Bhagalpur News: किशनगंज: बारिश में मलेरिया का खतरा: सतर्कता और समय पर जांच से टलेगी गंभीर बीमारी
Bhagalpur News: किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट बारिश का मौसम जहां खेतों और जलस्रोतों

Bhagalpur News: किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट बारिश का मौसम जहां खेतों और जलस्रोतों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बनकर कई वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इस मौसम में मलेरिया से बचाव के लिए केवल मच्छरों से बचना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि बुखार के लक्षणों को गंभीरता से लेना और समय पर जांच कराना भी जरूरी है। मलेरिया का समय पर पता चलने पर इसका प्रभावी उपचार संभव है, जबकि जांच और इलाज में देरी बीमारी को गंभीर रूप दे सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए किशनगंज में स्वास्थ्य विभाग बारिश के मौसम के दौरान मलेरिया की निगरानी, जांच और उपचार को लेकर लगातार सक्रिय है।जिले में जनवरी 2026 से अब तक मलेरिया के कुल 14 मरीज पाए गए हैं। इनमें 12 मरीज पोठिया और 2 मरीज कोचाधामन प्रखंड के हैं। सभी मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी के साथ लोगों को मच्छरों से बचाव और बीमारी के लक्षणों को लेकर जागरूक किया जा रहा है。
बुखार को सामान्य न समझें, समय पर कराएं जांच
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि बारिश के मौसम में मच्छरों से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरतें। घर और आसपास पानी जमा न होने दें तथा मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई रखें। उन्होंने कहा कि बुखार आने पर उसे सामान्य बुखार मानकर स्वयं दवा लेने के बजाय नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि मलेरिया की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समुदाय और स्थानीय स्तर पर मिलकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना और लोगों को जागरूक करना जरूरी है。
सदर अस्पताल में जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि जिले में मलेरिया के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। बारिश के मौसम में मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ने के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जनवरी से अब तक मिले 14 मरीजों में 12 पोठिया और 2 कोचाधामन से संबंधित हैं तथा सभी का सफल उपचार किया जा चुका है।उन्होंने बताया कि मलेरिया की जांच एवं उपचार के लिए जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध है। सदर अस्पताल में भी मलेरिया की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा पीएचसी, एपीएचसी, रेफरल अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी लोगों को जांच एवं आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।जिला वेक्टर जनित सलाहकार अविनाश रॉय ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मलेरिया की जांच नि:शुल्क की जाती है और पर्याप्त मात्रा में जांच किट उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मलेरिया से संबंधित लक्षण दिखाई देने पर निजी स्तर पर इलाज कराने या स्वयं दवा लेने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराएं।
जमा पानी को रोकना मलेरिया से बचाव का सबसे अहम उपाय
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि बारिश के दौरान घरों के आसपास गड्ढों, पुराने टायर, टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, पानी की टंकियों या अन्य स्थानों पर पानी जमा हो सकता है। ऐसे स्थान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल होते हैं। इसलिए घर और आसपास जमा पानी को नियमित रूप से हटाना, नालियों की सफाई रखना और पानी के स्रोतों को ढककर रखना जरूरी है।मलेरिया से बचाव के लिए रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने तथा आवश्यकतानुसार मच्छररोधी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के आसपास मच्छरों से बचाव के उपायों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ठंड लगकर बुखार आए तो तुरंत कराएं जांच
मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड लगकर बुखार आना, कंपकंपी, तेज बुखार, बुखार उतरने के बाद पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी तथा अन्य शारीरिक परेशानी शामिल हो सकती है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ मंजर आलम ने स्पष्ट किया है कि बारिश के मौसम में बुखार को सामान्य समझकर कई दिनों तक इंतजार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। समय पर जांच होने से मलेरिया की पहचान जल्दी हो जाती है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।जिले में अब तक सामने आए सभी 14 मरीजों के सफल उपचार से यह भी स्पष्ट है कि बीमारी की समय पर पहचान और इलाज से मलेरिया को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में बारिश के मौसम में सतर्कता, स्वच्छता, मच्छरों से बचाव और समय पर जांच ही मलेरिया के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।


