पूर्णिया: मां की मौत का सदमा : घर से भटकी, छह वर्षों के बाद अपनों से मिली युवती
पूर्णिया में एक युवती, जिसे मां की मौत के बाद मानसिक सदमे के कारण घर से भटकना पड़ा, को छह वर्षों के बाद उसके पिता और भाई के सुपुर्द किया गया। यह पुनर्वास मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत हुआ। युवती ने अपने वास्तविक नाम का खुलासा किया और परिवार से मिलने के बाद सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

पूर्णिया से धीरज की रिपोर्ट मां की मौत के सदमे के बाद घर से भटक गयी युवती को छह वर्षों के बाद परिवार मिल गया। छह वर्षों के बाद भटकी युवती को उनके पिता और भाई को सुपुर्द कर दिया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का उद्देश्य भी सफल हुआ। समाज कल्याण विभाग के निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुपालन के आलोक में पूर्णिया जिले में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत शांति कुटीर (महिला भिक्षुक पुनर्वास गृह) द्वारा छह लंबे वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी एक युवती को उसके पिता एवं भाई के सुपुर्द कर सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया गया है।
अभिलेखों के मुताबिक यह महिला मार्च 2021 में पूर्णिया के केहाट थाना द्वारा शांति कुटीर पूर्णिया पहुँचाई गई थी। आगमन के समय महिला अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी और अपना नाम बताने की स्थिति (बोध) में नहीं थी। इस कारण संस्था द्वारा उसका एक काल्पनिक नाम 'खेजू खातून' रखा गया था। शांति कुटीर में उसे बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में रखा गया, जहाँ वह धीरे-धीरे सभी सदस्यों के साथ घुल-मिल गई। वह संस्था में रसोइया के साथ खाना बनाने में हाथ बटाती थी और सिलाई का कार्य भी करती थी। संस्था के काउंसलर द्वारा लगातार की गई प्यार भरी और गहन काउंसिलिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए। नौ जून 2026 को युवती ने आखिरकार अपना वास्तविक नाम शाहजुरुन खातून बताया और अपने घर का पता किशनगंज जिला हवाई अड्डा के रूप में दर्ज कराया। काउंसिलिंग के दौरान यह दुखद सत्य सामने आया कि शाहजुरुन खातून की मां की मृत्यु हो जाने के कारण उसे गहरा मानसिक सदमा लगा था, जिसके कारण वह मानसिक संतुलन खोकर अपने घर से निकल गई थी और भटकते हुए पूर्णिया पहुँच गई थी। पता प्राप्त होते ही स्थानीय वार्ड पार्षद से तुरंत संपर्क स्थापित किया गया। वार्ड पार्षद के सहयोग से जब युवती के पिता को अपनी बेटी के सुरक्षित होने की सूचना मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक अमरेश कुमार एवं जिला प्रबंधक उषा कुमारी को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद तुरंत परिजनों से बात कर उन्हें शांति कुटीर गृह में बुलाया गया। गृह परिसर में जैसे ही वृद्ध पिता मो सज्जाद और भाई जहाँगीर ने छह वर्षों बाद अपनी बेटी/बहन को देखा, दोनों पक्षों की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े और वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। पिता ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी। मेरी बेटी छह सालों के बाद मुझसे मिल पाई है। युवती के पिता, भाई और उनके साथ आए मामा एवं वार्ड पार्षद ने शांति कुटीर गृह के सभी सदस्यों, जिला प्रशासन एवं बिहार सरकार का धन्यवाद किया। सभी आवश्यक सरकारी व कानूनी प्रक्रियाएं पूर्ण करने के उपरांत शाहजुरुन खातून अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी किशनगंज स्थित अपने गृह निवास के लिए रवाना हुईं।
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