सिर्फ मॉकड्रिल और सर्विसिंग के वक्त ही चलता है 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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मायागंज अस्पताल में तीन ऑक्सीजन प्लांट में से दो चल रहे बंद ऑक्सीजन प्लांट चालू

सिर्फ मॉकड्रिल और सर्विसिंग के वक्त ही चलता है 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट

भागलपुर, वरीय संवाददाता मायागंज अस्पताल में कहने को तीन ऑक्सीजन प्लांट लगा हुआ है, लेकिन अपने स्थापना के वक्त से ही तीन में दो ऑक्सीजन प्लांट बंद चल रहे हैं। एक ऑक्सीजन प्लांट तो बीच-बीच में चला भी और सर्विसिंग के अभाव में बंद हो गया। लेकिन 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट सिर्फ मॉकड्रिल व सर्विसिंग के वक्त ही चलता है। इस ऑक्सीजन प्लांट के न चलने का कारण इस प्लांट को एनओसी का न मिलना है तो वहीं इसके न चलने के वजह से हर माह से करीब लाखों रुपये का ऑक्सीजन अस्पताल प्रशासन को खरीदना पड़ रहा है।फरवरी 2022 से बंद चल रहा है ऑक्सीजन प्लांट, ‘पेसो’ से आवेदन अब तक नहींजनवरी 2022 में तीन ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया।

इनमें से एक 2000 हजार एलपीएम का पीएसए ऑक्सीजन प्लांट तो दूसरा दो हजार एलपीएम का क्रॉयोजनिक ऑक्सीजन प्लांट है। लंबे कवायद के बाद क्रॉयोजेनिक ऑक्सीजन प्लांट शुरू हुआ तो मायागंज अस्पताल के करीब 650 बेड तक पाइपलाइन के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति होने लगी। वहीं दो हजार एलपीएम का पीएसओ ऑक्सीजन प्लांट सर्विसिंग के अभाव में बंद चल रहा है। आलम ये है कि ये प्लांट मॉकड्रिल तक में चालू तक नहीं हो सका। वहीं तीसरा 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट पूरी तरह से चालू अवस्था में है, लेकिन एनओसी न मिलने के कारण ये लगातार बंद चल रहा है। फरवरी 2022 में मायागंज अस्पताल प्रशासन द्वारा इस प्लांट को पेसो यानी पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन से एनओसी लेने के लिए आवेदन बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड) पटना को भेजा गया। बीएमएसआईसीएल को ही एनओसी के लिए पेसो को आवेदन भेजना था। लेकिन वहां आवेदन की फाइल ऐसी अटकी कि अब तक इस प्लांट को एनओसी नहीं मिल सका। जबकि ऑक्सीजन प्लांट के नोडल प्रभारी डॉ. महेश कुमार द्वारा बीएमएसआईसीएल पटना को कई बार स्मार पत्र (रिमाइंडर लेटर) भेजा गया, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।हर माह साढ़े छह लाख रुपये का ऑक्सीजन खरीदना पड़ रहा मायागंज अस्पताल प्रशासन कोइतने स्मार पत्र के बावजूद एनओसी न मिलने के कारण 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट बंद है। जबकि मायागंज अस्पताल के 350 बेड (इन पर पाइपलाइन से ऑक्सीजन आपूर्ति नहीं) पर भर्ती मरीजों पर रोजाना 40 जंबो सिलिंडर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में मायागंज अस्पताल प्रशासन को हर माह ऑक्सीजन खरीद के नाम पर करीब छह से साढ़े छह लाख रुपये खर्च करना पड़ता है। मायागंज अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट के नोडल प्रभारी डॉ. महेश कुमार बताते हैं कि अगर एनओसी मिल जाता तो 300 एलपीएम के ऑक्सीजन प्लांट से ही जंबो सिलेंडर में ऑक्सीजन भरा जाता और ऑक्सीजन खरीद के नाम पर लाखों रुपये अस्पताल प्रशासन के बच जाते।प्लांट से 20 मीटर की दूरी पर फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल, एजेंसी प्लांट से कनेक्ट नहीं कर रहीमायागंज अस्पताल की पुरानी इमरजेंसी से लेकर करीब 200 मीटर दूर स्थित एमसीएच वार्ड तक अस्पताल में कार्यरत क्रायोजनिक ऑक्सीजन प्लांट से पाइप के जरिए जुड़े हुए हैं। लेकिन प्लांट से महज 20 मीटर की दूरी पर 100 बेड का इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड (फै्ब्रिकेटेड हॉस्पिटल) पाइपलाइन के जरिए प्लांट से नहीं जुड़ सका है। जबकि करीब छह माह पहले इमरजेंसी में भर्ती दस मरीजों की जान पर खतरा उत्पन्न हो गया था, क्यूंकि उन्हें जिस जंबो सिलेंडर से ऑक्सीजन दिया जा रहा था, वह खाली हो गया था। ऐसा नहीं है कि प्लांट से फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल को पाइप लाइन से ऑक्सीजन देने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। बकायदा 19 नवंबर 2024 को एजेंसी (मेसर्स गणपति ड्रग्स) को कनेक्शन देने के लिए 13 सामानों की सूची दी गई। अस्पताल प्रशासन ने आपूर्ति का आर्डर दिया, लगाने के लिए टेंडर दिया गया। लेकिन अब तक एजेंसी ने न सामान लगाया और न ही प्लांट से फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल को जोड़ा। वहीं इस बाबत मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे ने कहा कि एजेंसी को तलब किया जाएगा और फैब्रिकेटेड हॉस्पिटल को ऑक्सीजन प्लांट से जोड़वाया जाएगा। वहीं एनओसी को लेकर बीएमएसआईसीएल को फिर पत्र लिखा जाएगा।

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