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यादें: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्रा का टीएनबी कॉलेज से था गहरा नाता

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने टीएनबी कॉलेज से इंटरमीडिएट और अर्थशास्त्र से स्नातक किया। इसके बाद वे बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से पीजी करने चले गए। पढ़ाई के दौरान ही उनमें नेता वाली छवि दिखने लगी थी, तभी तो वे टीएनबी कॉलेज के वेस्ट ब्लॉक छात्रावास में प्रीफेक्ट बने थे। वे इंटरमीडिएट के दौरान भी कॉलर वाला खादी का कुर्ता और पायजामा पहनते थे। हां, उस समय बोलते कम थे।
 
यह अनुभव डॉ. मिश्र के साथ इंटर और स्नातक करने वाले एवं टीएमबीयू के पीजी फिलॉस्फी के विभागाध्यक्ष रह चुके प्रो. केदारनाथ तिवारी ने साझा किया। उन्होंने साथी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि डॉ. मिश्रा हमेशा छात्रावास में खाने के लिए घर से महीन चूड़ा लाते थे और साथियों को दही-चूड़ा खिलाते थे। वे विनोवा भावे के सर्वोदय कार्यक्रम से जुड़े थे और काफी सक्रिय रहते थे। 1957 में उन्हें हिन्दी कंपोजीशन में कम अंक आने के कारण एक साल उन्हें उसी क्लास में रुकना पड़ा। 1958 में उन्होंने इंटरमीडिएट और 1960 में अर्थशास्त्र (ऑनर्स) से स्नातक किया। इसके बाद मुजफ्फरपुर चले गए। 

टीएमबीयू की राजनीति से हमेशा जुड़े रहे 
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के छात्र होने के कारण डॉ. जगन्नाथ मिश्रा सक्रिय राजनीति में आने और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी टीएमबीयू की राजनीति से जुड़े रहे। टीएनबी के रसायन विभाग के प्रोफेसर और जगन्नाथ मिश्रा के नजदीकी रहे डॉ. जेसी चौधरी ने बताया कि यहां के कुलपति की नियुक्ति में भी वे रुचि लेते थे। एमक्यू तौहिद को भागलपुर व मिथिला विवि के कुलपति बनवाने में उनकी अहम भूमिका थी।

उन्होंने बताया कि उर्दू को बिहार की दूसरी राजभाषा का दर्जा दिलाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। उन्हें लखनऊ में मुजाहिदे उर्दू और मीर ए उर्दू का खिताब भी दिया गया। उनकी राजनीति ऐसी थी कि विपक्ष के लोग भी जुड़े रहते थे। वह सक्रिय राजनीति में रहते हुए भी हर साल भागलपुर आते थे। टीएमबीयू के पूर्व कुलपति रामाश्रय यादव के समय टीएनबी कॉलेज के स्थापना दिवस पर 2003 में आए थे। वहीं विवि के दीक्षांत समारोह में 2004 में भी आए थे। डॉ. मिश्र के न सिर्फ हिन्दुओं से बल्कि मुसलमानों से घनिष्ठ संबंध थे। यहां के कई अल्पसंख्यक नेताओं से उनका व्यक्तिगत संबंध था। 

शिवचंद्र झा का टिकट काटकर ज्योतिन्द्र चौधरी को दिया
भागलपुर के बुद्धिजीवियों में सबसे करीबी डॉ. ज्योतिन्द्र चौधरी थे। इस कारण 1995 के विधान सभा चुनाव में भागलपुर से टिकट दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने 2005 मानवाधिकार संगठन संस्थान बनाया था, जिसमें जेसी चौधरी को राष्ट्रीय सचिव का पद दिया था। 

स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट जगन्नाथ मिश्रा की ही देन
बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 1976 तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र की ही देन थी। इसे बिहार (झारखंड भी) में लागू किया गया। इसके पहले यहां के विश्वविद्यालयों में एक्ट नहीं थे। ये बातें टीएमबीयू के पूर्व प्रभारी कुलपति प्रो. एलसी साहा ने कहीं। उन्होंने कहा कि बाद में एक्ट में संशोधन होते रहे। उन्होंने बताया कि पीएचडी वाले शिक्षकों को 13 साल में और 18 साल में बिना पीएचडी वाले शिक्षकों को प्रोन्नति देने की परंपरा डॉ. मिश्र ने ही शुरू की थी। शिक्षक उसे जगन्नाथी प्रोमोशन भी कहते थे। वे शिक्षकों के हित का काफी ध्यान रखते थे।

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  • Web Title:Memories: Jagannath Mishra was student of TNB College of Bhagalpur University