
बोले जमुई : 30 जगहों पर शुरू नहीं हुई लिफ्ट सिंचाई योजना
राजीव कौशिक प्रखंड में सिंचाई साधनों की कमी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। लघु सिंचाई विभाग ने पिछले साल कई योजनाओं का निर्माण किया, लेकिन बंद पड़ी लिफ्ट एरिगेशन योजनाओं की हालत खराब है। किसानों का कहना है कि यदि इन योजनाओं को चालू किया जाए तो हजारों एकड़ भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल सकती है।
प्रस्तुति: राजीव कौशिक
प्रखंड में सिंचाई साधनों की कमी यहां के किसानों के लिए आज भी परेशानी का सबब बना हुआ है। वैसे तो किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बीते साल बड़ी संख्या में आहरों के बांध का सुदृढ़ीकरण एवं जीर्णोद्धार का कार्य लघु सिंचाई विभाग के द्वारा शुरू कराया गया है। लेकिन चार दशक पूर्व प्रखंड में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा खेतों में हरियाली लाकर किसानों के घर खुशहाली लाने के उद्देश्य से प्रखंड में बनाए गये लिफ्ट एरिगेशन योजना जो खराब पड़े हुए हैं उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सिंचाई के साधन नहीं रहने से यहां के किसान वर्षा पर आश्रित रहकर खेती करने को विवश हैं। वर्ष 1980-85 के बीच किसानों को सुखाड़ से बचाने के उद्देश्य से प्रखंड में डीपीएपी स्कीम शुरू की गई थी। इसी पठारी प्रखंड के किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यहां की नदियों का पानी उलीचकर आसपास के खेतों तक पहुंचाने की योजना बनायी गई। इसके तहत लघु सिंचाई विभाग द्वारा चकाई प्रखंड में तीस लिफ्ट एरिगेशन योजना का निर्माण कराया गया। आज ये सभी योजनाएं बेकार बनी हुई है। बताया जाता है कि इनमें दस लिफ्ट एरिगेशन योजना तो ठीक से पूरी भी नहीं हो पाई थी। जो योजना पूर्ण भी हुई तो कोई कुछ वर्ष तो कोई अपने शूरूआती वर्ष में ही बंद हो गए। बताया जाता है कि विद्युत आपूर्ति में बाधा ने इस योजना की हवा निकाल दी। एक दशक तक इस प्रखंड में बिजली नहीं थी। बिजली आई तो इस लंबे अंतराल में यह योजना पूरी तरह बदहाल हो गई। यहां के किसान मुरलीधर तिवारी, दानीशंकर राय, दिनेश राम, राजेन्द्र सिंह, सुनील सिह, गोपाल यादव आदि का कहना है कि अगर इन बंद पड़े लिफ्ट एरिगेशन को चालू करवा दिया जाय जाए तो इस पठारी प्रखंड के हजारों एकड़ भूमि को पटवन की सुविधा मिलेगी। सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से इन हजारों एकड़ भूमि में सालों भर फसल लहलहाती और यहां के किसान भी बेबसी का जीवन जीने की बजाय खुशहाली का जीवन बसर कर पाते।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1980 से 1985 के बीच लघु सिंचाई विभाग द्वारा सरौन, घुठिया, पकरी, रायचोर, रंगोनियां, बेला, ठाढ़ी, माधोपुर, मालदहडीह, दल्लोडीह, बौने, बाबुडीह, विराजपुर, रामचन्द्रडीह, दिरंगी, नारोडीह, पड़रिया, नावाडीह, सिल्फरी, घटयारी, महतोडीह, जमुनी, लेदवारा, गदहरा, गरभूडीह, गगनपुर, बोंगी, गादी, मधुपुर और दखिनबारीडीह जैसे क्षेत्रों में उदवह सिंचाई योजनाओं का निर्माण कराया गया था। हैरानी की बात यह है कि इनमें से बौने, दल्लोडीह, बाबूडीह, कननी, घुठिया, गगनपुर, बोंगी, गादी, मधुपुर और दखिनाकियारीडीह जैसी योजनाएं तो लाखों खर्च के बावजूद कभी चालू ही नहीं हो सकीं। जो शुरू में चली भी थीं, वे अब विद्युत दोष और मरम्मत न होने के कारण खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं।
