
बोले कटिहार : साफ-सफाई व्यवस्था नदारद शौचालयों की हालत खस्ता
कटिहार शहर में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति गंभीर है। 45 वार्डों में महिलाएं और यात्री साफ और सुरक्षित शौचालयों के अभाव में परेशान हैं। कई शौचालय बंद, टूटे और गंदगी से भरे हुए हैं, जिससे लोग शर्मिंदगी का सामना कर रहे हैं। प्रशासन को इस समस्या का समाधान तुरंत करना चाहिए।
प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/देवाशीष गुप्ता

कटिहार शहर की चमकती सड़कों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के बीच एक ऐसी कड़वी सच्चाई छिपी है, जो रोजाना हजारों लोगों को शर्मिंदगी का सामना कराती है। 45 वार्डों वाले नगर निगम में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली शहर की संवेदनशीलता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। महिलाएं हों या यात्री सबको जरूरत के वक्त सम्मानजनक सुविधा नहीं मिलती। डेहरिया चौक से स्टेशन रोड तक फैली गंदगी, टूटे दरवाजे और बदबू से महकते शौचालय सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था की विफलता की कहानी कहते हैं। कटिहार आज साफ-सुथरे भविष्य की उम्मीद में प्रशासन से जवाब मांग रहा है।
कटिहार शहर रोज बदल रहा है। नई सड़कें, बढ़ती दुकानें, बढ़ती भीड़…, लेकिन एक ऐसी मूलभूत जरूरत आज भी अधूरी है, जो किसी भी शहर की पहचान और उसकी संवेदनशीलता की परीक्षा लेती है। सार्वजनिक शौचालयों की सुविधा। 45 वार्डों वाला कटिहार नगर निगम आज भी यात्रियों, खासकर महिला आगंतुकों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और साफ-सुथरे शौचालय उपलब्ध कराने में विफल है। शहर के बाजारों, चौक-चौराहों, व्यस्त सड़कों पर बने अधिकांश नगर निगम शौचालय बंद, टूटे, बदबूदार और गंदगी से अटे पड़े हैं। वार्ड - 38 डेहरिया चौक से लेकर स्टेशन रोड तक हालात इतने खराब हैं कि लोग शौचालय का नाम सुनते ही नाक सिकोड़ लेते हैं। हालत यह है कि सुबह-शाम शहर में आने वाली हजारों महिलाएं और यात्री शर्मिंदगी और मजबूरी के बीच रास्ते खोजते फिरते हैं। डीलक्स शौचालय जरूर राहत देते हैं, लेकिन वहां भी लोगों को उच्च शुल्क चुकाना पड़ता है। आम लोग सवाल कर रहे हैं- जब नगर निगम सफाई के लिए जमादार और मॉनिटरिंग के लिए स्वच्छता पदाधिकारी तैनात करता है तो फिर शौचालयों की मरम्मत और देखभाल समय पर क्यों नहीं होती? बरारी प्रखंड से आए विराट सिंह बुधवार को डेहरिया चौक एवं अड़गड़ा चौक स्थित पेशाबखाने का हाल देख दंग रह गए। वे कहते हैं कि शहर के बीचोंबीच बना सार्वजनिक शौचालय कचरे में दबा पड़ा है। कोई देखने वाला नहीं। हमें रोजाना जरूरत पड़ने पर बाटा चौक तक जाना पड़ता है। यह किसी भी शहर के लिए शर्म की बात है। उनकी बात कटिहार आने वाले हजारों लोगों की तकलीफ को बयां कर देती है। कटिहार रेलवे जंक्शन के पास पीपीपी मोड पर बने डीलक्स शौचालय जरूर साफ-सुथरे हैं, पर वहां भी गरीब, मरीजों के परिजन और आम यात्रियों का प्रवेश शुल्क के कारण हतोत्साहित होना आम है।
महिलाओं की सबसे बड़ी मुसीबत
