बोले जमुई : सहेज न सके रेलवे कॉलोनी के संसाधन, उपेक्षा के शिकार
झाझा रेलवे स्टेशन हावड़ा–डीडीयू रेलखंड पर एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हालांकि, रेलवे कॉलोनी के क्वार्टरों की स्थिति खराब है, जिसमें सफाई, बिजली और चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। रेलकर्मी और उनके परिवार...

प्रस्तुति: अरुण बोहरा
मेनलाइन हावड़ा–डीडीयू रेलखंड पर स्थित झाझा एक अहम रेलवे केंद्र है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में रेलनगरी के रूप में बसाया गया यह स्टेशन आज भी पूर्व रेलवे कोलकाता और पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर जोनों की सीमा रेखा व बफर स्टेशन की हैसियत रखता है। यहां स्थापित मेमू कार शेड में पूरे जोन की ट्रेनों का मेंटेनेंस होता है। सैकड़ों चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से लेकर मंडल स्तरीय अफसर तक यहां पदस्थापित हैं। उनके आवास के लिए बड़ी रेलवे कॉलोनी और सैकड़ों क्वार्टर बनाए गए हैं। लेकिन रेलकर्मियों का कहना है कि क्वार्टरों की स्थिति जर्जर है। छत टपकने से लेकर पानी निकासी व साफ-सफाई तक की समस्या आम हो चुकी है।
हावड़ा-पटना मेनलाइन पर स्थित झाझा रेलवे का एक अहम और रणनीतिक मुकाम है। ब्रिटिश शासन काल में इस रेलनगरी की स्थापना एक सोच-समझी रणनीति के तहत की गई थी। लगभग हावड़ा और डीडीयू के मध्य स्थित यह स्टेशन तब पूर्व रेलवे का हिस्सा था, जबकि वर्तमान में यह पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के दानापुर मंडल का अंग है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि झाझा उस बिंदु पर स्थित है जहां पूर्व रेलवे (ईआर) और ईसीआर की सीमाएं मिलती हैं। इस कारण यह न केवल एक बफर स्टेशन की हैसियत रखता है, बल्कि रेल परिचालन की दृष्टि से आज भी इसका रणनीतिक महत्व है।
फिरंगी शासन काल में जब ट्रेनों का परिचालन भाप इंजन से होता था, तब यहां स्टीम लोको शेड स्थापित किया गया। उस दौर में परिचालन से जुड़ा हर बदलाव यहीं होता था। मालगाड़ियां ही नहीं, बल्कि कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लोको पायलट एवं ट्रेन मैनेजर का बदलना आज भी झाझा में ही होता है। इतिहास और महत्व के बावजूद झाझा रेलनगरी आज उपेक्षा और उदासीनता का शिकार है। कई व्यवसायिक और सामाजिक संगठन यह आरोप लगाते आए हैं कि हाल के वर्षों में रेलवे का यह प्रमुख केंद्र धीरे-धीरे संसाधनविहीन और जर्जर होता जा रहा है। रेलकर्मी और उनके संगठन भी इसे स्वीकार करते हैं। रेल कॉलोनी में बने सैकड़ों क्वार्टर अब जर्जर हो चुके हैं। कई में दीवार और फर्श टूटी हुई है तो कई के दरवाजे-खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के मौसम में इनकी स्थिति और खराब हो जाती है। कर्मियों का कहना है कि अधिकांश क्वार्टर आवास योग्य नहीं रह गए हैं। शिकायत यह भी है कि कई क्वार्टरों पर असामाजिक तत्वों का कब्जा है। रेल कॉलोनी की सड़कें बदहाल हैं। न तो ठीक से मरम्मत होती है और न ही जलनिकासी की व्यवस्था है। कर्मियों और उनके परिवारों के लिए न कोई पार्क है और न ही बच्चों के खेलने की पर्याप्त सुविधा। स्टेशन पर ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों को अपने निजी वाहनों की पार्किंग तक की समस्या झेलनी पड़ती है। रेल नगरी में मौजूद चांदवारी ग्राउंड रेलवे का ही खेल मैदान है, जो कभी खिलाड़ियों की नर्सरी माना जाता था। लेकिन आज यह भी टूटी चहारदीवारी और रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। बच्चों और खिलाड़ियों को मैदान में प्रैक्टिस करने में कठिनाइयां आती हैं।
न महिला चिकित्सक उपलब्ध है, न नर्स, मरीज बेहाल
रेलकर्मी और उनके परिवारों की सबसे बड़ी शिकायत चिकित्सा सुविधा को लेकर है। कभी झाझा में सुसज्जित रेलवे अस्पताल हुआ करता था, जहां पर्याप्त डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ रहते थे। लेकिन समय के साथ यह अस्पताल पहले पॉलीक्लिनिक और अब महज एक हेल्थ यूनिट तक सीमित होकर रह गया है। यहां न महिला चिकित्सक उपलब्ध है, न नर्स। न दंत चिकित्सक है और न एक्स-रे मशीन। पहले से मौजूद उपकरण भी बंद पड़े हैं। मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर न तो समय पर रेफरल मिलता है और न ही एंबुलेंस तक उपलब्ध कराई जाती है।
सुनें हमारी बात
बिजली की परेशानी है। शिकायतों को लेकर कई बार आवेदन दिए, पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। इसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-आरिफ अंसारी, कर्मी, मेमू शेड
