DA Image
21 अक्तूबर, 2020|11:17|IST

अगली स्टोरी

Good News: हाइड्रोजेल से कम पानी में भी होगा अधिक पैदावार बीएयू शोध को मिली मंजूरी

अब पानी के अभाव में किसानों का संकट नहीं बढ़ेगा। खेती प्रभावित नहीं होगी। हाइड्रोजेल के इस्तेमाल से कम पानी में भी अब अधिक पैदावार हो सकेगा। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की इस खोज को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने मंजूरी दे दी है। अब इसे पेटेंट कराने के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय को भेजा गया है।

 वैज्ञानिकों के अनुसार हर साल पानी के अभाव में 30-35 फीसदी उत्पादन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में हाइड्रोजेल के प्रयोग से खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद की जा रही है।

कैसे काम करेगा
बीएयू के मिट्टी विज्ञान विभाग ने पाउडर की शक्ल में हाइड्रोजेल तैयार किया है। खेत तैयार करने के बाद  इसको बीज के साथ डाला जाएगा। इसे तैयार करने वाले बीएयू की टीम के वैज्ञानिक डा. निंटू मंडल ने बताया कि इसमें यह क्षमता होगी कि पहली बार ही इतना पानी अवशोषित कर लेगा कि फसल तैयार होने तक खेत को पानी की दरकार नहीं पड़ेगी। तीन महीने तक मिट्टी में नमी बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि एक ग्राम हाइड्रोजेल में 500 ग्राम पानी अवशोषित करने की क्षमता है। एक हेक्टेयर में दस किलो हाइड्रोजेल का इस्तेमाल किया जाएगा। एक किलो हाइड्रोजल 350 रुपए में आएगा।

चार पटवन की बचत, एक हेक्टेयर में 40-50 हजार का लाभ
वैज्ञानिकों के अनुसार हाइड्रोजेल में 20 फीसदी मात्रा नाइट्रोजन की है। इसलिए फसलों को पोषक तत्व भी मिलेंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा। हाइड्रोजेल पहली बार में इतना पानी संग्रह कर लेगा कि आगे चार पटवन की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान श्री से सम्मानित कहलगांव के किसान वैदेशीशरण सिंह बताते हैं कि एक हेक्टेयर खेत में चार बार पानी पटाने में करीब 50 हजार खर्च हो जाता है। गेहूं, मकई, चना, मसूर जैसी रबी फसलों को हाइड्रोजेल से ज्यादा लाभ मिलेगा क्योंकि इन फसलों के समय आमतौर पर बारिश नहीं होती है।

चार साल का शोध, चार जिलों में प्रयोग
बीएयू के वैज्ञानिकों ने चार साल तक शोध करने के बाद हाइड्रोजेल तैयार किया है। इस दौरान भागलपुर, बांका, शेखपुरा और मुंगेर जिलों के खेतों में इसका प्रयोग किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि भागलपुर समेत बिहार के ज्यादातर जिलों में आमतौर पर पानी के अभाव में हर साल रबी फसलों का उत्पादन 30-35 फीसदी तक प्रभावित होता है। इसकी भरपाई के लिए विश्वविद्यालय ने हाइड्रोजेल तैयार करने की योजना बनाई थी।

पेंटेंट के बाद कंपनी से समझौता
बीएयू के निदेशक, प्रसार डा. आरके सोहाने ने बताया कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से पेंटेंट होने के बाद हाइड्रोजेल को बाजार में भेजने के लिए किसी खाद बनाने वाली कंपनी से समझौता किया जाएगा। अगले साल यह आम किसानों तक पहुंचने लगेगा।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:research of BAU Sabour of Bhagalpur now approved from Central government for higher yields in less water than hydrogel