machar ko takkar: awareness campaign of hindustan against dengue - मच्छर को टक्कर: 'न पीने दें एडिस मादा मच्छरों को अपना खून, नहीं होगा डेंगू' DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मच्छर को टक्कर: 'न पीने दें एडिस मादा मच्छरों को अपना खून, नहीं होगा डेंगू'

machhar ko takkar   awareness campaign of hindustan against dengue

हिन्दुस्तान अखबार द्वारा मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के खिलाफ मच्छर को टक्कर अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रविवार को हिन्दुस्तान अखबार के कार्यालय में आयोजित हिन्दुस्तान संवाद में समाज के हर वर्ग के लोगों का जुटान हुआ। संवाद में यह बात उभर कर आयी कि डेंगू की बीमारी एडिस मादा मच्छरों के काटने से ही होती है।

मादा मच्छर इसलिए इंसानों का खून पीती है, क्यूंकि उसे मच्छरों को पैदा करने के लिए खून की जरूरत होती है। ऐसे में अगर हम अपना खून इन मादा मच्छरों को पीने से रोक दें तो शहर में न तो मच्छरों का प्रजनन होगा और न ही डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी फैलेगी। मच्छरदानी व फुल बांह के कपड़े पहनकर हम इन मच्छरों को अपना खून चूसने से रोक सकते हैं। इसके अलावा घर की तरह शहर को भी हमें साफ-सुथरा बनाने के लिए एकजुट होना होगा। नगर निगम को भी अपनी सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।

मायागंज अस्पताल के कान, नाक व गला रोग विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रखर उपाध्याय ने कहा कि डीडीटी का छिड़काव हमारे शरीर में ऐसा जहर घोलेगा, जिसका नुकसान हमारी भावी पीढ़ीओं को उठाना होगा। ऐसे में मच्छरदानी का इस्तेमाल, नीम एवं तुलसी का पौधरोपण एवं स्वच्छ एवं गंदा पानी का जलजमाव को समाप्त कर हम डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारी से अपना बचाव कर सकते हैं। याद रखें, मादा एडिस मच्छर घर के अंधेरे व नमी वाले कमरे में ही रहते हैं। घर में भी अलग-अलग कूड़ा अलग-अलग डिब्बे में रखें। मॉस्क्विटो रिप्लेंट एवं अगरबत्ती का इस्तेमाल छोड़ दें। साथ ही नगर निगम को भी अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।

वरीय फिजिशियन डॉ. विनय कुमार झा ने कहा कि मच्छरों के पनपने वाले कारकों को समाप्त करें। गंदा हो या साफ पानी, दोनों का जमाव घर एवं आसपास कहीं न होने दें। याद रखें हर बुखार मतलब डेंगू-मलेरिया नहीं होता है। बीते एक दशक में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप भागलपुर शहर में बढ़ा है। फागिंग से सिर्फ मच्छरों का प्रकोप कम होगा लेकिन मच्छरों को प्रजनन से लेकर पनपने के कारणों को समाप्त करके ही हम मच्छरजनित बीमारियों का उन्मूलन कर सकते हैं। जिला शांति समिति के सदस्य नेजाहत अंसारी ने कहा कि देश आजाद तो हो गया लेकिन अफसरशाही का गुलाम अभी भी है। इनकी इसी सोच के कारण आज शहर में गंदगी व जलजमाव का साम्राज्य है। यही सोच हमारे अंदर भी पनप चुकी है। अब हमें मच्छर को टक्कर देना है तो अपने दिल-ओ-दिमाग में स्वच्छता का भाव पैदा करना होगा। 

लोगों की प्रतिक्रिया
मच्छरदानी का प्रयोग, जलजमाव को न होने देने, पूरी बांह के कपड़े पहनें तो हम डेंगू की बीमारी से अपना बचाव कर सकते हैं। इसके अलावा अपने घर या फिर बाहर कहीं भी जलजमाव नहीं होने दें। अभी फौरी तौर पर नगर निगम को युद्धस्तर पर सफाई एवं फागिंग अभियान चलाना चाहिए।  -डॉ. विनय कुमार झा, वरीय फिजिशियन
 
