
कटिहार: बरेटा कार्तिक मंदिर में पूजा से मनोकामना होती है पूर्ण
संक्षेप: फलका प्रखंड के सोहथा उत्तरी पंचायत में बरेटा कार्तिक मंदिर की स्थापना 38 वर्ष पूर्व हुई थी। यह मंदिर क्षेत्र का एकमात्र है और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां भव्य मेला और 24 प्रहर हरिनाम कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालु दूर-दूर से पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
फलका। एक संवाददाता फलका प्रखंड के सोहथा उत्तरी पंचायत के बरेटा कार्तिक मंदिर की महिमा अपरंपार है।करीब 38 वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना ग्रामीणों ने की थी।क्षेत्र का एकमात्र मंदिर होने के कारण लोगों का असीम श्रद्धा व आस्था जुड़ा है।मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु मन्नते मांगते हैं उनकी मुरादे अवश्य पूरी होती है।इस मंदिर में प्रखंड व आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में भक्तजन पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।यह मंदिर पूर्व में फूस की झोपड़ी में था बाद में ग्रामीणों के सहयोग से आकर्षक मंदिर का निर्माण कराया गया।यहां वैदिक पद्धति से पूजा-अर्चना की जाती है।मालूम

हो कि कार्तिक मंदिर स्टेट हाइवे-77 सड़क के बगल में होने से काफी महत्व बढ़ जाती है।श्रद्धालुओं में इस मंदिर को लेकर बड़ी मान्यता है।इस होकर जो भी वाहन गुजरते हैं वाहन चालक वाहन रोक कर भगवान कार्तिक का दर्शन अवश्य करते हैं।मेला में चाट,चौमिंग,खिलौनों की दुकानें व झूला बच्चों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर भव्य मेले के साथ-साथ 24 प्रहर हरिनाम कीर्तन का भी आयोजन किया गया है।इस मंदिर का एक अनूठा इतिहास है।मंदिर अपने आप में एक प्राचीन ऐतिहासिकता समेटे हुए है।मंदिर में शुरुआत से ही काफी भीड़ लगती है।दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।मेला अध्यक्ष प्रकाश मंडल,कोषाध्यक्ष ब्रह्मदेव मंडल,सहदेव मंडल,बबलू यादव,वरुण मिस्त्री,श्रवण मंडल, शैलेन्द्र यादव,अर्जुन मंडल आदि ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।इस दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो इसके लिए मेला कमिटी के सदस्य हमेशा त्तपर रहते हैं।

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