100 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलती
रामचंद्रडीह पंचायत के नारोडीह गांव के किसान जयदेव राय, पावरीत राय, शिवसागर राय, मुरारी राउत, बिहारी सिंह आदि ने बताया की वर्ष 1985 में गांव में लिफ्ट एरिगेशन योजना का निर्माण कराया गया। इसके लिए अजय नदी में कुआं बनाया। उससे थोड़ी दूरी पर बहियार में मशीन एवं गार्ड रूम बनाया गया। पूरे गांव में पाइप बिछाया गया। योजना बनने के एक दो साल योजना चालू रहा। उसके बाद प्रखंड में बिजली बाधित होने के बाद योजना बंद हो गया। इससे गांव एवं आसपास के 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलती। ग्रामीणों ने कहा कि नारोडीह में एरिगेशन के लिए गाड़ा गया पाइप पूरी सुरक्षित है। प्रखंड में बिजली की व्यवस्था भी ठीक हो गई है। बनाए गए कुआं की सफाई कराकर एवं मशीन लगाकर पुन: इस योजना को चालू कर दिया जाय तो सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो जाए।
शिकायत
1. लिफ्ट एरिगेशन योजना वर्षों से बंद हैं, लेकिन उनको चालू नहीं किया जा रहा है।किसानों के सामने सिंचाई की समस्या बरकरार है।
2. देखरेख के आभाव में यह योजना अब पहचान खोने के कगार पर पहुंच गई है। इसके बंद रहने से सिंचाई के लिए खेतों तक नहीं पहुंच रहा है।
3. सिंचाई की व्यवस्था नहीं रहने से फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। किसानों को फसल उपजाने में अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है।
4. समय पर बारिश नहीं होने से निजी साधनों से सिंचाई करने पर लागत बढ़ रही है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
5. लघु सिंचाई विभाग का प्रखंड में कार्यालयस्थापित किया जाए।
सुझाव
1. सभी खराब लिफ्ट एरिगेशन योजनाओं की तत्काल तकनीकी जांच कर चरणबद्ध मरम्मत की जाए और इसे फिर से चालू की जाए
2. इस योजनाओं के नियमित रख-रखाव के लिए अलग बजट और समयबद्ध योजना बने। ताकि समय पर मरम्मत कार्य हो सके
3. ग्राम पंचायतों को एरिगेशन योजनाओं की देख-रेख की जिम्मेदारी दी जाय एवं तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
4. किसानों की भागीदारी से लिफ्ट एरिगेशन के संचालन और निगरानी की स्थानीय व्यवस्था विकसित की जाए।
5. लघु सिंचाई विभाग में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए।
नलकूप चालू न होने से खेतों में समय पर पानी नहीं मिलता। इससे फसल प्रभावित होती है ,जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। नलकूप को चालू कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस दिशा में काम करने की जरुरत है।-पावरीत राय
सरकारी एरिगेशन योजना हमारे गांव में वर्षों से बंद पड़ा है। लिफ्ट एरिगेशन से गांव और आसपास के खेतों की सिंचाई सुविधा मिलती थी, जिससे फसल अच्छी होती थी। बंद हो जाने के बाद किसी ने भी इसे दोबार चालू करने की नहीं सोची। -शिवसागर राय
नदी या अन्य जलस्रोतों से सिंचाई की व्यवस्था करने में ज्यादा खर्च करना पड़ता है। छोटे किसान के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। सरकार बंद पड़े एरिगेशन की योजना को चालु कर पुन पटवन की व्यवस्था करे, ताकि किसानों को मदद मिले।-अविनाश राय
चकाई प्रखंड में लिफ्ट एरिगेशन योजना आहर, पोखरों से ज्यादा कारगर है। इससे उंचाई वाले क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा में आसानी होती है। लेकिन यह योजना लंबे समय से बेकार पड़े हैं। इससे पुन: चालू कराने की जरूरत है।-जयदेव राय
