Bhagalpur News: गुप्त काशी में विराजते हैं बाबा बटेश्वर नाथ
Bhagalpur News: कहलगांव अनुमंडल में स्थित सिद्ध श्री बाबा बटेश्वरनाथ धाम एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसे ‘गुप्त काशी’ कहा जाता है। यहां महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या की और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और महोत्सव में भाग लेते हैं।

Bhagalpur News: कहलगांव, निज प्रतिनिधि। कहलगांव अनुमंडल में उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित सिद्ध श्री बाबा बटेश्वरनाथ धाम प्राचीन धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखता है। पौराणिक मान्यताओं के कारण इसे ‘गुप्त काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां बाबा बटेश्वर नाथ के मंदिर के सामने दक्षिणमुखी मां कालिका का मंदिर और पास में ही श्मशान घाट स्थित है। श्रद्धालु इसे शिव और शक्ति की अद्भुत साधना स्थली मानते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि वशिष्ठ ने यहां 12 हजार वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उन्होंने ही यहां महादेव की स्थापना की थी। कालिका अष्टांग से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र में सबसे पहले मां काली प्रकट हुई थीं। उनके उग्र स्वरूप को शांत करने के लिए महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या कर महादेव की स्थापना की। इसके बाद मां काली का स्वरूप शांत हुआ।
तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र
बाबा बटेश्वरनाथ धाम को प्राचीन काल से ही तंत्र साधना की सिद्ध भूमि माना जाता है। यहां बाबा बटेश्वरनाथ और मां कालिका की पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं के अनुसार धाम में रुद्राभिषेक और विधिवत पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। केन्द्रीय रेलवे रेलयात्री संघ की ओर से पिछले 19 वर्षों से धाम में एक माह तक सिद्ध श्री बाबा बटेश्वरनाथ महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान अखंड संकीर्तन, रामायण पाठ, जप, रुद्राभिषेक और महाभस्म अभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। वाराणसी की तर्ज पर होने वाली भव्य गंगा महाआरती श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। इसके अलावा विशाल भंडारे और आकर्षक साज-सज्जा से धाम का माहौल भक्तिमय हो उठता है। धार्मिक मान्यताओं, उत्तरवाहिनी गंगा के तट और शिव-शक्ति की उपासना के कारण बाबा बटेश्वरनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा बटेश्वरनाथ एवं मां कालिका का दर्शन-पूजन करते हैं।


