
जमुई: भाई की लंबी आयु के लिए बहनों ने की कर्मा पूजा, रखा निर्जला उपवास
चंद्रमंडीह में कर्मा पर्व धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति की पूजा का प्रतीक है। बहनें अपने भाइयों की खुशहाली के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और पारंपरिक गीत गाकर नाचती हैं।...
चंद्रमंडीह। आस्था एवं विश्वास का प्रतीक कर्मा पर्व बड़े हैं धूम धाम से मनाया गया । कर्मा की पारम्परिक गीतों से झूम उठा शहर से लेकर सुदूरवर्ती गांव। बहनों द्वारा भाइयों की मंगल कामना को लेकर किया जाने वाला कर्मा त्योहार चकई प्रखंड में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । भादो महीने के शुक्लपक्ष की एकादसी को पद्म एकादसी के नाम से जाना जाता है जिसे कर्मा एकादसी भी कहते हैं । यह पर्व भाई बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति ।पूजन का प्रतीक है । भाई और बहन के रिश्ते में प्रेम व सौहार्द बढ़ाने के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है ।
बहने अपने ससुराल से भाई के घर आकर भाई की समृद्धि एवं खुशहाली के लिए इस दिन निर्जला उपवास भी रखती है ।कर्मा त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नही है बल्कि यह मानव और प्रकृति के गहरे संबद्ध , कृषि से जुड़े कार्यो एवं परिवारिक रिश्तों की मनबूती का भी प्रतीक है ।इस दिन भाई अपने बहनों को कदम पेड़ की डाल लाकर बहनों को देता है जिसे बहनों द्वारा पारम्परिक रीति रिवाज से आंगन में लगाकर पूरे विधि विधान से पूजा करती हैं , एवं अपने भाइयों की सुख समृद्धि को लेकर कामना करती है तथा रात भर जागरण कर पारम्परिक गीत गा गा कर नाचती झूमती है।

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