कहीं मेस में कोयले और लकड़ी का सहारा तो कहीं रेट बढ़ाना बनी मजबूरी
फोटो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र मेस के खाने पर रहते हैं निर्भर

भागलपुर, वरीय संवाददाता। बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था की वजह से भागलपुर शहर के कई मोहल्लों में आसपास के जिलों के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यहां रहते हैं। जहां रहने के लिए लॉज और खानपान के लिए खुद खाना बनाने या मेस पर निर्भर रहते हैं। पर विगत कुछ सप्ताह से एलपीजी आपूर्ति की समस्या को लेकर अब इसका सीधा असर इन छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। कहीं मेस में खाने की क्वालिटी गिर गई है तो कहीं खाने के आइटम कम हो गए हैं। वहीं जो छात्र छोटे सिलेंडरों को कमरे में रखकर खाना बनाते थे, उसे भराने के लिए अब ढाई गुणा ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं।
एक तरफ जहां कई मेस ने अपने मासिक दरों को बढ़ा दिया है तो कई मेस संचालकों ने जिन व्यंजन को बनाने में ज्यादा वक्त लगता था उसे अपने मेन्यू से हटा दिया है।उर्दू बाजार में मेस चलाने वाले प्रदीप कुमार ने बताया कि उनके यहां खाने का रेट काफी कम है, सामान्य वेज थाली उनके यहां 60 रुपये में ही उपलब्ध है। ऐसे में अगर वह अपने रेट को बढ़ा देते हैं तो गरीब तबके के छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में वर्तमान एलपीजी की किल्लत को लेकर उन्होंने सिलेंडर से चलने वाले चूल्हों को हटा लकड़ी और कोयला का सहारा ले रहे हैं। इसी इलाके में एक अन्य मेस चलाने वाले हेमंत कुमार ने बताया कि वह एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता उनकी मजबूरी है। छोटा मेस होने की वजह से यहां कोयला और लकड़ी का चूल्हा लगा पाना संभव नहीं है। ऐसे में किसी तरह जुगाड़ कर वह सिलेंडर मंगा रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें मेस में खाने वाले छात्र-छात्राओं के मासिक दर को बढ़ाना पड़ गया है। पूर्व में उनके यहां मासिक खाने का दर दो हजार रुपये था, उसे अब 2400 रुपये करना पड़ गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से मेस संचालकों के लिए एलपीजी की अलग से व्यवस्था कराने की मांग की, ताकि छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। बांका जिला के रहने वाले शानू कुमार और पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि पूर्व में उन लोगों को अब मेस में खाना खाने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। यहां तक कि मेस में मौजूद मेन्यू के आइटम भी कम हो गए हैं। तारापुर निवासी रितेश कुमार और मुंगेर निवासी रौशन कुमार ने बताया कि जो छोटे सिलेंडर भराने के लिए पूर्व में जहां 100 रुपये प्रति किलो देते थे, अब सिलेंडर भरने वाले उनसे 250 रुपये तक मांग रहे हैं। ऐसे में ऊंची दरों पर भी मेस में खाना उनकी मजबूरी है। उन्होंने बताया कि स्थिति अगर नहीं सुधरी तो उन्हें भागलपुर छोड़ अपने गांव जाना पड़ेगा।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


