
सहरसा के किसानों की मांग, सहयोग मिले तो सब्जी उत्पादन में आएगी नई क्रांति
सहरसा के ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी उत्पादक किसानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, लेकिन कम मुनाफे के कारण सब्जी खेती अपनाई। हालांकि, असमय बारिश और जलजमाव से नुकसान हो रहा है। किसानों ने आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, सस्ते ऋण और सरकारी सहायता की मांग की है।
प्रस्तुति : विजय झा

सहरसा के ग्रामीण इलाकों बनगांव, गोरहो टोला, महबा टोला, कमलपुर समेत कई गांवों में अब सब्जी उत्पादक किसानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले किसान धान, गेहूं जैसी पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, लेकिन कम मुनाफे और घटते उत्पादन के कारण उन्होंने सब्जी खेती अपनाई। कई किसानों ने अब एक से दो एकड़ में गोभी, बैंगन, भिंडी, लौकी जैसी फसलें लगानी शुरू की हैं। हालांकि असमय बारिश और जलजमाव से पौधों के गलने से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है। किसानों का कहना है कि सरकारी सहायता न मिलने से उन्हें महाजनों से ऊंचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। यदि उन्हें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, सस्ते ऋण और अनुदान उपलब्ध हो जाएं तो उनकी उपज और आय दोनों बढ़ सकती हैं। किसानों ने प्रखंड स्तर पर सरकारी गोदाम व मौसम की समय पर जानकारी की भी मांग की है, ताकि फसल खराब होने से बचाई जा सके।
सहरसा के ग्रामीण अंचलों बनगांव, गोरहो टोला, महबा टोला, कमलपुर तथा आसपास के कई गांवों में सब्जी उत्पादक किसानों की संख्या हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। पहले इन क्षेत्रों के किसान केवल धान, गेहूं और पारम्परिक फसलों की खेती पर निर्भर थे, लेकिन कम उत्पादन और कम मुनाफे के कारण धीरे - धीरे किसानों का रुझान सब्जी खेती की ओर बढ़ा। चार वर्ष पूर्व कई किसानों ने 5 – 5 कट्ठा भूमि में गोभी, बैंगन तथा अन्य सब्जियों की खेती की शुरुआत की। प्रारम्भिक स्तर पर अनुभव की कमी के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिला, फिर भी यह पारंपरिक खेती से अधिक फायदेमंद साबित हुई। धीरे - धीरे उत्साहित होकर किसानों ने सब्जियों की खेती का दायरा बढ़ाते हुए दो - दो एकड़ तक क्षेत्र में गोभी, भिंडी, बैंगन, लौकी, कद्दू जैसी फसलों को लगाना शुरू किया। लेकिन इस वर्ष असमय बारिश और खेतों में जलजमाव होने से हालत बेहद खराब हो गई। किसानों के अनुसार लगभग पांच हजार रुपये से अधिक मूल्य के पौधे गलकर नष्ट हो गए। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों का मानना है कि यदि उन्हें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, सरकारी अनुदान और सस्ते दर पर ऋण उपलब्ध हो जाए तो उनकी उपज और आय दोनों कई गुना बढ़ सकती हैं। फिलहाल अधिकतर किसान पारंपरिक तरीकों से ही खेती कर रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता सीमित रह जाती है। कई किसानों ने यह भी बताया कि जानकारी के अभाव और कीटों के प्रकोप से बचने के लिए कई लोग अत्यधिक रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का उपयोग कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है। सब्जी उत्पादक किसान मो राजा हुसैन, बिशो मुखिया सहित अनेक किसानों ने बताया कि सरकारी सहायता के अभाव में उन्हें महाजनों से ऊचे ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते हैं। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल नष्ट होने से भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। यदि सरकार बैंक से सस्ते दरों पर ऋण और समय पर अनुदान उपलब्ध कराए तो उनकी खेती ना सिर्फ सुरक्षित होगी, बल्कि आय भी बढ़ेगी। किसानों के अनुसार, कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी गांव तक नहीं पहुचती। कई किसान पंजीकरण के लिए कार्यालयों का चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन प्रक्रिया जटिल होने के कारण लाभ नहीं मिल पाता। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश किसानों को केसीसी लोन भी नहीं मिलता, खासकर भूमिहीन किसानों को, जो दूसरों की जमीन भाड़े पर लेकर खेती करते हैं। स्थिति यह है कि उत्पादन कम होने के कारण स्थानीय आवश्यकता की पूर्ति के लिए सहरसा को समस्तीपुर और अन्य जिले से सब्जिया आयात करनी पड़ती हैं।
जिले के किसान आर्थिक रूप से होंगे मजबूत
