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भागलपुरनैनो तकनीक के लिए खुलेगा मटेरियल सेंटर

हिन्दुस्तान टीम,भागलपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 05:11 AM
नैनो तकनीक के लिए खुलेगा मटेरियल सेंटर

भागलपुर। कार्यालय संवाददाता

टीएमबीयू के भौतिकी विभाग में नैनो तकनीक के लिए मटेरियल सेंटर खुलेगा। कुलपति के आश्वासन के बाद इसकी कवायद तेज हो गयी है। बीते दिनों वर्चुअल बैठक में कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने विभागाध्यक्ष व शिक्षक से इसका प्रारूप बनाकर देने को कहा है। ताकि इस दिशा में काम तेजी से शुरू किया जा सके। इससे पूर्व के प्रभारी कुलपति के समय में भी नैनो तकनीक पर चर्चा हुई थी। मगर प्रभारी कुलपति के हटते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

विभागाध्यक्ष डॉ. जगधर मंडल ने कहा कि कुलपति के निर्देश पर प्रस्ताव बनाकर इसी माह भेजा जाएगा। कुलपति की सहमति के बाद राज्य सरकार स्तर से अगर मदद मिलती है तो इस तकनीक के साथ टीएमबीयू बेहतर काम कर सकता है। विभाग के पास स्किल के शिक्षक मौजूद थे। वहीं नैनो तकनीक के जानकार डॉ. कमल प्रसाद ने कहा कि कुलपति के निर्देश पर काम शुरू किया जाएगा। अगर इस पर सहमति बनी तो टीएमबीयू न सिर्फ नैनो तकनीक की पढ़ाई कराएगा। बल्कि आसपास के क्षेत्रों की महिला और पुरुषों को स्वरोजागर में मदद भी दिलाएगा।

सौंदर्य प्रसाधन से लेकर सारे उपकरण बनेंगे :

डॉ. कमल प्रसाद ने कहा कि मटेरियल सेंटर बन जाने से हर तरह के उत्पाद की दिशा में काम किया जाएगा। इसमें महिलाओं के लिए सौंदर्य प्रसाधन से लेकर तात्कालिक जरूरतों पर सेंटर काम करने लगेगा। मसलन अभी पीपीआई कीट, सेनिटाइजर सहित छात्र और शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से भी कई सामानों को आसानी से तैयार किया जा सकता है। वहीं पूर्व में ही टीएमबीयू के तत्कालीन प्रभारी कुलपति डॉ.एके सिंह के समय टीएमबीयू के प्रोफेसर ने पीपीई कीट, सेनिटाइजर और हैंडवाश का पैटेंट करवा लिया है। जल्द ही इसके उत्पाद भी सामने आएंगे।

टीएमबीयू ब्रांड से बिकेंगे उत्पाद:

नैनो तकनीक पर काम शुरू होते ही टीएमबीयू एक ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आएगा। क्योंकि यहां पर तैयार सारे उत्पादन टीएमबीयू ब्रांड के रूप में बाजार में जाएगा। इससे आसपास के युवाओं के बीच रोजागार बढ़ेगा। वहीं विश्वविद्यालय की आमदनी भी काफी बढ़ जाएगी। पदार्थ विज्ञान विभाग और इंजीनियरिंग विभाग उपकरण से लेकर अन्य आधारभूत संरचना विकसित करेगा। इसके साथ ही रसायन विभाग, इंजीनियरिंग, बायो टेक्नोलॉजी, जूलॉजी और बॉटनी विभाग के छात्र-छात्रा इसमें नए शोध कार्य भी कर सकेंगें।

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