बोले जमुई : शौचालय बंद, सड़कों पर कूड़े के ढेर से बिगड़े हालात
शहर का पुरानी बाजार, जो कभी पहचान हुआ करता था, अब जाम, अतिक्रमण और गंदगी से जूझ रहा है। शौचालयों की कमी और सफाई व्यवस्था की बदहाली ने स्थिति को और खराब कर दिया है। व्यापारी और ग्राहक दोनों परेशान हैं, और बाजार की रौनक खोती जा रही है। प्रशासनिक उपायों की आवश्यकता है।

प्रस्तुति : संतोष कुमार सिंह
शहर का पुरानी बाजार आज उपेक्षा का शिकार है। कभी शहर की पहचान रहा यह बाजार अब जाम, अतिक्रमण और गंदगी से जूझ रहा है। बाजार में महज कुछ जगहों पर शौचालय हैं, वो भी अक्सर बंद या गंदे रहते हैं। ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की भीड़ से जाम आम बात हो गई है। नगर परिषद के अतिक्रमण हटाओ अभियान से थोड़ी राहत जरूर मिली लेकिन सफाई व्यवस्था अब भी बदहाल है। कर्मचारी कूड़ा इकट्ठा कर छोड़ देते हैं जिससे तेज हवा में गंदगी दुकानों में फैल जाती है। थाना चौक से पुरानी बाजार चौक तक वन-वे लागू नहीं होने के कारण घंटों जाम लगता है। दुकानदारों का कहना है कि न सुरक्षा की व्यवस्था है और न ही सफाई की नियमितता। फूटकर विक्रेताओं और ठेला चालकों के लिए अलग स्थान चिन्हित करने की मांग की जा रही है। कभी भीड़भाड़ वाला यह बाजार अब सिर्फ थोक खरीदारों तक सीमित होकर रह गया है।
शहर का पुरानी बाजार किसी पहचान का मोहताज नहीं है। अंग्रेज काल से चला आ रहा यह बाजार आज उपेक्षित होकर रह गया है। शहर के भीतरी बाजारों में सड़कें संकरी होने से वाहनों की आवाजाही से पूरे दिन जाम लगा रहता है। हालांकि नगर परिषद द्वारा हाल के दिनों में लगातार माइकिंग किए जाने के बाद दुकानदार काफी हद तक सचेत हो गए हैं। अब सड़कों पर सामान रखने की प्रथा से सभी हिचकने लगे हैं। थाना चौक से लेकर पुरानी बाजार चौक तक वन वे लागू नहीं होने से व्यापारी व ग्राहक दोनों परेशान रहते हैं। यहां पर सड़क बहुत की संकरी है और दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में कभी-कभी घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। देखना होगा कि अभी जिस प्रकार व्यवसायी वर्ग सचेत होकर अपने सामान को बाहर नहीं रख रहे हैं यह कितना दिन कायम रहता है। यहां पुरानी बाजार से थाना चौक तक वन-वे यातायात होने पर ही राहत मिल सकती है। ऐसे में बाजारों के हालात खराब होता जा रहा है। जाम की समस्या से जुझता यह बाजार पूरी तरह प्रभावित होकर रह गया। पहले यह बाजार शहर की शान हुआ करती थी अब उपेक्षित होकर रह गई है। अब यहां लोग सिर्फ थोक खरीदारी के लिए ही पहुंचते हैं। एक समय था जब शहर का पुरानी बाजार ही शहर का मुख्य बाजार कहा जाता था। होल-सेल से लेकर रिटेल तक सभी प्रकार की दुकानें बहुतायत में थी और सब में ग्राहक रहते थे। हाल ऐसा था कि माल लेने के लिए नंबर लगाना पड़ता था। मगर जैसे-जैसे शहर फैला और महाराजगंज, महिसौड़ी, कचहरी चौक जैसे नए मोहल्ले बसते गए। वहां से बाजार निकालकर इन क्षेत्रों में बढ़ता गया। उसके बाद पुरानी बाजार की संकरी गलियों के कारण लोग और ग्राहक अब जाने में हिचकने लगे। बहुत सी पुरानी दुकानें बहुत से कारणों से बंद हो गई। पुरानी बाजार की संकरी गलियों का हाल यह है कि एक साथ दो गाड़ियां आ-जा नहीं सकती। इस कारण