यदि स्थानीय किसानों को सही प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, अनुदान और ऋण समय पर उपलब्ध कराया जाए तो यह क्षेत्र सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है। फिलहाल, कई किसान संसाधनों की कमी और बाजार की अनिश्चितता के कारण पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि प्रखंड स्तर पर सरकारी सब्जी भंडारण गोदाम की व्यवस्था की जाए, ताकि बंपर उत्पादन के समय फसल को सुरक्षित रखा जा सके और नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार उचित दाम सुनिश्चित करने के लिए मंडी प्रबंधन को मजबूत करे और परिवहन सुविधा बेहतर बनाए। इसके अलावा, समय पर मौसम की सटीक जानकारी किसानों तक पहुंचे, ताकि वे सिंचाई, कीट नियंत्रण और फसल कटाई की योजना पहले से बना सकें। इससे स्थानीय किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और क्षेत्र सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।
हमारी भी सुनें
हम कृषि योजनाओं के बारे में ठीक से नहीं जानते। सरकारी कर्मी गांव में जानकारी देने कभी नहीं आते। अगर सही जानकारी मिले तो हम भी लाभ ले सकते हैं।
- दुलारचंद
इस बार की बारिश ने हमारी पूरी फसल बर्बाद कर दी। पौधे गलकर खत्म हो गए और भारी नुकसान हुआ। सरकार मुआवजा दे तो राहत मिलेगी।
- कारी कामत
हम वर्षों से खेती कर रहे हैं पर प्रशिक्षण नहीं मिला। अगर आधुनिक तकनीक सीखें तो ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। कृषि विभाग सिर्फ कागज पर सक्रिय दिखता है।
- मनमन रजक
रासायनिक खाद बहुत महंगी हो गई है। ज्यादा उपयोग करने से मिट्टी खराब हो रही है। अगर प्राकृतिक खाद का उपयोग सिखाया जाए तो अच्छा रहेगा।
- रोहित रजक
हमारे क्षेत्र में सब्जी भंडारण की सुविधा बिल्कुल नहीं है। फसल होने पर बेचने की जल्दी रहती है, वरना खराब हो जाती है।
- मुन्ना कामत
हम भूमिहीन किसान हैं, दूसरों की जमीन भाड़े पर लेते हैं। इसके बाद भी केसीसी लोन नहीं मिलता। अगर लोन मिले तो खेती बढ़िया चलेगी।
- राघव महतो
मौसम की सही जानकारी बहुत जरूरी है। बारिश कब होगी, इसका पूर्वानुमान न मिल पाने से नुकसान होता है। मोबाइल पर मौसम संदेश उपलब्ध हो तो राहत मिलेगी।
- राजा
बीज महंगे हैं और गुणवत्ता भी ठीक नहीं मिलती। अगर समय पर अच्छा बीज मिले तो उत्पादन बढ़ेगा। सरकार बीज वितरण की व्यवस्था मजबूत करे।
- विशो मुखिया
हमारे क्षेत्र के किसान मेहनती हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका मनोबल टूट रहा है। सरकार थोड़ा सहयोग करे तो खेती चमक उठेगी।
- मो.आलीम
कई योजनाए सिर्फ कागज तक सीमित हैं। जमीन पर इनका लाभ नहीं दिखता। किसानों का पंजीकरण तक ठीक से नहीं होता।
- मो. दुखाय
सब्जी खेती में लागत बहुत बढ़ी है। खाद, बीज और कीटनाशक के दाम काफी ज्यादा हैं। अगर सब्सिडी मिले तो राहत मिलेगी। अन्यथा खेती करना कठिन हो रहा है।
- मो. जुम्मेराती
सब्जी खेती में जोखिम बहुत होता है। बारिश, कीट और रोग से फसल तुरंत खराब हो सकती है। बीमा होना बहुत जरूरी है। इसका लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।
- मो. वसीम
सब्जी बेचने के लिए बाजार भी दूर है। दैनिक परिवहन में समय व पैसा दोनों खर्च होता है। स्थानीय बाजार विकसित किए जाए। इससे किसान की कमाई बढ़ेगी।
- मो.राजा
सरकार अगर ठोस कदम उठाए तो यह क्षेत्र सब्जी उत्पादन का केंद्र बन सकता है। मिट्टी और जलवायु दोनों अनुकूल हैं। सिर्फ तकनीक और सहायता की कमी है।
- मो. सलीम
सब्जी उत्पादन में महिलाएं भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। लेकिन उन्हें भी प्रशिक्षण और सहायता की आवश्यकता है। इसके लिए विशेष योजनाए बनाई जाए।
- मो.उस्मान
बोले जिम्मेदार
कहरा प्रखंड में आत्मा के तहत सब्जी उत्पादन के लिए अब तक 3 हजार से अधिक किसानों को 5 व 7 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। प्रमाणपत्र लेकर किसान बैंक से ऋण ले सकते हैं। इच्छुक किसान आत्मा कार्यालय से संपर्क कर इसका लाभ उठा सकते हैं।
- जय देव मिश्र, प्रभारी प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, कहरा
शिकायत
1. सब्जी उत्पादक किसानों की संख्या बढ़ रही है, फिर भी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंचता।
2. अधिकतर किसान बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण के खेती करते हैं।
3. उत्पादन बढ़ाने की चाह में किसान अत्यधिक रासायनिक पदार्थ उपयोग करते हैं।
4. स्थानीय उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। कम उत्पादन के कारण सहरसा को बाहर से सब्जियां मंगानी पड़ती हैं।
5. कई किसान दूसरों की जमीन भाड़े पर लेकर खेती करते हैं। फिर भी इन्हें सरकारी लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता।
सुझाव
1. सब्जी उत्पादक किसानों को सभी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
2. आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और फसल प्रबंधन की जानकारी दी जाए।
3. रासायनिक उर्वरक पर नियंत्रण अत्यधिक कीटनाशक उपयोग पर रोक लगाने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए।
4. उन्नत बीज और समय पर सिंचाई सुविधा दी जाए। फसल खराब होने पर बीमा लाभ दिया जाए। सब्जी भंडारण के लिए सरकारी गोदाम बनाए जाएं।
5. सस्ते ऋण से किसानों को राहत किसानों को बैंक से कम ब्याज पर ऋण दिया जाए।

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