किशनगंज: बंदियों को किया गया जागरूक, मरीजों का लिया गया हालचाल

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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किशनगंज में स्वास्थ्य विभाग ने 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जिला कारा में जागरूकता और स्वास्थ्य जांच गतिविधि आयोजित की। इसका उद्देश्य बंदियों को टीबी और एड्स के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच कराना है। अधिकारियों ने नियमित उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी की।

किशनगंज: बंदियों को किया गया जागरूक, मरीजों का लिया गया हालचाल

किशनगंज से राकेश कुमार की रिपोर्ट टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को केवल समुदाय तक सीमित न रखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग इसे विशेष संस्थानों और संवेदनशील स्थलों तक भी विस्तार दे रहा है। इसी क्रम में 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत मंगलवार को जिला कारा किशनगंज में विशेष जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच गतिविधि आयोजित की गई। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीड़भाड़ और बंद वातावरण वाले स्थानों में रहने वाले लोग भी टीबी और एड्स जैसी बीमारियों के प्रति जागरूक हों तथा समय पर जांच और उपचार से जुड़ सकें। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम के तहत सीडीओ सह जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम एवं नंद किशोर राजा द्वारा जिला कारा पहुंचकर सभी बंदियों को टीबी एवं एड्स से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

बंदियों को बताया गया कि लगातार खांसी, बुखार, वजन में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच कराएं, क्योंकि समय पर पहचान ही टीबी नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय है।कारा के अंदर उपचाराधीन मरीजों की ली गई जानकारीकार्यक्रम के दौरान कारा के अंदर टीबी की दवा ले रहे दो मरीजों का भी स्वास्थ्य संबंधी हालचाल लिया गया। अधिकारियों ने उनके उपचार की स्थिति, दवा सेवन की नियमितता और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा यह सुनिश्चित किया कि उन्हें निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।संवेदनशील स्थानों तक अभियान का विस्तारजिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि 100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य केवल गांवों में स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे स्थानों तक पहुंचना भी है जहां संक्रमण का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा कि कारा जैसे बंद और भीड़भाड़ वाले स्थानों में टीबी के फैलने की संभावना अधिक होती है, इसलिए यहां जागरूकता और नियमित जांच बेहद जरूरी है। हमारा प्रयास है कि हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचे और कोई भी जांच या उपचार से वंचित न रहे।समय पर जांच और उपचार से ही संभव है नियंत्रणसिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी और एड्स जैसी बीमारियों के नियंत्रण के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि लक्षणों की पहचान कर समय पर जांच कराई जाए और मरीज नियमित रूप से दवा ले, तो टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसी उद्देश्य से 100 दिवसीय अभियान के तहत हर वर्ग और हर स्थान तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।इस अवसर पर कारा अधीक्षक, कारा परिचारिका एवं अन्य संबंधित कर्मी भी उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि कारा के भीतर रह रहे सभी बंदियों को नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवा और जागरूकता संबंधी जानकारी समय-समय पर मिलती रहे।टीबी मुक्त भारत की दिशा में समावेशी पहलजिला कारा में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान अब व्यापक और समावेशी रूप ले चुका है। समाज के हर वर्ग, हर स्थान और हर परिस्थिति तक पहुंच बनाकर ही टीबी मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल बीमारी के नियंत्रण की दिशा में कदम है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास भी है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कहीं भी हो, स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

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