
जिऊतिया व्रत 14 को, 15 को होगा पारण
पूर्णिया में जीमूतवाहन और जीवित्पुत्रिका व्रत (जिऊतिया व्रत) 14 सितम्बर को मनाया जाएगा। इस दिन माताएँ निर्जला उपवास करेंगी और भगवान विष्णु एवं माता जीमूतवाहन की पूजा करेंगी। यह व्रत संतान की दीर्घायु...
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। जीमूतवाहन एवं जीवित्पुत्रिका व्रत (जिऊतिया व्रत) 14 सितम्बर को मनाया जाएगा। इस संबंध में पंडित वंशीधर झा ने बताया कि जिऊतिया व्रत का ओठगन 14 सितम्बर सुबह 4.32 तक किया जाएगा। ओठगन के साथ ही 26 घंटे का निर्जला व्रत का शुरू हो जायेगा। इसी दिन जीमूतवाहन, जीवित्पुत्रिका व्रत (जिऊतिया) एवं महालक्ष्मी व्रत मनाया जाएगा। दूसरे दिन 15 सितम्बर को सुबह 6.40 के बाद पारण किया जाएगा। पारण के साथ ही लगातार 26 घंटे भूखे प्यासे निराहार निर्जला व्रत का समापन हो जायेगा। यह पर्व माता अपने बच्चों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की मंगलकामना के लिए करती हैं।

यह व्रत खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में श्रद्धा से किया जाता है। -कथा संक्षेप: इस व्रत का संबंध जीमूतवाहन नामक राजकुमार से है, जिन्होंने नाग जाति की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनकी निःस्वार्थ त्याग भावना के कारण ही यह व्रत जीमूतवाहन व्रत कहलाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से संतान पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं और उन्हें लंबी आयु प्राप्त होती है। -व्रत की विधि: -माताएँ इस दिन निर्जला उपवास करती हैं। सुबह स्नान करके भगवान विष्णु, माता जीमूतवाहन व अपने इष्टदेव की पूजा करती हैं। व्रती महिलाएँ पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करतीं और संतान की सुख समृद्धि शांति लंबी आयु की मंगलकामना करती हैं। अगले दिन प्रातः पारण करके व्रत पूर्ण होता है। -विशेष महत्व: -यह व्रत मातृशक्ति की अटूट आस्था और संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