कटिहार शहर का दैनिक जीवन जितना तेज होता जा रहा है, महिलाओं की समस्याएं उतनी ही बढ़ती दिख रही हैं। दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों में हर दिन हजारों महिलाएं आती-जाती हैं, लेकिन शौचालय उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। डेहरिया चौक, स्टेशन रोड, अड़गड़ा चौक, गौशाला रोड- किसी भी भीड़भाड़ वाले स्थान पर महिलाओं के लिए साफ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय मिलना लगभग असंभव है। कई महिलाएं बताती हैं कि वे बाजार आती हैं लेकिन वापसी से पहले जरूरत पड़ने पर घंटों तक किसी सुरक्षित शौचालय की तलाश में भटकती रहती हैं। कटिहार के ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाएं तो और ज्यादा परेशान होती हैं। न तो वे शहर को अच्छी तरह जानती हैं, न हर जगह पूछ पाती हैं। शर्मिंदगी और मजबूरी उन्हें घर वापसी में भी बाध्य कर देती है। डीलक्स शौचालय जरूर राहत देते हैं, लेकिन वहां शुल्क देना सभी के लिए संभव नहीं।
पर्यटन और व्यापार भी प्रभावित
कटिहार एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और रेल कनेक्टिविटी केंद्र माना जाता है। रोजाना हजारों यात्री, व्यापारी और आगंतुक यहां आते हैं, जिनमें से कई पहली बार शहर का अनुभव लेते हैं। लेकिन शहर के पब्लिक टॉयलेट उनकी ‘पहली छाप’ को खराब कर देते हैं। स्टेशन रोड, बड़ी बाजार और मालगोदाम रोड के आसपास बने सार्वजनिक शौचालयों की हालत ऐसी है कि बाहरी लोग हैरान रह जाते हैं। कचरा, बदबू और टूटी सीटें देखकर यात्रियों को लगता है कि शहर अपने ही बुनियादी ढांचे की देखरेख में पीछे है। कई व्यापारी बताते हैं कि कटिहार के व्यस्त कारोबारी इलाकों में ग्राहक से ज्यादा शर्मिंदगी उन्हें शौचालय की शिकायतों से झेलनी पड़ती है। स्टेशन से निकलने वाले यात्रियों में कई ऐसे होते हैं जो घंटों ट्रेन की प्रतीक्षा में रहते हैं, परंतु खराब शौचालयों के कारण घर लौटकर या प्लेटफॉर्म पर ही परेशान बैठ जाते हैं।
सार्वजनिक शौचालयों की नहीं की जाती है निगरानी
कटिहार नगर निगम हर साल सफाई पर लाखों रुपये खर्च करता है। स्वच्छता कर्मियों, जमादारों और निरीक्षकों की तैनाती भी कागजों में पूरी दिखाई देती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर के सार्वजनिक शौचालयों की ओर शायद ही कभी निगरानी की नजर जाती है। कई वार्ड पार्षदों का कहना है कि नगर निगम शौचालय केंद्रों पर नियमित चेकिंग का कोई सख्त सिस्टम नहीं है। सफाईकर्मी कई जगह हाजिरी तो लगाते हैं, लेकिन फील्ड में काम नदारद रहता है। नतीजा- शहर का बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। वार्ड 38, 32, 18 और स्टेशन रोड की स्थिति सबसे खराब मानी जाती है। कई जगह पानी की टंकियां सूखी रहती हैं। कहीं दरवाजे टूटे हैं तो कहीं फ्लश सिस्टम महीनों से खराब है। कई शौचालयों में बिजली तक नहीं है। निगरानी की कमी के कारण मरम्मत कार्य भी महीनों लटका रहता है। टेंडर जारी होते हैं, बिल पास होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असल काम धीमा रहता है।
हमारी भी सुनें
शहर के शौचालयों की बदहाली महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। बाजार आने पर हमें साफ जगह की तलाश में भटकना पड़ता है।
- नर्गिस हुसैन
सार्वजनिक शौचालयों की हालत देख लगता ही नहीं कि यह शहर विकास की बात करता है। बदबू, टूटी टंकियां और गंदगी देखकर वापस लौट जाती हैं।
- भारती देवी
डीलक्स शौचालय का शुल्क भी हर किसी के बस की बात नहीं। नगर निगम को चाहिए कि कम-से-कम भीड़ वाले वार्डों में मुफ्त शौचालय उपलब्ध कराए।
- सुनीता
स्टेशन रोड वाला शौचालय महीनों से खराब है, लेकिन किसी को परवाह नहीं। महिलाओं, बुजुर्गों और यात्रियों की यह बुनियादी जरूरत है।
- आशा शर्मा
हम गांव से इलाज कराने कटिहार आते हैं, लेकिन यहां शौचालयों की स्थिति देखकर मन घबरा जाता है। बदबू ऐसी कि पास खड़ा होना मुश्किल।
- जयमाला देवी
सार्वजनिक शौचालयों को लेकर जो स्थिति है, वह महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान दोनों से खिलवाड़ है। कई जगह तो दरवाजे तक टूटे पड़े हैं।
