जमुई: महात्मा फुले करुणा, साहस और समर्पण के साकार रूप: प्रो.गौरी
हर वर्ष 11 अप्रैल को महात्मा फुले की जयंती मनाई जाती है। प्रो. डॉ. गौरी शंकर पासवान ने बताया कि फुले ने जाति प्रथा, छुआछूत और लैंगिक भेदभाव का कड़ा विरोध किया। उनका आदर्श वाक्य 'सर्व शिक्षा और सर्व उत्थान' था। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज सुधार के लिए प्रेरित करते हैं।

जमुई से मनोज तिवारी की रिपोर्ट हर वर्ष 11अप्रैल को महात्मा फुले की जयंती मनाई जाती है। महात्मा फुले के उपदेशों और विचारों की प्रासंगिकता पर प्रो. डॉ गौरी शंकर पासवान ने कहा कि महात्मा फुले भारत के महान संत, समाज सुधारक, अच्छे उपदेशक और मानवतावादी विचारक थे। कुंभ का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र में हुआ था। उनका जन्म एक व्यक्ति की नहीं बल्कि एक युग परिवर्तन का आरंभ था वे करुणा साहस और समर्पण के साकार रूप थे। उन्होंने जाति प्रथा छुआछूत और लैंगिक भेदभाव का कड़ा विरोध किया। महात्मा फुले का विचार कल भी प्रासंगिक था आज भी है और कल भी रहेगा।
प्रोफेसर पासवान ने कहा कि सर्व शिक्षा और सर्व उत्थान ही फुले का आदर्श वाक्य था। वे आजीवन सामानता, न्याय और महिला अधिकारों की बात करते रहे। शिक्षा को सामाजिक, परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन कहा था। उनका जीवन सरल और सदा था वे दलितों पर महिलाओं की अधिकारों के प्रहरी बनाकर उभरे थे। उन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर सामाजिक जंजीरों को तोड़ने का काम किया था। वे विकास, साहस और समर्पण के साकार रूप थे। उनका जन्म एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक युग परिवर्तन का आरंभ था, वे समाज सुधारक, उपदेशक, और मानवतावादी विचारक थे। उनक कोई गुरु नहीं थे। वे मुख्य स्टडी से प्रेरित थे मानवता समानता और न्याय ही उनके आदर्श थे। वे समानता के पुजारी, शिक्षा से समाज परिवर्तन के अग्रदूत और मानवता की सच्चे उपदेशक थे। उनके जीवन से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हर मनुष्य समान है। जाति, धर्म, लिंग के आधार पर भेदभाव गलत है। समाज सुधारसे के लिए साहस और निरंतर प्रयास आवश्यक है। प्रो.पासवान ने कहा कि महात्मा फुले का जन्म 11अप्रैल 1827 में महाराष्ट्र में हुआ था परंतु दुःख है कि 28 नवंबर 1890 को उनका देहांत हो गया था। वे हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके विचार और सिद्धांत आज भी हमें प्रेरित कर रहे हैं। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि "लहराएगा जब तक प्रशांत में पानी, युग-युग गाएगा अमर तेरी कहानी, जग मिटा न सकता अमर तेरी निशानी, हे प्रहरी बलिदानी हे देश भक्त अभिमानी।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