सिंचाई के लिए खेत तक पानी नहीं पहुंचता है। सिंचाई की समस्या के कारण अब खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। जिससे युवा अब खेती से विमुख हो रहे हैं। खेती को बचाने के लिए,सिंचाई की व्यवस्था बेहतर करना ही होगा।-धीरज कुमार निराला
हमारे क्षेत्र में नलकूप तो है, लेकिन अब वह पहचान खोने के कगार पर पहुंच गया है। सरकारी नलकूप चालू हो जाए तो हम जैसे छोटे किसानों को बहुत राहत मिलेगी, लेकिन किसानों को राहत देने के लिए कोई कहां सोचता है।-विश्वनाथ सिंह
लिफ्ट एरिगेशन के ठप होने से गांव में सिंचाई के लिए निजी साधनों पर निर्भरता बढ़ गई है। जिनके पास साधन हैं वे किसी तरह अपनी सिंचाई की जरूरत पूरा कर रहे हैं। लेकिन छोटे किसानों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है।-बमशंकर राय
रबी मौसम में सिंचाई की समस्या सबसे ज्यादा सामने आती है। गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों को निश्चित समय पर पानी चाहिए, लेकिन नलकूप बंद रहने से यह संभव नहीं हो पाता। -नंदगोपाल राय
सिंचाई को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिखता। नलकूप वर्षों से खराब हैं, फिर भी उनकी सुध नहीं ली जा रही। किसान उपेक्षित महसूस कर रहा है। -अरविंद कुमार राय
सिंचाई संकट का असर केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव परिवार की जिंदगी पर पड़ता है। खेती से आमदनी घटने के कारण बच्चों की पढ़ाई, दवा और घरेलू खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है। -अजय राय
खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती जा रही है। बारिश ठीक हुई तो फसल बच जाती है, वरना नुकसान तय है। रबी फसल के लिए नलकूप जैसी स्थायी सिंचाई की व्यवस्था जरूरी है , फिर भी अमल नहीं होता।-सत्यदेव राय
कई बार पैसे के अभाव में समय पर फसल में पानी नहीं दे पाते हैं। योजनाएं तभी सफल होंगी, जब सिंचाई की बुनियादी सुविधा सही होगी। बगैर सिंचाई व्यवस्था को ठीक किए कृषि को बेहतर नहीं किया जा सकता।-प्रदीप राय
खेती किसानी के लिए सिंचाई की सुविधा बुनियादी जरूरत है। जब सिंचाई की सुविधा ही सही नहीं होगी तब खासकर रबी फसल की खेती करना काफी मुश्किल होता है। इस दिशा में काम करें।-आलोक कुमार
नारोडीह में सिंचाई के अन्य संसाधन नहीं हैं। यहां के किसानों के लिए लिफ्ट एरिगेशन योजना काफी उपयोगी योजना थी। अब नदी से डीजल मशीन के सहारे सिंचाई काफी महंगी पड़ती है। -प्रमोद कुमार
बोले जिम्मेदार
यह लघु सिंचाई महत्वपूर्ण योजना है, जो लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इसके कारण क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में लघु सिंचाई विभाग के संबंधित पदाधिकारियों से वार्ता की जाएगी और तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर योजना को पुनः स्थापित करने की दिशा में ठोस और प्रभावी पहल की जाएगी -मनीष आनंद, बीडीओ, चकाई
चकाई के लिफ्ट ऐरिगेशन के बारे में जानकारी ली जाएगी यदि संभव होगा को उसे पुर्नबहाल करने के लिए विभाग के वरीय अधिकारी केा लिखा जाएगा। वैसे जमुई में एक लिफ्ट ऐरिगेशन शीघ्र ही कार्य करने लगेगा। चकाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा।
-पंकज कुमार, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग, चकाई

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