सहरसा: गंगा, गीता गायत्री के समान तुलसी को सम्मान

सहरसा: गंगा, गीता गायत्री के समान तुलसी को सम्मान

संक्षेप:

सहरसा में गायत्री शक्तिपीठ में डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने तुलसी पर्व के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि तुलसी का नाम सुनने से हृदय पवित्र होता है और इसके गुणों के कारण इसे कई नामों से पुकारा जाता है। देवोत्थान एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन दांपत्य जीवन में सुख लाता है।

Nov 02, 2025 05:22 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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सहरसा। रविववार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र को संबोधित करते हुए डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने तुलसी पर्व एवं त्योहार और उत्सव के महत्व को बताते हुए कहा- सनातन संस्कृति में जो स्थान गी, गंगा गीता गायत्री का है, उतना ही महत्वपूर्ण स्थान तुलसी को प्राप्त है। 'तुलसी यह नामस्रमण ही हर हृदय को पवित्रता से परिपूर्ण कर देता है। पवित्र कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी को शुभ तुलसी विवाह का पर्व अत्यंत श्रद्धापूर्वक सोल्लास मनाया जाता है। तुलसी के अनेक गुणों का प्रकाश उसके अनेक पर्यायवाची नामों से ही हो जाता है। तुलसी के पत्ते चबाने से मुँह में लार जो कि अत्यन्त पाचक, अग्निवर्धक, भूख बढ़ाने वाला तत्व है बढ़ता है इसलिये उसे 'सीरसा कहा है।

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दूषित वायु, रोग और बीमारी के कीटाणु 'वायरस रूपी भूत, राक्षस और दैत्यों को मार भगाने के कारण उसे 'भूतघ्नी कहते हैं। दीर्घकालीन विकृतियों के फलस्वरूप असाध्य रोग पैदा हो जाता है और जो बहुत उपचार करने पर भी अच्छे नहीं होते; वह भी तुलसी से अच्छे हो जाते हैं इसलिए उसे 'पापाष्नी कहा गया है। इसका एक नाम फूल-पत्री है अर्थात् इसके पत्ते चबाने से शरीर शुद्ध होता है, शरीर में जीवनीशक्ति बढ़ाती और स्थिर रखती है इसलिये इसे 'कायस्था कहते हैं। तेजी से प्रभाव डालने के कारण तीव्र तथा यह एक अत्यन्त सरल चिकित्सा है इसलिये इसे 'सरला' नाम से भी पुकारते हैं। देवोत्थान एकादशी के दिन तुलसी जी और शालिग्राम भगवान के विवाह का आयोजन करने से सुखी दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है। नई पीढ़ी को अपने कुल देवी देवता के बारे में पता नहीं होता वे उनके महत्व को नहीं जानते, इसलिए साथ में पूजन की तैयारी करे, नई पीढ़ी को मान्यताओं के बारे में बताने पर आत्मिक शांति मिलती है।