हर साल 456 करोड़ का आलू खा जा रहे भागलपुरी, सेवन करने से बनी रहती है ऊर्जा

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस (30 मई) पर विशेष हर माह जिले में 38 से 40 करोड़

हर साल 456 करोड़ का आलू खा जा रहे भागलपुरी, सेवन करने से बनी रहती है ऊर्जा

भागलपुर, वरीय संवाददाता। कभी दक्षिण अमेरिका के एंडिज पर्वतमालाओं में उगाये जाने वाला आलू आज देश के मुख्य आहारों में शामिल हो चुका है। करीब 350 से 400 साल पहले ब्रिटिश मिशनरियों एवं पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा देश में लाये गये आलू लोगों की जुबां पर इस कदर चढ़ा कि न केवल खपत के मामले में देश नंबर एक बना हुआ है, बल्कि उत्पादन के मामले में नंबर दो पर काबिज है। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो करीब 45 हजार मीट्रिक टन हर साल आलू इस जिले में उपजाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ हर साल भागलपुरी करीब 456 हजार करोड़ का आलू खा जा रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो आलू स्वादिष्ट, पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसके सेवन करने से शरीर को आवश्यक ऊर्जा, पोटेशियम और विटामिन सी मिलता है। साथ ही आलू में बहुत कम वसा, कम गर्मी और उच्च आहार फाइबर होता है। वसा की मात्रा केवल 0.1 प्रतिशत से 1.1 प्रतिशत होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि आलू जलवायु के अनुकूल फसल है, क्योंकि अन्य फसलों की तुलना में इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है।

1165 हेक्टेयर में होती है आलू की खेती, 46287 मीट्रिक टन उपजता है

जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में हर साल औसतन 1165 हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। वहीं आज की तारीख में जिले में हर साल औसतन 46287 मीट्रिक टन आलू उपजाया जाता है। वहीं जिले में प्रमुख रूप से आलू उत्पादक प्रखंड सबौर, नाथनगर, पीरपैंती, गोराडीह, शाहकुंड, सन्हौला व नवगछिया हैं। अगर हम जिले में खपत की बात करें तो हर रोज यहां पर 25 ट्रक (250 से 300 क्विंटल) आलू थोक मंडी में आता है। इस हिसाब से हर माह जिले में 38 से 40 करोड़ रुपये का आलू बिक जाता है जो सालाना 456 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाता है। वहीं जिले में उपजाया जाने वाला आलू खपत के मामले में नाकाफी होता है, लिहाजा भागलपुर की मंडी में उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से आलू मंगाया जाता है।

विश्व का सबसे महंगा आलू है ली बोनॉट, 56 हजार रुपये किलो बिकता है

यूं तो आलू बाजार में सामान्यत: 25 से 30 रुपये किलो मिल जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आलू की एक ऐसी प्रजाति है जो इतना महंगा है कि आप इस आलू को जितने रुपये में खरीदेंगे, उतने में दस ग्राम सोने की माला आप खरीद लेंगे। इस महंगे आलू का नाम है ली बनॉट। इसकी खास बात ये है कि यह केवल 10 दिनों के लिए ही बाजार में उपलब्ध रहता है। उसके बाद ये बाजार से गायब हो जाता है। इस दौरान भारत में ऑनलाइन शापिंग प्लेटफार्म में ही उपलब्ध रहता है। ली बनॉट आलू आमतौर पर सलाद, क्रीम और सूप के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस आलू को ट्रेड इंडिया पर 56020 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा चुका है। इसे ही दुनिया का सबसे महंगा आलू माना जाता है। फ्रांस के ली डे नॉरमाउटियर नामक द्वीप पर इस आलू की खेती की जाती है। इसकी खेती महज 50 वर्गमीटर के दायरे में की जाती है। जनवरी में ली बनॉट की बुवाई करने के बाद इसकी खुदाई में पांच महीने का समय लगता है। खाद के रूप में इसमें समुद्री शैवाल का प्रयोग किया जाता है। खाने में इसका स्वाद कुछ नमकीन होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागलपुर में आलू की खेती कितने हेक्टेयर में होती है?
जिले में हर साल औसतन 1165 हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है।

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