व्यापारियों ने नए क्षेत्रों की तलाश की और इसी में पुरानी बाजार की दुकानदारी मार खा गई। अभी भी पुरानी बाजार में बहुत से दुकान है जो चलते हैं मगर दुकानों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। हिंदुस्तान के 'बोले जमुई' संवाद के दौरान व्यापारियों ने अपनी समस्याएं खुल कर रखीं। वहीं फूटकर विक्रेता, रेहरी , ठेला पर बिक्री करने वालों के लिए नया जगह पर स्थापित करने की मांग की। माना जाता है कि यह बाजार विकास की रफ्तार के साथ पिछड़ गया। यह बाजार जितना पुराना है यहां उतनी ही ज्यादा समस्याएं हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर इतना अतिक्रमण था कि लोग इस बाजार में आने से हिचकिचाते थे। हालांकि यहां की सड़कें आज भी संकरी ही है। सड़क पर अक्सर जाम रहता है। दुकानदारों का कहना है कि बाजार में सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है।
बाजार में कई जगह लगे हैं कूड़े के ढेर, लोग हलकान
बाजार में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। बाजार की सड़क दो वार्डं के अंदर आती है। दोनों वार्ड की आपसी मतभेद में सफाई व्यवस्था बदहाल रहती है। बाजार की मुख्य सड़क पर लगे कूड़े के ढेर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि सफाई कर्मचारी दूसरे इलाके में सफाई करने को तैयार नहीं होते हैं। अगर बाजार में सफाई के लिए आते भी हैं तो कूड़े को इकट्ठे कर देते हैं जिसे हफ्तों तक उठाया नहीं जाता। तेज हवा चलने पर कूड़ा उड़कर दुकानों में चला जाता है। सफाई व्यवस्था को लेकर जब निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कहा जाता है तो वह टालमटोल का हवाला देकर सफाई की बात को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
आवागमन में परेशानी
यह शहर का सबसे पुराना बाजार है, परंतु अतिक्रमण की समस्या अब भी कायम है। अव्यवस्था और जाम की स्थिति के कारण खरीदारों की आवाजाही घट गई है। समय रहते अतिक्रमण हटाने और बाजार में सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि पुरानी रौनक लौट सके और व्यापार फिर से सक्रिय हो सके।
हमारी भी सुनें
ई-रिक्शा व ऑटो चालकों के कारण राहगीरों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। संबंधित विभाग को इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिए।
- मो. राजा पठान
फूटकर विक्रेता को भी स्थायी जगह मिले, इस पर पहल हो। राहगीर के साथ-साथ दुकानदारों को भी किसी प्रकार की दिक्कत न हो। प्रशासन पहल करे।
- कैलाश केशरी
निगम कर्मचारी सड़क पर सफाई कर कूड़े को इकट्ठा तो कर देते हैं, लेकिन कई दिनों तक उठाने नहीं आते हैं। इसके कारण संक्रामक बीमारी का डर सता रहा है।
- सैयद
तेज हवा चलने पर कूड़ा उड़कर दुकान में चला जाता है। इससे दुकान में रखा समान खराब होता है। इससे हालात बदतर हो जाते हैं।
- मो. क्यूम
संकरी गलियों के कारण माल मंगाने में परेशानी होती है। बड़े वाहन दुकान तक नहीं पहुंच पाते हैं। कई पुराने ग्राहकों ने यहां आना छोड़ दिया है।
- अलतमश शाद
ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। पुरानी बाजार आने वाली सड़क में कई स्थान पर नालियां टूटी हुई हैं। इस कारण सड़क पर ही नाले का पानी फैल जाता है।
- सल्लू खान
