भागलपुर : भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएं की ऑनलाइन समीक्षा
भागलपुर में रविवार को आंचलिक कथाकार रामकिशोर की अध्यक्षता में भारत की प्रतिनिधि लघुकथाओं की ऑनलाइन समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। विभिन्न शहरों के साहित्यकारों ने भाग लिया और लघुकथाओं की विविधता और प्रभावशीलता पर चर्चा की। वक्ताओं ने पुस्तक की सरल भाषा और पाठकों पर उसके सकारात्मक प्रभाव की सराहना की।

भागलपुर। नेपाली शहादत-भूमि भागलपुर में रविवार को आंचलिक कथाकार रामकिशोर की अध्यक्षता में भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएं की ऑनलाइन समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें रांची, मुम्बई, शाजापुर, दार्जिलिंग, हिसार, पटना, कहलगांव, अजगैबीनाथ धाम सहित भागलपुर आदि जगहों के प्रतिष्ठित समालोचक साहित्यकारों ने समीक्षात्मक टिप्पणियों से अपनी सारगर्भित उपस्थिति दर्ज कराई। साहित्यकार अंकुश्री ने कहा इसमें एक सौ लघुकथाकारों की लघुकथाएं हैं, इसलिए सबका स्वाद भी अलग-अलग है। वरिष्ठ लेखिका आभा दवे ने कहा कि ''आवरण से अंतिम पृष्ठ तक यह अपना ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है। इसका सम्पादन पारस कुंज जी ने बड़े ही मनोयोग के साथ किया है।
अशोक आनन ने कहा कि ''इनके कथ्य और शिल्प में नवीनता न होते हुए भी ये पाठकों के मन को उद्वेलित करने की सामर्थ्य रखती हैं। अन्य वक्ताओं ने कहा कि पुस्तक की भाषा सरल, प्रभावपूर्ण और पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करने वाली है। यह संग्रह न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि पाठकों के हृदय में गहरी छाप छोड़ने में सफल है।
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