर्याप्त किताबें उपलब्ध नहीं हैं। इससे छात्रों को कठिनाई होती है।

4. मोहल्ले में नाले की उचित व्यवस्था नहीं होने से जल निकासी बाधित रहती है। बारिश के समय गंदा पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है।

5. मोहल्ले में खेल मैदान नहीं होने से खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दियारा क्षेत्र में जाना पड़ता है। सुबह दौड़ लगाने के लिए भी कोई ट्रैक नहीं है।

सुझाव

1. नल-जल योजना के बंद पड़े पंप की शीघ्र मरम्मत कर उसे पुनः चालू किया जाना चाहिए। इससे लगभग तीन सौ घरों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा।

2. मोहल्ले की मुख्य सड़क और गलियों का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाना चाहिए। बरसात के समय होने वाली समस्याएं भी काफी हद तक कम हो जाएंगी।

3. पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान और पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों की व्यवस्था की जानी चाहिए। पुस्तकालय संचालन की व्यवस्था हो।

4. मोहल्ले में पक्के नालों का निर्माण कर जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे बारिश के समय जलजमाव की समस्या दूर होगी।

5. स्थानीय युवाओं के लिए खेल मैदान विकसित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही मोहल्ले में नई स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं और खराब सोलर लाइट की मरम्मत की जाए।

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