- मंजू देवी चंद्रवंशी
डेहरिया चौक और अड़गड़ा चौक की हालत तो बेहद खराब है। आम लोगों को मजबूरी में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मॉडल शौचालय बनाया जाए।
- रुपेश
बाजार आने वाली महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या शौचालय ही है। न तो साफ पानी मिलता है, न सफाई। कई जगह तो ताले लटके रहते हैं।
- सीता देवी
शहर हर दिन आगे बढ़ रहा है, लेकिन सार्वजनिक शौचालयों की हालत देखकर लगता है कि यह विकास अधूरा है।
- सोनाली साह
शहर में महिला यात्रियों के लिए शौचालय ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार हम दुकानों में जाकर विनती करते हैं कि हमें थोड़ी देर के लिए सुविधा मिल जाए।
- लता
शौचालयों की स्थिति देखकर समझ आता है कि सफाई पर खर्च सिर्फ कागजों में होता है। टीम बनाकर हर सप्ताह निरीक्षण कराना चाहिए।
- दिलीप चंद्रवंशी
शहर में शौचालयों की समस्या सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का सवाल भी है। गंदगी से फैली बदबू और कचरा लोगों को बीमार कर सकता है।
- शंकर सिंह
हम दिहाड़ी मजदूर लोग दिन भर बाजार और चौक के आसपास रहते हैं, लेकिन शौचालय ढूंढना बड़ी मुश्किल हो जाती है। पैसे देकर डीलक्स शौचालय जाना हर बार संभव नहीं।
- लख्खी मांझी
शहर की पहचान अब बदहाल शौचालय बनते जा रहे हैं, क्योंकि लोग बाहर से आते हैं और सबसे पहले यही गंदगी देखते हैं। यात्री हो या दुकानदार, सभी परेशान हैं।
- पप्पू कुमार
शौचालयों की दुर्दशा देखकर लगता है कि निगरानी कहीं नहीं हो रही। शहर में इतना बड़ा निगम है, फिर भी लोग बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
- बैजनाथ पासवान
सार्वजनिक शौचालयों का संकट शहर की रीढ़ पर चोट जैसा है। यात्री, महिलाएं, बुजुर्ग सभी परेशान हैं। डीलक्स शौचालय अच्छा है, पर शुल्क इसे सबकी पहुंच से दूर कर देता है।
- दिलीप
शिकायत
1. अधिकांश नगर निगम शौचालय बंद, टूटे या कचरे से भरे पड़े हैं। उपयोग लायक नहीं।
2. डेहरिया चौक, अड़गड़ा चौक और स्टेशन रोड के शौचालयों की स्थिति बेहद बदहाल।
3. महिलाओं और यात्रियों को जरूरत पड़ने पर किलोमीटरों दूर चलना पड़ता है।
4. पीपीपी मोड वाले डीलक्स टॉयलेट का शुल्क गरीब और आम लोगों की पहुंच से बाहर।
5. नगर निगम के जमादार व स्वच्छता पदाधिकारी तैनात होने के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होती।
सुझाव
1. सभी वार्डों में नए आधुनिक सार्वजनिक शौचालय और यूरिनल तुरंत निर्माण किए जाएं।
2. पुराने शौचालयों की नियमित सफाई, मरम्मत और निगरानी की ठोस प्रणाली बने।
3. रेलवे परिसर में कम-से-कम एक डीलक्स शौचालय सभी यात्रियों के लिए मुफ्त बनाया जाए।
4. भीड़ वाले बाजार, चौक और बस-स्टैंड क्षेत्रों में अतिरिक्त टॉयलेट यूनिट लगाए जाएं।
5. उपयोग करने वालों को भी जागरूक किया जाए। गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगाया जाए।
बोले जिम्मेदार
शहर के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली गंभीर मुद्दा है और इस पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कई शौचालयों की मरम्मत, पेंटिंग और पानी-सीवर लाइन दुरुस्ती का काम टेंडर के माध्यम से लिया गया है। अगले एक महीने में प्रमुख चौक-चौराहों के शौचालय पूरी तरह कार्यशील कर दिए जाएंगे। डीलक्स शौचालयों में शुल्क व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि आम लोगों पर बोझ कम पड़े।
-संतोष कुमार, नगर आयुक्त, कटिहार

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