संस्कृत ही भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रतिष्ठा का आधार : प्रो. डॉ. इन्द्रनाथ झा

हिन्दुस्तान, भागलपुर
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धनौरा के जवाहरलाल उच्च विद्यालय में सात दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर संपन्न राष्ट्र को गौरवान्वित

संस्कृत ही भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रतिष्ठा का आधार : प्रो. डॉ. इन्द्रनाथ झा

कहलगांव, निज प्रतिनिधि। जवाहरलाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, धनौरा में चल रहे संस्कृत संभाषण शिविर के सातवें दिन बिहार प्रांत संस्कृत भारती के अध्यक्ष एवं बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. इन्द्रनाथ झा ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और प्रतिष्ठा का मूल आधार संस्कृत ही है। हिंदी की शुद्ध वर्तनी और भाषा के विकास में संस्कृत का योगदान अतुलनीय है। संस्कृत को कठिन मानने की भ्रांति त्यागें विद्यार्थी

संस्कृत का अध्ययन

प्रो. झा ने विद्यार्थियों से संस्कृत को कठिन मानने की भ्रांति को पूरी तरह से त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने जीवन के वास्तविक मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि मनुष्य का जन्म केवल भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र को गौरवान्वित करने के लिए हुआ है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से हर प्रकार के सामाजिक भेदभावों से ऊपर उठकर संस्कृत का अध्ययन करने की अपील की।

ज्ञान, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा

प्रो. डॉ. इन्द्रनाथ झा ने समाज में शिक्षकों और वैद्यों (चिकित्सकों) के आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उपस्थित लोगों को ज्ञान, निस्वार्थ सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का अमूल्य संदेश दिया। इस विशेष अवसर पर उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य शैलेश पांडेय एवं शिविर संचालक डॉ. नयन तिवारी के इस सराहनीय प्रयास की खुलकर प्रशंसा की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किस विद्यालय में संस्कृत संभाषण शिविर चल रहा है?
संस्कृत संभाषण शिविर जवाहरलाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, धनौरा में चल रहा है।
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