एलिवेटेड रोड को समतल सड़क में बदलने की योजना से अवगत हुए सीएम

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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गंगा पथ के एलिवेटेड रोड से जलजमाव की समस्या से मिलेगी निजात आईआईटी रुड़की

एलिवेटेड रोड को समतल सड़क में बदलने की योजना से अवगत हुए सीएम

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मुख्यमंत्री को मुंगेर (साफियाबाद)-सुल्तानगंज-सबौर चार लेन गंगा पथ के निर्माण कार्य की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रस्तावित भागलपुर गंगा पथ और मुंगेर गंगा पथ से संबंधित जो भी समस्याएं हैं, उनका त्वरित समाधान करें। यह डॉल्फिन का इलाका है, उसको ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। एलिवेटेड पथ बनने से इस इलाके में होनेवाली जलजमाव की समस्या से भी लोगों को निजात मिलेगी। पीपीटी के दौरान तटबंध के निर्माण में आने वाली तकनीकी चुनौतियों के बारे में बताया गया। बताया गया कि उच्चतम जलस्तर से नदी की तलहटी की गहराई 22 से 24 मीटर है। कटाव से बचाव के लिए नदी तरफ कम-से-कम 1:3 के स्लोप का प्रावधान है। कुल आवश्यक आरओडब्ल्यू 122 मीटर है। अत्यधिक बचाव कार्य की जरूरत होगी। तटबंध के निर्माण एवं बचाव कार्य के कारण नदी के व्यवहार एवं उत्तरी तट पर निर्मित तटबंध पर आने वाला प्रभाव के कारण मानसून के पूर्व एवं बाद में रखरखाव कार्य आवश्यक होता है।

प्रस्तुतिकरण की जानकारी

प्रस्तुतिकरण के दौरान एलिवेटेड रोड को एट-ग्रेड (समतल) सड़क में बदलने की संभावना तलाशने के लिए गठित टीम के संयुक्त दौरे का निष्कर्ष भी बताया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि एलिवेटेड (उन्नत) सड़क को एट-ग्रेड (समतल) सड़क में बदलने की संभावना तलाशने के लिए जल संसाधन विभाग और पथ निर्माण विभाग एवं बिहार राज्य सड़क निर्माण विकास निगम के अधिकारियों की एक समिति का गठन किया गया था। संयुक्त स्थल निरीक्षण के बाद समिति ने पाया कि इस मामले पर कोई भी निर्णय लेने के लिए संभावनाओं के आकलन के साथ-साथ गंगा नदी के व्यवहार में बदलाव और उत्तरी किनारे पर स्थित मौजूदा तटबंध पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए मैथमेटिकल मॉडलिंग (गणितीय मॉडलिंग) और हाइड्रोलॉजिकल एवं मॉर्फोलॉजिकल अध्ययन (जलवैज्ञानिक और रूपात्मक अध्ययन) आवश्यक है। इसके बाद आईआईटी रुड़की के प्रो. ज़ेड. अहमद से इसका अध्ययन करने और सुरक्षात्मक कार्यों के साथ तटबंध की संभावना के संबंध में सुझाव देने का अनुरोध किया गया है। इसके लिए गंगा नदी के जलमग्न न होने वाले (सूखे) हिस्से का ड्रोन सर्वेक्षण और जलमग्न (डूबे हुए) हिस्से (लगभग 650 वर्ग किलोमीटर)का बाथमेट्रिक सर्वेक्षण किया जाना है।

सर्वेक्षण के लिए विवरण

सीएम को पदाधिकारियों ने बताया कि प्रो. ज़ेड. अहमद ने सूचित किया कि 1970 से 2025 तक गंगा नदी के उपग्रह चित्रों (सैटेलाइट इमेजेस) के अध्ययन और सीडब्ल्यूसी, डब्ल्यूआरडी आदि से प्राप्त जलवैज्ञानिक आंकड़ों (हाइड्रोलॉजिकल डेटा) के आधार पर 15 जून 2026 तक एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा प्रो. अहमद ने सूचित किया कि सर्वेक्षण कार्य में लगभग 90 दिन का समय लगेगा। सर्वेक्षण कार्य के बाद, मैथमेटिकल मॉडलिंग (गणितीय मॉडलिंग) की जाएगी और इस मॉडलिंग के आधार पर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इस अध्ययन के अतिरिक्त नदी के मुख्य चैनल में अतिक्रमण एवं उल्लंघन के कारण आईडब्ल्यूएआई से, नदी तल (रिवर बेड) में निर्माण के लिए एनएमसीजी से तथा डॉल्फ़िन सक्रिय क्षेत्र में हस्तक्षेप के कारण वन्यजीव एवं पर्यावरण अधिकारियों से एलिवेटेड रोड को एट-ग्रेड सड़क में बदलने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना होगा। सीएम ने नियमानुसार काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसने मुख्यमंत्री को गंगा पथ के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी?
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने मुख्यमंत्री को गंगा पथ के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी।

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