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भागलपुर

बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश, रोटी पर नमक और मिर्च से मिट रही भूख,

हिन्दुस्तान टीम,भागलपुरPublished By: Newswrap
Wed, 01 Sep 2021 05:20 AM
बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश, रोटी पर नमक और मिर्च से मिट रही भूख,

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता

टीएनबी कॉलेजिएट राहत शिविर में मंगलवार दोपहर एक बजे सविता देवी ने दो रोटी, नमक और मिर्च खाकर दिन की भूख और प्यास बुझा ली। बगल में बैठे दोनों बच्चों को सुबह 10 बजे ही खिचड़ी खिला दी थी। खेती-किसानी करने वाली सविता देवी और उसके पति छह सदस्यीय परिवार के लिए राहत शिविर में दो वक्त का खाना जुटाने में नाकाम साबित हो रही हैं। बाढ़ के पानी से बचाकर लाए गेहूं से उसका गुजारा चल रहा है। यही हाल शबनम देवी का भी है। राहत शिविर में रहने वाले सभी लोगों का कमोबेश यही हाल है।

सविता बताती है कि सरकार ने राशन और पानी देना बंद कर दिया है। जबकि शंकरपुर के चवन्निया दियारा में जलस्तर बढ़ने से गांव नहीं जा सकते हैं। घरों से पानी अभी उतरा नहीं है। जब तक जमीन नहीं सूखेगी, तब तक गांव जाना संभव नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारी जाकर घर देख आए। अगर रहने वाला होगा तो हमलोग चले जाएंगे। फिलहाल राहत सामग्री बंद नहीं करनी चाहिए। बच्चों को समय पर खाना खिलाने में काफी दिक्कत आती है। पीने के पानी को लेकर भी संकट है। यही नहीं, नहाने के लिए रात का इंतजार करना पड़ता है। दिन में जैसे-तैसे पर्दा लगाकर कुछेक महिलाएं नहा पाती हैं।

रात में रोशनी तक नहीं, ढिबरी में कट रही जिंदगी

तपती धूप, उमस तो कभी बारिश में भीग रहे बाढ़ पीड़ितों का हाल बुरा है। इवनिंग कॉलेज में दंपती सरकार और प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश में दिखे। उन्होंने कहा कि सात दिनों से हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। शंकरपुर बिंद टोला के रहने वाले संजय मंडल बताते हैं कि रातभर अंधेरा पसरा रहता है। 250 के करीब लोग राहत शिविर में रहते हैं। ढिबरी की रोशनी में परिवारवालों को जहरीले सांपों से बचाने के लिए रातभर जगकर देखना पड़ता है। सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। जैसे-तैसे अनाज की व्यवस्था कराकर दो वक्त का चूल्हा जल रहा है।

कच्चा राशन खाने के लिए बच्चे तैयार नहीं

टीएमबीयू परिसर स्थित राहत शिविर में रहने वाली ममता देवी शंकरपुर दियारा से आयी है। वह बताती है कि कच्चा राशन खाते-खाते बच्चे परेशान हो गए हैं। अनाज कम होने से चूल्हा एक ही समय जलाते हैं। गांव में कच्चा मकान है। जबतक पानी नहीं उतरेगा, तब तक जाना संभव नहीं है। सुमित बताते हैं कि वह परिवार के साथ गांव गए थे, मगर पानी अधिक होने की वजह से उन्हें वापस लौटकर आना पड़ा है। वहीं मवेशी के चारा को लेकर भी संकट है। जहां-तहां से हरा चारा लाकर मवेशी को खिलाया जा रहा है।

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