Bhagalpur News: किशनगंज: पर्युषण महापर्व में स्वाध्याय दिवस पर आत्मचिंतन का संदेश

हिन्दुस्तान, भागलपुर
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Bhagalpur News: किशनगंज, एक संवाददाता। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को किशनगंज तेरापंथ समाज

Bhagalpur News: किशनगंज: पर्युषण महापर्व में स्वाध्याय दिवस पर आत्मचिंतन का संदेश

Bhagalpur News: किशनगंज, एक संवाददाता। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को किशनगंज तेरापंथ समाज की ओर से स्वाध्याय दिवस श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में उपासक महावीर दुगड़ एवं झब्बर दुगड़ का सानिध्य रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं के साथ विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

स्वाध्याय का महत्व

प्रवचन में उपासक महावीर दुगड़ ने कहा कि जैन धर्म में स्वाध्याय का विशेष महत्व है। स्वाध्याय केवल पुस्तकों का अध्ययन नहीं, बल्कि स्वयं का अध्ययन भी है। आगमों में निहित तीर्थंकर वाणी के माध्यम से व्यक्ति को हेय, ज्ञेय और उपादेय का ज्ञान प्राप्त होता है। इसके बाद जब साधक अपने भीतर झांकता है तो उसे अपने वास्तविक स्वरूप और कर्मों का बोध होता है तथा जीवन के उद्देश्य का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में स्वाध्याय को कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। स्वयं ज्ञान अर्जित करना, दूसरों को ज्ञान देना और अर्जित ज्ञान का बार-बार वाचन करना स्वाध्याय की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे ज्ञान सुरक्षित रहता है और जीवन में उसका प्रभाव दिखाई देता है। तेरापंथ धर्मसंघ में इस वर्ष स्वाध्याय दिवस का विशेष महत्व है। आचार्य महाश्रमण की प्रेरणा से वर्ष 2026 को योगक्षेम वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। योगक्षेम वर्ष का उद्देश्य पूर्व अर्जित ज्ञान संपदा को सुरक्षित रखना और वर्तमान चतुर्विध धर्मसंघ में ज्ञान का विकास करना है। यह पूरी प्रक्रिया स्वाध्याय के बिना संभव नहीं है।

आत्मचिंतन का महत्व

इस अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं ने आगम, तत्त्वज्ञान और जैन साहित्य का स्वाध्याय कर आत्मचिंतन की ओर कदम बढ़ाया। उपासक द्वय ने सहज भाषा में स्वाध्याय को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह आचरण में दिखाई दे और जीवन में संयम, विवेक, विनय एवं आत्मजागृति का निर्माण करे।

प्रेरणादायक संदेश

कार्यक्रम के दौरान वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत रहा। स्वाध्याय दिवस ने यह संदेश दिया कि संसार को जानने से पहले स्वयं को जानना आवश्यक है। बाहरी ज्ञान संसार का परिचय कराता है, जबकि स्वाध्याय व्यक्ति को उसकी आत्मा से परिचित कराता है।

सामान्य प्रश्न

✦स्वाध्याय दिवस कब मनाया गया?−
स्वाध्याय दिवस पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को मनाया गया।
Hindustan | Bureau

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