डॉक्टर अपने क्लीनिक व अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल कचरे का निस्तारण सिनर्जी कंपनी के जरिये कराते हैं। बावजूद अगर कूड़ा दिखे तो इसकी शिकायत नगर निगम से करें। नगर निगम को नियमित कूड़ा उठाव व फागिंग करानी होगी। साथ ही लोग जागरूक भी हों।  -डॉ. प्रखर उपाध्याय, कान, नाक व गला रोग विशेषज्ञ
 
शहर में जहां कहीं कूड़े का ढेर पड़ा होता है, वहां पर आवारा पशु व सुअर पहुंच जाते हैं। इसके बाद यहीं कूड़ा बदबू व मच्छरों के पनपने का कारण बनता है। इन पर नियंत्रण कर शहर को नाली जाम व कूड़े से निजात दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम की है।   -सुनील कुमार तिवारी, अध्यक्ष, संगीत विभाग, एसएम कॉलेज 

 कचरा हम ही फैलाते हैं और हमारे द्वारा फेके गए प्लास्टिक से ही नालियां जाम होती हैं और मच्छर पनपते हैं। हमें खुद में सुधार करना होगा तभी भागलपुर स्मार्ट शहर बन पाएगा। इसके लिए निगम को आगे आना होगा।  -अंकुर कुमार, छात्र
 
शहर जैसे-जैसे आधुनिकता के रंग में रंगता गया, वैसे-वैसे मच्छरजनित बीमारी के फैलने की समस्या बढ़ती गयी। जलजमाव को रोकने के लिए हमें प्रयास करना होगा। हम-आप आगे बढ़ें ताकि हम अपने समाज को साफ-सुथरा कर सकें।  -चेतन चौबे, सूफी गायक
 
मच्छरों की समस्या के लिए हम ही जिम्मेदार हैं। हम अलग-अलग कूड़ा रखें तो निगम इसका निस्तारण भी करे। लोगों में जागरूकता फैलानी होगी तभी हम मच्छरजनित बीमारी मुक्त समाज का निर्माण कर सकेंगे।  - जय कृष्ण कुमार, प्रदेश प्रभारी, मिशन 100 करोड़ वृक्ष

आज बड़े से लेकर छोटे तबके में पाने की लालसा तो बढ़ी लेकिन जिम्मेदारी निभाने की भावना हम भूल गये। बाहर हम सफाई करते भी हैं तो सिर्फ छपास के लिए। जहां-जहां ढलाव वाली सड़कें हैं, वहां जलजमाव व गंदगी है। इस पर ध्यान देना होगा।  -जयंत जलद, पूर्व पुस्तकालय प्रभारी, टीएमबीयू

सप्ताह में कम से कम एक बार सभी लोगों को मिलकर 15 मिनट तक सफाई करने का अभियान चलाना चाहिए। स्मार्ट सिटी योजना से नगर निगम को नहीं जोड़ा गया। इससे करोड़ों रुपये रहने के बावजूद शहर स्मार्ट बनने के बजाय बीमारियों का गढ़ बन गया है। - नेजाहत अंसारी, सदस्य, जिला शांति समिति
 
नगर निगम पर पूरी जिम्मेदारी थोप देना ठीक नहीं। हमें भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास करना होगा। नगर निगम जहां अधिक कूड़ा हो वहां पर नियमित सफाई कराए और नियमित अंतराल पर हरेक वार्ड में घर-घर फागिंग कराए।  -साहेब कुमार, छात्र
 
दो दशक पहले तक शहर में नियमित छिड़काव व फागिंग करया जाता था, लेकिन अब नगर निगम ऐसा नहीं करता। निगम प्रशासन को नियमित सफाई, नालों की उड़ाही व निर्धारित डंपिग स्थल पर ही कूड़ा गिराने की व्यवस्था करनी चाहिए।   -राजकुमार प्रसून, सदस्य, जिला परिषद सदस्य
 

पढ़ने के लिए गांव से शहर आने वाले बच्चों को अब साइनस, श्वसन तंत्र, डेंगू-मलेरिया की बीमारी हो रही है। शहर की तरह गांव की सेहत न बिगड़े, इसके लिए नगर निगम को युद्धस्तर पर कूड़ा उठाव, कचरा निष्पादन, नालियों की सफाई व फागिंग करानी होगी।  -डॉ. रविशंकर, सदस्य, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ
 

