किलकारी के बच्चों ने शुरू की ‘ब्रह्मांड की यात्रा’
फोटो है : बेंगलुरु की खगोलविद दे रही हैं प्रशिक्षण चांद और बृहस्पति का

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। भागलपुर प्रमंडल स्थित किलकारी बिहार बाल भवन में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके को लेकर बुधवार से जारी विज्ञान शो में शुक्रवार को रोचक कार्यक्रम हुआ। इसका नाम ‘ब्रह्मांड की यात्रा’ रखा गया है। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। कार्यक्रम के पहले दिन मुख्य वक्ता के रूप में बेंगलुरु से आईं प्रख्यात खगोलविद प्रियंका गुप्ता ने प्रशिक्षकों के लिए एक गहन तकनीकी सत्र का संचालन किया। इस सत्र में उन्होंने टेलीस्कोप और माइक्रोस्कोप के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करते हुए टेलीस्कोप के विभिन्न प्रकारों और उनके विशिष्ट उपयोगों पर प्रकाश डाला। सुश्री गुप्ता ने बताया कि बताया कि खगोलीय अध्ययन को व्यवस्थित करने के लिए संपूर्ण आकाश को 88 भागों में विभाजित किया गया है।
बताया कि पृथ्वी की स्थिति बदलने के कारण ग्रीष्म एवं शरद ऋतु में आकाश का दृश्य पूरी तरह भिन्न होता है, जिसके चलते गर्मी में दिखने वाले कई पिंड शीत ऋतु में ओझल हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू धर्म के त्योहारों की तिथियों में होने वाले बदलाव के पीछे के विज्ञान को स्पष्ट करते हुए बताया कि ये चंद्रमा की विभिन्न कलाओं के अनुसरण पर आधारित होते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षकों को स्वयं टेलीस्कोप सेट करने का व्यवहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम का सबसे रोमांचक हिस्सा संध्या सत्र रहा। रात्रि लगभग 8.00 बजे बच्चों ने अपने अभिभावकों के साथ मिलकर टेलीस्कोप के माध्यम से चंद्रमा की सतह और विशाल ग्रह बृहस्पति का सजीव अवलोकन किया। इस अद्भुत दृश्य को देखकर बच्चों के साथ मौजूद अभिभावकों ने किलकारी के इस अनूठे प्रयास की प्रशंसा की। चार दिवसीय आयोजन के तीसरे दिन सूर्य की संरचना और सौर मंडल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जाएंगी। रात्रि के सत्र में पुनः खगोलीय पिंडों का प्रदर्शन होगा। शनिवार को विज्ञान दिवस के अवसर पर ‘नो योर लोकेशन इन द यूनिवर्स’ का सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चों को ब्रह्मांड में हमारी स्थिति के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। आयोजन के उद्देश्य पर बात करते हुए किलकारी बाल भवन भागलपुर प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक साहिल राज ने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना है। चांद-तारों की जो तस्वीर बच्चे किताबों में देखते हैं वे असल में वैसे ही हैं या नहीं।
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