
जमुई: समाज और राष्ट्र की उन्नति में पुरुषों की बहुआयामी भूमिका
जमुई के केकेएम कॉलेज में बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर 'आधुनिक समाज एवं राष्ट्र के विकास में पुरुषों का योगदान' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि पुरुषों का समाज और राष्ट्र के विकास में बहुआयामी योगदान होता है। विभिन्न दिवसों का महत्व भी बताया गया।
जमुई। बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर केकेएम कॉलेज में 'आधुनिक समाज एवं राष्ट्र के विकास में पुरुषों का योगदान' विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई.परिचर्चा में पांच दिवस मनाया गया। परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. देवेंद्र कुमार गोयल ने की। मौके पर मुख्य वक्ता के बतौर बोलते हुए स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि एक मंच पर अनेक दिवस मनाना विचारों के संगम से समाज को नई दिशा देने जैसा है. 19 नवंबर प्रेरणाओं का पंचधारा संगम है। एक ही दिन पांच संदेश राष्ट्रीय चेतना का नया आंदोलन है। आज अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस है साथ ही विश्व शौचालय दिवस, नागरिक दिवस, लक्ष्मीबाई जयंती एवं इंदिरा गांधी जयंती भी है।
उन्होंने कहा कि 19 नवंबर जागरूकता, नेतृत्व समर्पण, नागरिक कर्तव्य, साहस और स्वच्छता का वैश्विक पर्व है। उन्होंने कहा कि पुरुष का आधुनिक समाज और राष्ट्र के विकास में बहुआयामी भूमिका है। पुरुष समाज की उन्नति का वह स्तंभ है, जो हर परिस्थिति में मजबूती के साथ खड़ा रहता है। पुरुष की पहचान के तीन स्तंभ हैं- नेतृत्व, समर्पण और संघर्ष। केवल महिला दिवस मनाना और पुरुष दिवस को नजर अंदाज करना समाज का संतुलित दृष्टिकोण नहीं है। संतुलित समाज के लिए पुरुष और महिला दोनों का सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि 19 नवंबर का दिन अपने आप में बहु आयामी प्रेरणा, जागरूकता और मानवीय मूल्यों का मिलन है। यह सुअवसर है जब पुरुषों की सकारात्मक भूमिका, स्वच्छता का महत्व, देशभक्ति की अमर प्रतीक महारानी लक्ष्मीबाई तथा भारत की पहली महिला पीएम आयरन लेडी स्व.इंदिरा गांधी सभी की स्मृति और संदेश एक ही दिन एकत्रित हो जाते हैं। राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि 19 नवंबर दिवस और जयंती का अद्भुत दिन है। आज के दिन पांच अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दिवस तथा जयंती है। विश्व पुरुष दिवस, विश्व शौचालय दिवस, नागरिक दिवस, लक्ष्मी बाई जयंती और इंदिरा गांधी जयंती है। अर्थशास्त्र की असिस्टेंट प्रोफेसर श्री सरदार राय ने कहा कि 19 नवंबर केवल कैलेंडर की तारीख नहीं बल्कि मूल्य, नेतृत्व, कर्तव्य और स्वच्छता का समग्र संदेश है। स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने सिखाया की नेतृत्व लिंग नहीं संकल्प मांगता है। हिंदी के विभागाध्यक्ष सह श्री कैलाश पंडित ने कहा कि नागरिक दायित्व समाज की आधारशिला है। पुरुष समाज का संवेदनशील सहयात्री हैं।राष्ट्र निर्माण में पुरुषों का योगदान श्रम ,नेतृत्व, ज्ञान-विज्ञान की संरक्षण के रूप में परिलक्षित होता है। रसायन विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एस. के. झा ने कहा कि पुरुष विकास की हर प्रक्रिया जैसे कृषि, उद्योग, शिक्षा, विज्ञान, खेल, रक्षा आदि में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हर पुरुष की मेहनत, त्याग और आदर्श राष्ट्र की प्रगति का आधार बनता है। पुरुष समाज की शक्ति और जिम्मेदारी का प्रतीक है। सहायक श्री सुशील कुमार ने कहा कि राष्ट्र का विकास पुरुषों की मेहनत, निष्ठा और नेतृत्व पर ही निर्भर करता है। अब महिलाएं भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। उनके योगदानो नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। महिला दिवस जितना 8 मार्च को जोर-शोर से मनाया जाता है, उतना 19 नवंबर को पुरुष दिवस पर नहीं मनाया जाता है। मौके पर कई कॉलेज कर्मी और छात्र उपस्थित थे।

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