बिजली वायरिंग की स्थिति बदहाल है, यह खतरे का सबब बना है। हमलोग समस्याओं से घिरे हुए हैं, लेकिन हमारी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है।
-प्रवीण सिंह, रेलकर्मी
साफ-सफाई की स्थिति काफी बदतर है। गंदगी से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और बीमारी की भी संभावना बनी रहती है। जिम्मेदार ध्यान दें।
-श्यामजी ठाकुर, रेलकर्मी
प्राय: सभी क्वार्टरों का हाल बदहाल है, इन्हें नए सिरे से बनाए जाने की जरूरत है। अन्यथा लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इससे जान का खतरा है।
-जयप्रकाश नारायण, टेक्निशियन, मेमू शेड
क्वार्टरों की स्थिति खस्ताहाल है। वहीं मरम्मत कार्य शून्य है। ऐसे में आवासन परेशानी का सबब बना है। परिवार और बच्चे डर के साए में जी रहेेे हैं।
-शत्रुघ्न प्रसाद, टेक्निशियन, मेमू शेड
झाझा रेलवे का एक काफ महत्वपूर्ण मुकाम है। किंतु यहां के रेलवे तालाब, चांदवारी ग्राउंड, रेलवे रोड आदि काफी बदहाल स्थिति में है। खाली भूखंडों पर मार्केट बने।
-गौरव सिंह
झाझा में रेलवे क्वार्टरों से रेलवे कॉलोनी तक का बुरा हाल है। कई बार वरीय अधिकारियों को ज्ञापन देने के बाद भी इनकी सूरत नहीं सुधरी है। हमलोग परेशान हैं। -परवेज आलम
रेलवे तालाबों का कभी मेंटेनेंस नहीं होता है। कूड़े-कचरे व गंदगी की वजह से यह प्रदूषण का केंद्र बना है जिससे आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-राज कुमार गुप्ता
सड़कों से आम झाझावासियों से लेकर स्कूली बच्चे तक भी आवाजाही करते हैं। सड़क की खस्ताहाली से सबको रोजमर्रा तौर पर परेशानी होती है।
-पंकज साह
क्वार्टरों की बदहाली का संज्ञान लेने व रेलनगरी के सौंदर्यीकरण को ले मैनें न्यायालय में भी अभ्यावेदन दिया है। जिससे की समस्या का समाधान हो।
-नीतीश कुमार, एआई साइंटिस्ट
रेलवे कॉलोनी की सड़क व क्वार्टरों की स्थिति असंतोषजनक है। नालों की भी समुचित सफाई नहीं होती है। इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
-शिव कुमार
रेलवे चांदवारी ग्राउंड,तालाब एवं रेलवे रोड बदहाली की शिकार है। रेल अधिकारियों से आग्रह है की इनका संज्ञान लेते हुए इनका कायाकल्प कराएं।
-राजकुमार चंद्रवंशी
रेलवे की सड़कें, मैदान, तालाब आदि सभी काफी खस्ताहाली में है। अधिकारियों को इसका कायाकल्प कराना चाहिए।
-दयाशंकर प्रसाद
रेल प्रशासन से आग्रह है कि झाझा रेलनगरी को उसका पुराना गौरव लौटाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। यहां रेलवे के लगभग सभी संसाधन बदहाली के शिकार हैं। -सुरेश कुमार यादव
झाझा के रेलकर्मियों व उनके परिजनों को समुचित चिकित्सा सुविधा के अभाव से ले क्वार्टर व खेल मैदान की बदहाली आदि को ले परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है। -राजेश सिन्हा
रेलवे क्वार्टर एवं कॉलोनी के नियमित रखरखाव को समुचित मैकेनिज्म एवं अलग से समुचित फंड का आवंटन हो। शिकायतों की मॉनिटरिंग को नोडल अफसर हो।
-इस्तियाक अहमद
बोले िजम्मेदार
टाइप-1 क्वार्टरों में कार्य जारी है। फंड की कोई कमी नहीं है। बरसात के बाद टाइप 2 से 4 तक के क्वार्टरों की छत लिकेज की समस्या दूर करने समेत किचन में टाइल्स पाथवे आदि सभी सुविधाओं का कार्य तीव्र गति से कराते हुए साल भर में सभी क्वार्टर दुरुस्त करा दिए जाएंगे। एफआईसी कॉलोनी, चांदवारी मैदान क्रॉस रोड आदि तीन-चार सड़कों को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
-ओमप्रकाश, वरीय अनुभाग अभियंता,रेलवे कार्य विभाग, झाझा
शिकायत
1. रेलवे क्वार्टरों की बदहाली की वजह से रेलकर्मी परेशान।
2. जिम्मेदार अधिकारी न शिकायतों का संज्ञान लेते, न ही परेशानी दूर कराने की पहल करते हैं।
3. रेलवे कॉलोनी में कर्मियों से आए दिन हो रही छिनतई की घटना।
4. समुचित चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से बढ़ रहा आर्थिक बोझ।
7. रेलकर्मियों के लिए स्टेशन परिसर में वाहनों की पार्किंग नहीं।
सुझाव
1. रेलवे क्वार्टरों का तत्काल जीर्णोद्धार कराया जाए।
2. जो क्वार्टर काफी खस्ताहाल स्थिति में है, उन्हें तोड़कर नवनिर्माण कराया जाए।
3. कॉलोनी की सभी सड़कों की गुणवत्तापूर्ण ढंग से मरम्मत हो।
4. कॉलोनी में सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए जाएं।
5. रेलवे स्टेशन क्लब एवं इंडियन इंस्टीट्यूट का कायाकल्प हो।
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