अभी भी पुरानी बाजार में कई थोक दुकानदार हैं। मगर खुदरा दुकानदारों को यहां आने में परेशानी होती है। इससे व्यापरियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
- मो मनीर खान
कई दुकान बदहाल अवस्था में आ गए हैं। ग्राहक चकाचौंध के कारण अन्य क्षेत्रों में दुकानों से खरीदारी कर रहे हैं जिससे परेशानी हो गई है।
- मो. अशरफ खान
बाजर की सड़कें सकरी होने के कारण आवागमन में परेशानी हो रही है। पुरानी बाजार को वन वे का इंतजार है। संकीर्ण सड़कों ने व्यवसाय को ठप कर दिया है।
- मुरलीधर प्रसाद
होलसेल मंडी के रूप में जाना जाने वाला पुरानी बाजार कभी शहर का रौनक हुआ करता था। यह बाजार आज उपेक्षित होकर रह गया।
- प्यारेलाल मोदी
जाम से निजात के लिए वाहनों के पार्किंग बनाने पर नगर परिषद को ध्यान देने की जरूरत है। दिन प्रतिदिन पुरानी बाजार अपना इतिहास खोता जा रहा है।
- शशि
सरकार को चाहिए कि व्यवसायी को हर सुविधा मिले। सुविधाएं बढ़ेंगी तो बाजार का स्वत: विकास होगा। यूरिनल से लेकर शौचालय तक की व्यवस्था में कमी है।
- रिंकू केशरी
बाजार में जाम से निजात के लिए महिसौड़ी व महाराजगंज पर पुलिस हो। जिससे जाम की समस्या दूर हो सके और आराम से आवागमन कर सकें।
- शमशाद
पुरानी बाजार धीरे-धीरे अपना इतिहास खो रहा है। सरकार की ओर से भी सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पा रही हैं। व्यवसायियों को सुविधा मिलनी चाहिए।
- मो. सरवर
बाजार में जाम की समस्या से निजात के लिए वन-वे किया जाना जरूरी है। इस पर प्रशासन को विचार करना चाहिए। ताकि बाजार में रौनकपुर लौट सके।
- राजेश कुमार
बोले जिम्मेदार
जाम से निजात के लिए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर नगर परिषद द्वारा लगातार काम किया जा रहा है। चाहे नाले का निर्माण हो या सड़क का।
- प्रियंका कुमारी, इओ, नगर परिषद, जमुई
शिकायत
1. सड़क पर कूड़े कचरे का ढेर रहता है जिससे व्यवसायियों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है
2. बाजार में वन-वे नहीं से परेशानी होती है। जाम के कारण व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
3. चारपहिया वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही से बार-बार जाम की स्थिति बनती है।
4. सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के लिए पुलिस की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
5. बाजार में स्थायी-अस्थायी अतिक्रमण और अवैध ऑटो स्टैंडों की भरमार है। इसके कारण जाम की समस्या बढ़ती जा रही है।
सुझाव
1. बाजार की सड़क को चौड़ी किए जाने की जरूरत है जिससे लोगों का आना-जाना हो सकेगा। साथ ही बाजार क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना बेहद जरूरी है।
2. बाजार में यदि वन वे कर दिया जाए तो जाम की समस्या से राहत मिलेगी लोग व्यवसाय कर सकेंगे।
3. बाजार में नियमित रूप से साफ-सफाई की जरूरत है, जिससे कूड-कचरे का ढेर सड़क पर नहीं लगे। लोगों को आवागमन में परेशानी नहीं हो
4. नगर परिषद को बाजार क्षेत्र की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
5. बाजार में शौचालय तो है, लेकिन उस पर लगा ताला तुरंत खोला जाना चाहिए।
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