निगम की गंदगी अब गांवों तक पहुंचने लगी है। दो गच्छी, जहां पहले हरियाली रहती थी, अब वहां कूड़े का ढेर है। गांव देश की आत्मा होती है, अगर गांव साफ-सुथरा नहीं होगा तो देश कैसे साफ-सुथरा होगा। हरेक को मिल-जुलकर आगे आना होगा।  -डॉ. चंदन कुमार, शिक्षक
 
भागलपुर तभी स्मार्ट होगा जब हमारी सोच स्मार्ट होगी। अपने घर की तरह अपने शहर को भी साफ-सुथरा रखें। प्लास्टिक का प्रयोग न करें और नालियों की नियमित सफाई हो तो शहर में मच्छरजनित बीमारियों पर लगाम लग सकेगा।  - डॉ. संजीव कुमार, उपाध्यक्ष, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ, सदर अनुमंडल
 
नगर निगम भागलपुर सिर्फ राजनीतिक अखाड़ा बनकर रह गया। महात्मा गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी का स्वच्छता पर जोर लेकिन नगर निगम सोया हुआ है। रात्रिकालीन सफाई हो और टायलेट का पाइप नाले में गिराने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए। -रोशन सिंह, प्रवक्ता, भाजपा

कचरे का सबसे बड़ा स्रोत प्लास्टिक है, सरकार को इसके उत्पादन पर ही प्रतिबंध लगा देना चाहिए। कचरा उठाव के साथ कचरे का रिसाइकल होना भी जरूरी। मच्छर को टक्कर को लेकर सरकार व नगर निगम को जगना होगा।   -राजीव कुमार राय, शिक्षक
 
हम सभी को मच्छरजनित बीमारियों को लेकर जागरूक होना होगा। हमारा शहर स्मार्ट सिटी के बजाय गंदा शहर बन गया है। जगह-जगह पड़े कूड़े के ढेर, जाम नालियों व जलजमाव के कारण हमारा शहर डेंगू का गढ़ बन गया है।  -तरुण कुमार राय, नागरिक, विवेकानंद कॉलोनी, सराय
 
शहर में चारों स्तंभ निष्प्रभावी रूप से पड़े हुए हैं। गंदगी, जलजमाव व जाम नालियों के खिलाफ अखबारों को सिरीज चलानी चाहिए। नगर निगम  की निष्प्रभावी भूमिका के खिलाफ हम सभी को एकजुट होकर आंदोलन करना होगा।  -महेंद्र मयंक, संस्थापक, उद्घोष संस्था
 
निगम पर दोषारोपण करने के बजाय हम अपनी जिम्मेदारी समझें। घर की तरह हमें बाहर को साफ-सुथरा रखना होगा। नगर निगम को राजनीति से फुर्सत नहीं है। ऐसे में शहर को मच्छरमुक्त करने के लिए हमें आगे आना होगा। -गौतम सुमन, केंद्रीय अध्यक्ष, अंग उत्थान आंदोलन समिति बिहार-झारखंड
 

मुहर्रम का पर्व बीता लेकिन निगम ने कहीं भी सफाई नहीं करायी। शहर में कूड़े का अंबार लगा है। उर्दू बाजार से गुजरने वाले नाले की सफाई नहीं हुई। रामसर में सुअरों का अड्डा बना है। निगम को अपनी भूमिका निभाते हुए शहर को साफ रखना होगा।  -भगवान यादव, सदस्य, जिला शांति समिति
 
मच्छरों के प्रकोप का कारण नालियों की नियमित सफाई व फागिंग न कराया जाना है। जबकि मलेरिया विभाग पहले डीडीटी का छिड़काव करता था। विक्रमशिला कॉलोनी के बाहर रखे बड़े कूड़ेदान से नियमित कूड़ा उठाव न होने से इसके आसपास कूड़े का ढेर लगा है।  -जयनंदन आचार्य, संरक्षक, दुर्गा पूजा समिति
 
मृत जानवरों का चमड़ा उतारकर उसे बूढ़ानाथ नदी के किनारे फेक दिया जाता है। खुले में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगे। निगम को इनके अलावा नियमित कूड़ा उठाव, फागिंग व नालियों की सफाई करानी चाहिए।   -अनुमेह मिश्र, संगीत अध्यापक
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:machar ko takkar: awareness campaign of hindustan against dengue