DA Image
हिंदी न्यूज़ › बिहार › भागलपुर › घरों में कीचड़ व सड़ांध, बीमार हो रहे लोग फिर भी शिविर बंद
भागलपुर

घरों में कीचड़ व सड़ांध, बीमार हो रहे लोग फिर भी शिविर बंद

हिन्दुस्तान टीम,भागलपुरPublished By: Newswrap
Wed, 01 Sep 2021 05:20 AM
घरों में कीचड़ व सड़ांध, बीमार हो रहे लोग फिर भी शिविर बंद

नाथनगर। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

करीब 20 दिनों के बाढ़ से त्राहिमाम के बाद स्थिति सुधरी ही थी कि गंगा के जलस्तर में एक बार फिर से बढ़ोतरी होने लगी है। लोग दहशत में हैं और उन्हें समझ नहीं आ रही कि वे क्या करें? शहर में बाढ़ राहत शिविर बंद कर दिए गए हैं। घरों में सड़ांध और कीचड़ है। लोग बीमारी व संक्रमण के शिकार होने लगे हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों का दर्द है कि आखिर वे कहां जाएं?

मंगलवार को नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र की शहजादपुर पंचायत में जब हिन्दुस्तान टीम पहुंची तो बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा सामने आई। पीड़ित किसान पुरण मंडल, राकेश मंडल, अनिल कुंबले, कपिलदेव मंडल, विजय मंडल ने बताया कि शहजादपुर पंचायत के अमरी, बिशनपुर, नुररूद्दीनपुर दुधेला, छोटी बिशनपुर, मिर्जापुर, छोटी फुलवड़िया गांव में भीषण बाढ़ आई थी। पंचायत के मुखिया रूपेश कुमार को भी गांव छोड़कर शिविर में जाना पड़ा। मुखिया ने बताया कि पंचायत के करीब 450 बाढ़ पीड़ित परिवार हवाई अड्डा शिविर में अब भी रहने को मजबूर हैं। शिविर बंद हुआ तो लोग पंचायत लौटने लगे। बिना मवेशी लेकर यहां आये पर अभी भी हालात नहीं सुधरे हैं। घर में कीचड़ व सड़ांध भरा है। लोग बीमारी व संक्रमण के शिकार होने लगे। घर के अधिकांश चापानलों से जो पानी निकलता है उससे बदबू आ रही है। आपदा प्रबंधन व जिला प्रशासन के निर्देश पर शिविरों में खाना पीना तो बंद कर दिया गया लेकिन दोबारा बढ़ते जलस्तर को देखकर लग रहा है कि बाढ़ फिर आ सकती है। विगत दो दिनों में दोबारा नाथनगर राघोपुर से शहजादपुर पंचायत को जोड़ने वाली मुख्य पीसीसी सड़क पर तीन से चार फीट बाढ़ का पानी बहने लगा है।

फसल, अधिकांश पशु शेड व घर-मकान डूबे

अमरी निवासी बाढ़ पीड़ित मनोरमा देवी, इनके पति गौरी मंडल, अनिल मंडल, रीना देवी, राजकुमारी, ललिता देवी, गुंजन देवी ने बताया कि बाढ़ ने इनकी जिंदगी को तबाह कर दिया है। मकई, भिंडी, परबल, परोल सब बर्बाद हो गया।  घर मकान गिर गये। पक्की सड़क टूट गई। मनरेगा से बना पशुशेड बाढ़ में डूब कर बर्बाद हो गया। मवेशी लेकर लोग हवाई अड्डा स्थित राहत शिविर में ही है। बाढ़ का पानी फिर से इनके घरों के पास आ गया है। लगता है वापस शिविर में ही रहने को जाना पड़ेगा। दोबारा आशियाना बनाने की हिम्मत उनके पास नही है। सरकार से थोडा बहुत मुआबजा मिल जाता तो घर को दुबारा खड़ा कर सकेंगे। 

नारायणपुर प्रखंड व अंचल कार्यालय शहजादपुर से 70 किमी दूर

पंचायत के मुखिया रूपेश कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को राहत लेने या किसी भी छोटे मोटे काम के लिए नारायणपुर प्रखंड या अंचल कार्यालय जाना पड़ता है जो करीब 70 किमी दूर है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब 2017 में  नाथनगर के गोसाईंदासपुर पंचायत के हरिदासपुर आये थे तो उन्होंने जल्द नाथनगर मुख्यालय से इस पंचायत को जोड़ने की घोषणा की थी। कागजी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। अब देखना है कि कबतक यह काम धरातल पर पूरा होता है। पंचायत आने के लिए एक पुल का निर्माण कार्य भी आजतक नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को पंचायत आने जाने में काफी असुविधा होती है। सीओ अजय कुमार ने बताया कि ससमय बाढ़ पीड़ितों के खाते में जीआर की राशि छह हजार रुपये भेज दी गई है। सामुदायिक किचन चलाकर, राहत शिविरों में भी लोगों को सभी सुविधाओं के साथ रखा गया है। बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई है। सरकार की संपत्ति सबों की संपत्ति है। जितना जरूरत है जिलाप्रशासन की ओर से हर सुविधा बाढ़ पीड़ितों को दी गयी है। 

संबंधित खबरें